योगी सरकार में मजबूत हुई बेसिक शिक्षा की नींव, कम्पोजिट विद्यालयों में 9 साल में 1.84 लाख शिक्षक बढ़े
उत्तर प्रदेश में कम्पोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या 2016-17 के 918 से बढ़कर 2025-26 में 1,85,408 हो गई। विद्यालयों की संख्या भी बढ़ी।

योगी सरकार में मजबूत हुई बेसिक शिक्षा की नींव, कम्पोजिट विद्यालयों में 9 साल में 1.84 लाख शिक्षक बढ़े
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विद्यालयों के एकीकरण और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कम्पोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या वर्ष 2016-17 में 918 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,85,408 हो गई। इस तरह इन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में करीब 1.84 लाख की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही प्रदेश में कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या भी 2017-18 के 225 से बढ़कर 2025-26 में 24,605 हो गई।
राज्य की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एकीकृत कर कम्पोजिट विद्यालयों के रूप में संचालित करने की व्यवस्था अपनाई गई है। इसका उद्देश्य एक ही परिसर में विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना और उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
2016-17 में 918 से बढ़कर 1,85,408 हुई शिक्षकों की संख्या
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कम्पोजिट विद्यालयों में वर्ष 2016-17 के दौरान शिक्षकों की संख्या 918 थी। वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर 1,85,408 पहुंच गया। यानी इस अवधि में शिक्षकों की संख्या में लगभग 1.84 लाख का इजाफा हुआ।
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के एकीकरण के बाद कम्पोजिट विद्यालयों का दायरा बढ़ा है। इस प्रक्रिया के तहत एक ही परिसर में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण व्यवस्था विकसित की गई है। उपलब्ध जानकारी में शिक्षक उपलब्धता से जुड़े बदलाव के साथ शैक्षिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।
हालांकि, शिक्षकों की कुल संख्या में हुई वृद्धि और नई नियुक्तियों की वास्तविक संख्या अलग-अलग तथ्य हैं। इसलिए इस आंकड़े को कम्पोजिट विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या में हुई बढ़ोतरी के रूप में समझना उचित होगा।
कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या 225 से बढ़कर 24,605 हुई
यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2017-18 में 225 कम्पोजिट विद्यालय थे। वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 24,605 हो गई। इस तरह संबंधित अवधि में कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या में 24,380 की वृद्धि दर्ज की गई।
इन विद्यालयों में बालवाटिका से लेकर कक्षा आठ तक एक ही परिसर में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था बताई गई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की पढ़ाई को एकीकृत करने से विद्यार्थियों को एक ही परिसर में आगे की कक्षाओं तक शिक्षा जारी रखने की सुविधा मिलती है। साथ ही विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों का समन्वित उपयोग करने पर जोर दिया जाता है।
कम्पोजिट विद्यालयों के विस्तार को प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में किए गए संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए शिक्षकों की उपलब्धता के साथ विद्यार्थियों की उपस्थिति, सीखने के स्तर और विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं जैसे पहलुओं को भी देखना आवश्यक है।
शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा
शिक्षकों के हितों से जुड़ी सुविधाओं में पांच लाख रुपये तक की मुफ्त कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य पात्र शिक्षकों को निर्धारित सीमा तक कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। हालांकि, इस सुविधा की पात्रता, लागू नियमों और अस्पतालों से संबंधित विवरण की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026-27 में नियमित प्रशिक्षण पर 58 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। शिक्षकों के प्रशिक्षण को शिक्षण प्रक्रिया और पेशेवर क्षमता के विकास से जोड़कर देखा जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का वास्तविक प्रभाव उनके पाठ्यक्रम, अवधि, शिक्षकों की भागीदारी और कक्षा में उनके उपयोग पर निर्भर करेगा।
मानव संपदा पोर्टल और टैबलेट से जुड़ी सुविधाएं
शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल का भी उल्लेख किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से छुट्टी और वेतन से संबंधित प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने का उद्देश्य बताया गया है।
इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय में सहयोग के लिए दो टैबलेट उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई है। डिजिटल उपकरणों का उपयोग शैक्षिक और प्रशासनिक कार्यों में किया जा सकता है। इन सुविधाओं का लाभ विद्यालयों में उपकरणों की वास्तविक उपलब्धता, उनके नियमित उपयोग और इंटरनेट जैसी आवश्यक सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
उत्तर प्रदेश में कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या और उनमें शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े आंकड़े विद्यालयों के एकीकरण और विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। एक परिसर में बालवाटिका से कक्षा आठ तक शिक्षा की व्यवस्था विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए उपयोगी हो सकती है। वहीं, शिक्षकों के प्रशिक्षण, चिकित्सा सुविधा और डिजिटल संसाधनों जैसे उपायों का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन तथा शिक्षकों से जुड़े कार्यों को बेहतर बनाना है।



