मिशन कर्मयोगी से संवरेगा यूपी शिक्षा विभाग का कार्यबल, अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए दो कोर्स अनिवार्य
उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को मिशन कर्मयोगी पोर्टल के जरिए न्यूनतम दो कोर्स पूरे करने होंगे। अधूरे प्रशिक्षण वाले कार्मिकों को प्राथमिकता मिलेगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ उस व्यवस्था को संचालित करने वाले मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और बदलती जरूरतों के अनुरूप कार्यकुशलता विकसित करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के निरंतर क्षमता विकास को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी क्रम में मिशन कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए न्यूनतम दो कोर्स पूरा करना अनिवार्य किया गया है। खास तौर पर ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है या जिनके प्रशिक्षण पाठ्यक्रम अभी अधूरे हैं।
कार्यालयाध्यक्षों को भी कोर्स पूरा करने और अधीनस्थों को प्रशिक्षण दिलाने की जिम्मेदारी
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार केवल अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित कार्यालयाध्यक्षों को स्वयं भी मिशन कर्मयोगी के निर्धारित कोर्स पूरे करने होंगे। इसके साथ ही उन्हें अपने अधीन कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभागीय प्रशिक्षण को केवल उच्च स्तर के कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय इसे विद्यालय और जमीनी स्तर तक पहुंचाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक स्तर के मानव संसाधन में सीखने और अपनी कार्यक्षमता को लगातार बेहतर करने की संस्कृति विकसित हो सके।
मिशन कर्मयोगी के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण की यह व्यवस्था शिक्षा विभाग के कार्मिकों में नई दक्षताओं, कार्यकुशलता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। विभाग का जोर इस बात पर है कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि कार्मिक अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित नई जानकारी और कौशल हासिल करें तथा उसका उपयोग विभागीय योजनाओं और अपने दैनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में करें।
छह अलग-अलग विषयों पर उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण कोर्स
राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा नोडल डॉ. मुकेश चंद्र के अनुसार कार्मिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छह कोर्स चयनित कर साझा किए गए हैं। इनमें ‘स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली’, ‘इंग्लिश वोकैबुलरी: कॉमनली मिसयूज्ड एंड कन्फ्यूज्ड वर्ड्स’, ‘पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां’, ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’, ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ और ‘बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट’ शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों में डिजिटल जीवनशैली और स्क्रीन टाइम प्रबंधन से लेकर अंग्रेजी शब्दावली, पूर्व प्राथमिक स्तर पर प्रभावी शिक्षण, कार्यस्थल पर योग, तनाव प्रबंधन और परियोजना प्रबंधन जैसे अलग-अलग विषयों को शामिल किया गया है। इससे कार्मिकों को अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप नई जानकारी हासिल करने और व्यक्तिगत तथा पेशेवर कार्यकौशल को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इन कोर्सों के चयन से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रशिक्षण को केवल विभागीय प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, कार्यस्थल पर तनाव और मानसिक संतुलन, प्रभावी शिक्षण पद्धतियों तथा प्रोजेक्ट प्रबंधन जैसी क्षमताओं को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलते कार्य वातावरण के अनुरूप खुद को अपडेट करने में मदद मिल सकती है।
अधूरे प्रशिक्षण वाले कार्मिकों को मिलेगी प्राथमिकता
निर्देशों में विशेष रूप से ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है, जिन्होंने अब तक मिशन कर्मयोगी के तहत कोई कोर्स पूरा नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अभी अपूर्ण हैं। संबंधित कार्यालयाध्यक्षों को ऐसे कार्मिकों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभाग के सभी स्तरों पर कार्यरत मानव संसाधन क्षमता विकास की प्रक्रिया से जुड़े रहें और प्रशिक्षण की व्यवस्था केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों तक सीमित न रह जाए।
योगी सरकार की इस कार्यसंस्कृति में निरंतर सीखने को बेहतर कार्यान्वयन की आधारभूमि माना जा रहा है। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने योजनाओं के संचालन, प्रशासनिक कार्यों, विद्यालयी व्यवस्था और तकनीकी बदलावों के साथ कदमताल करने की लगातार जरूरत रहती है। ऐसे में मिशन कर्मयोगी के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण उन्हें अपनी कार्यक्षमता को समय के साथ अपडेट करने का अवसर देता है।
कार्यालयों से लेकर विद्यालयों तक पहुंचेगा क्षमता विकास
मिशन कर्मयोगी के प्रशिक्षण कार्यक्रम को कार्यालय से विद्यालय स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रशिक्षण संबंधी संदेश को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न स्तरों के कार्मिकों को एक साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। विभाग का प्रयास है कि प्रशिक्षण का प्रभाव केवल कोर्स पूरा करने तक सीमित न रहे, बल्कि उससे प्राप्त जानकारी और कौशल को दैनिक कार्यप्रणाली में भी शामिल किया जाए।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके मानव संसाधन की दक्षता और क्षमता बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे रही है। उनके अनुसार मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को निरंतर सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दक्ष और संवेदनशील मानव संसाधन ही सरकार की शिक्षा नीतियों को प्रभावी रूप से धरातल तक पहुंचाने की शक्ति बनता है।
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वहीं, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय कार्मिकों के सतत क्षमता विकास को गति दी जा रही है। उनका प्रयास है कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और सीखने की इस प्रक्रिया को अपने कार्य से जोड़े। उन्होंने विशेष रूप से अपूर्ण अथवा अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले कार्मिकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
कुल मिलाकर, मिशन कर्मयोगी के जरिए शिक्षा विभाग में क्षमता विकास को नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए न्यूनतम दो कोर्स अनिवार्य किए जाने तथा अधूरे प्रशिक्षण को प्राथमिकता से पूरा कराने के निर्देशों से विभाग के मानव संसाधन को लगातार सीखने और नई कार्यदक्षताओं से जोड़ने पर जोर दिखाई देता है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को केवल नीतियों और योजनाओं के स्तर पर मजबूत करना नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाले पूरे कार्यबल की दक्षता को भी लगातार बेहतर बनाना है।




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