यूपी में 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र, योगी बोले- अब नौकरी पर सैफई या सिफारिश का नहीं, प्रतिभा का अधिकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस में कुशल खिलाड़ी कोटे से चयनित 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए। बोले- अब नौकरी में सिफारिश नहीं, सिर्फ प्रतिभा और परिश्रम का अधिकार है।

यूपी में 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी बोले- अब नौकरी पर सैफई या सिफारिश का नहीं, प्रतिभा और पसीने का अधिकार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत चयनित 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के संघर्ष, उपलब्धियों और खेल के प्रति सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं की नौकरी पर एक परिवार का कब्जा था और नौकरी पाने के लिए ‘सैफई या सिफारिश’ की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब नियुक्तियों में न सिफारिश चलती है और न पैसे का प्रभाव। उनके मुताबिक अब नौकरी पर केवल खिलाड़ी की प्रतिभा, परिश्रम और पसीने का अधिकार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ‘प्रदेश डुबाओ एलायंस’ था, जबकि अब एनडीए की सरकार है और उन्होंने एनडीए को ‘नौकरी देंगे एलायंस’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने मैदान पर मेहनत करके अपनी प्रतिभा साबित की है, उन्हें उसी आधार पर सरकारी सेवा में आने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र पाने वाले खिलाड़ियों से यह भी पूछा कि क्या भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी ने उनसे पैसे की मांग की या किसी को सिफारिश कराने की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति न सरकार की कृपा है और न मुख्यमंत्री की अनुकंपा, बल्कि खिलाड़ियों के पसीने और परिश्रम की कीमत है।
‘सैफई या सिफारिश’ के दौर का मुख्यमंत्री ने किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय खिलाड़ियों के लिए पुलिस अथवा अन्य विभागों में सीधी भर्ती की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहाता था, लेकिन नौकरी के लिए सिफारिश कराने की स्थिति में नहीं होता था। मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौर में अराजक तत्वों को संरक्षण मिला और उन्होंने दावा किया कि सपा ने प्रदेश में 10 लाख गुंडे पाले थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक इसके विपरीत उनकी सरकार ने 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का काम किया है।
सपा की ओर से युवाओं को नौकरी देने के मुद्दे पर किए जाने वाले दावों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वैसा ही है जैसे कोई मगरमच्छ शांति का उपदेश दे रहा हो। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे खूब खेलें, पसीना बहाएं और नए रिकॉर्ड बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसी नीति बनाई है कि खिलाड़ियों को नौकरी के अवसर मिलेंगे और किसी को उनके प्रमोशन को रोकने का अधिकार नहीं होगा।
युवाओं को शराब और सपा से सावधान रहने की नसीहत
मुख्यमंत्री ने युवाओं से शराब और समाजवादी पार्टी से सावधान रहने की बात भी कही। उन्होंने दोनों को प्रदेश की बदहाली से जोड़ते हुए राजनीतिक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की खेल नीति का उद्देश्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना, उन्हें सम्मान देना और अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में खनन, भर्ती और रिवर फ्रंट समेत विभिन्न मामलों को लेकर उठने वाले सवालों का जिक्र किया और कहा कि अब उत्तर प्रदेश की चर्चा मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज और खिलाड़ियों के मेडल्स के लिए हो रही है। मुख्यमंत्री ने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के 107 मेडल जीतने का उल्लेख करते हुए खिलाड़ियों से इससे आगे नए रिकॉर्ड बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खिलाड़ियों के साथ संवाद और उन्हें प्रोत्साहित किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले भारत की पहचान राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े घोटालों से होती थी, जबकि अब भारतीय खिलाड़ी देश के लिए पदक लेकर लौट रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहचान में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, “मर्डर और मेडल में अंतर है- एक पहचान दिलाता है और दूसरा पहचान डुबोता है।”
470 खिलाड़ियों की ‘जर्सी से वर्दी’ तक की यात्रा
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले 470 खिलाड़ियों में 303 पुरुष और 167 महिलाएं शामिल हैं। आरक्षी नागरिक पुलिस में 295 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें 148 पुरुष और 147 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस में 43 पुरुष और 20 महिलाएं तथा आरक्षी पीएसी में 132 खिलाड़ियों का चयन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि उनकी ‘जर्सी से वर्दी’ की यात्रा आज से शुरू हुई है। मैदान में जिस अनुशासन, टीम वर्क, परिश्रम और समर्पण के साथ उन्होंने परिणाम हासिल किए हैं, पुलिस की वर्दी पहनने के बाद भी उनसे उसी अनुशासन और समर्पण की अपेक्षा रहेगी। उन्होंने कहा कि जीवन में जीत महत्वपूर्ण है, लेकिन हार के बाद दोबारा खड़ा होना, तैयारी करना, संघर्ष करना और अंततः मेडल जीतकर लौटना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
2017 के बाद खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की व्यवस्था का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पुलिस अथवा अन्य विभागों में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का कोई नियम नहीं था। उनकी सरकार ने पुलिस भर्ती की प्रक्रिया के साथ विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति देने की व्यवस्था शुरू की। मुख्यमंत्री के मुताबिक अब तक करीब 1,000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 1,470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और 555 खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले सात कुशल खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी का पद दे चुकी है। उन्होंने हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय और गाजीपुर के राजकुमार पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी खेल प्रतिभा और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पुलिस सेवा में डिप्टी एसपी के पद पर नियुक्ति दी गई।
डिप्टी एसपी बनने के लक्ष्य ने दिलाया गोल्ड
मुख्यमंत्री ने एक खिलाड़ी के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि जब उन्होंने उससे मेडल जीतने के पीछे की प्रेरणा पूछी तो खिलाड़ी ने कहा कि उसने गोल्ड मेडल इसलिए जीता क्योंकि उसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी बनना था। मुख्यमंत्री ने उसके लक्ष्य की तुलना अर्जुन के लक्ष्य से करते हुए कहा कि जिस प्रकार अर्जुन का निशाना अपने लक्ष्य पर केंद्रित था, उसी तरह खिलाड़ी ने भी अपने लक्ष्य को सामने रखकर देश के लिए मेडल हासिल किया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश के खिलाड़ियों को ओलंपिक और अन्य प्रतियोगिताओं में पदक जीतने पर अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार खिलाड़ियों के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार कर रही है और गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक खेल के लिए बेहतर ढांचा तैयार किया जा रहा है।
64 हजार हेक्टेयर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद भू-माफिया के खिलाफ अभियान चलाया गया और सरकारी, गरीबों, व्यापारियों तथा सार्वजनिक स्थलों की जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि करीब 64 हजार हेक्टेयर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया और अब उसी भूमि का उपयोग गांव, ब्लॉक, जनपद और प्रदेश स्तर पर खेल सुविधाओं के विकास में किया जा रहा है।
उन्होंने प्रदेश में खेल मैदान, मिनी स्टेडियम, स्टेडियम और इंटरनेशनल स्टेडियम विकसित किए जाने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं और इनमें विभिन्न खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किए जा रहे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की अभ्यास सुविधाएं, प्रशिक्षित कोच और आवश्यक टीम उपलब्ध होगी।
खिलाड़ियों से नशे के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नशे के खिलाफ सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर कोई बन सकता है तो वह खिलाड़ी है। उनके मुताबिक खिलाड़ी यह बेहतर समझ सकता है कि नशे की कीमत व्यक्ति, परिवार और समाज को क्या चुकानी पड़ती है। उन्होंने हर खिलाड़ी से नशे के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1,400 से अधिक कुशल खिलाड़ी उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन खिलाड़ियों को गांवों से जोड़ा जाए और उन्हें सप्ताह में कम से कम एक दिन गांवों में खेल गतिविधियों के संचालन के लिए भेजा जाए। मुख्यमंत्री ने महिला बीट पुलिस अधिकारियों के गांवों में जाने की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी प्रकार पुलिस के खिलाड़ी भी ग्रामीण युवाओं को खेल से जोड़ने में भूमिका निभा सकते हैं।
‘रील में लाइक्स मिलते हैं, खेल के मैदान में लाइफ’
मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ते रील कल्चर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवा घंटों रील में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “रील में लाइक्स मिलते हैं, लेकिन खेल के मैदान में लाइफ मिलती है।” उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर केवल लाइक्स हासिल करने के बजाय खेल के मैदान में मेहनत करके वास्तविक उपलब्धियां हासिल करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति खिलाड़ियों के जीवन में एक नए चरण की शुरुआत है। अच्छा प्रदर्शन, नियमित अभ्यास और खुद को मजबूत बनाने के साथ उनके सामने पदोन्नति और आगे बढ़ने के अवसर भी खुलेंगे।
केशव प्रसाद मौर्य बोले- नियुक्ति मिलने से खेल खत्म नहीं हुआ
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकारी नियुक्ति मिलने के बाद खिलाड़ियों का खेल समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब बेहतर कानून-व्यवस्था की चर्चा देशभर में हो रही है। उनके मुताबिक पहले खिलाड़ियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिलते थे, जबकि अब पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं।
खेल राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि ढाई गुना से अधिक बढ़ाई है। उन्होंने खेल नीति-2023 और आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए बनाए गए एकलव्य क्रीड़ा कोष का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है। गिरीश चंद्र यादव ने मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के निर्माण का भी उल्लेख किया।
पुलिस सेवा में खिलाड़ियों की भूमिका पर डीजीपी ने रखा पक्ष
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक 950 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती हो चुकी है। उनके मुताबिक निरीक्षक और दलनायक पद पर 14, उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर पद पर 59 तथा मुख्य आरक्षी पद पर 440 आउट ऑफ टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि खेल के माध्यम से विकसित हुआ अनुशासन और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता पुलिस सेवा में भी उपयोगी साबित होगी।
कार्यक्रम में खिलाड़ियों के संघर्ष पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसमें भदोही के छेछुआ गांव की गुड़िया की कहानी शामिल थी, जिन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय पदक जीता है। नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों ने खाकी वर्दी पहनकर जनसेवा का संकल्प भी जताया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मंत्री गिरीश चंद्र यादव, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड एस.बी. शिरोडकर, पुलिस महानिदेशक पीएसी आलोक सिंह समेत उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।



