यूपी के 1.88 लाख स्कूलों का स्वच्छ-हरित विद्यालय रेटिंग में स्व-मूल्यांकन पूरा, 31 अक्टूबर तक जांच
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2026-27 के तहत यूपी के 1,88,301 स्कूलों ने स्व-मूल्यांकन पूरा किया। 1,74,754 विद्यालयों को तीन स्टार या अधिक मिले; 31 अक्टूबर तक भौतिक सत्यापन होगा।

यूपी के 1.88 लाख स्कूलों का स्वच्छ-हरित विद्यालय रेटिंग में स्व-मूल्यांकन पूरा, 31 अक्टूबर तक होगा सत्यापन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2026-27 के तहत 1,88,301 विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन सर्वेक्षण पूरा कर पोर्टल पर जमा कर दिया है। इनमें से 1,74,754 विद्यालयों को तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग मिली है। अब इस प्रक्रिया के दूसरे चरण में विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और स्व-मूल्यांकन में दर्ज जानकारियों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए 31 अक्टूबर 2026 तक की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का उद्देश्य स्कूलों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। पहले चरण में विद्यालयों ने निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन किया। दूसरे चरण में जमीनी स्तर पर इन व्यवस्थाओं की जांच कर पोर्टल पर दर्ज विवरण का वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से विद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण परिवेश के रूप में विकसित करने की दिशा में इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। स्व-मूल्यांकन के बाद होने वाला भौतिक सत्यापन विद्यालयों की सुविधाओं और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं का वास्तविक आकलन करने का अगला चरण है।
जिलास्तरीय समितियों की निगरानी में होगा भौतिक सत्यापन
सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने के लिए जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों की अध्यक्षता जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी करेंगे। समिति में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जलापूर्ति, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है। निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता भी हो सकती है।
समितियां विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की जांच करेंगी और स्व-मूल्यांकन के दौरान पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं का सत्यापन करेंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना तथा स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।
डायट प्रशिक्षुओं और विभिन्न विभागों के कार्मिक बन सकते हैं मूल्यांकनकर्ता
भौतिक सत्यापन के लिए डायट (DIET) प्रशिक्षुओं, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), शिक्षक संकुल और संबंधित विभागों के पात्र मैदानी कार्मिकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायती राज, राजस्व, मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पात्र कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को भी सत्यापन कार्य में शामिल किया जा सकता है।
मूल्यांकनकर्ताओं को स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग की प्रश्नावली और निर्धारित मानकों की जानकारी होना आवश्यक है। उनके पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी आवश्यक सुविधाएं भी होनी चाहिए, ताकि सत्यापन से संबंधित जानकारी दर्ज की जा सके।
एक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 स्कूलों की जिम्मेदारी
सत्यापन कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाने का प्रावधान है। विद्यालयों की भौगोलिक निकटता और क्लस्टर को प्राथमिकता देकर स्कूलों का आवंटन किया जाएगा, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो सके।
31 अक्टूबर 2026 तक सत्यापन पूरा करने के लक्ष्य के तहत जिलास्तरीय समितियों और मूल्यांकनकर्ताओं की भूमिका अहम होगी। स्व-मूल्यांकन के बाद विद्यालयों की व्यवस्थाओं की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाएं किस हद तक मेल खाती हैं।
स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चेतना पर केंद्रित रेटिंग
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से स्कूलों में साफ-सफाई, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाता है। इसका आकलन केवल विद्यालयों के स्व-मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूसरे चरण में उपलब्ध व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष सत्यापन भी किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा, “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दूसरे चरण में भौतिक सत्यापन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी।”
प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों का स्व-मूल्यांकन पूरा होना इस अभियान का महत्वपूर्ण चरण है। अब निर्धारित समय-सीमा में भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद विद्यालयों के स्वच्छता और हरित परिवेश से जुड़े प्रबंधों का जमीनी आकलन सामने आएगा।



