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योगी सरकार ने तैयार किया बाल ट्रामा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोड मैप, 6 करोड़ बच्चों के लिए एकीकृत पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल

योगी सरकार बच्चों के ट्रॉमा उपचार को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी में है। 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाओं और 2,853 नए बेड के जरिए करीब 6 करोड़ बच्चों को त्वरित उपचार देने का लक्ष्य है।

173 इंटरकनेक्टेड ट्रॉमा सुविधाओं और 2,853 नए बेड का प्रस्ताव, हर साल करीब 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य

लखनऊ, 1 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों का सामना करने वाले बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया गया है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इसका उद्देश्य प्रदेश के करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल लेकिन कम लागत वाली एकीकृत ट्रॉमा केयर व्यवस्था विकसित करना है। प्रस्तावित मॉडल में अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क के रूप में जोड़ने पर जोर रहेगा। इस व्यवस्था के जरिए बच्चों में ट्रॉमा के बाद इलाज मिलने में होने वाली देरी को कम करने और हर साल करीब 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी 3-5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12-15 प्रतिशत करने का लक्ष्य

प्रस्तावित व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की उपलब्धता बढ़ाना है। वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी करीब 3 से 5 प्रतिशत बताई गई है। एकीकृत ट्रॉमा केयर आर्किटेक्चर के जरिए इसे बढ़ाकर 12 से 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रदेश में अलग-अलग स्तर की ट्रॉमा सुविधाओं को आपस में जोड़ने की योजना है, ताकि गंभीर रूप से घायल बच्चे को उसकी स्थिति के अनुसार उचित स्तर के अस्पताल तक जल्द पहुंचाया जा सके। प्रस्तावित नेटवर्क में लेवल-1 की एक, लेवल-2 की 36 और लेवल-3 की 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट (आईटीईएमयू) शामिल होंगी। इस तरह कुल 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाएं तैयार होंगी और करीब 2,853 नए बेड जुड़ेंगे। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद बच्चे को बार-बार अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किए जाने से होने वाली देरी को कम करते हुए जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।

दुर्घटना स्थल से विशेषज्ञ उपचार तक जुड़ेगा पूरा ट्रॉमा नेटवर्क

पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल का फोकस केवल अस्पतालों में बेड बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, एंबुलेंस के जरिए ट्रॉमा सेंटर तक पहुंच, विशेषज्ञ चिकित्सा, रेफरल और आगे की देखभाल को एक समन्वित व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर है। गंभीर रूप से घायल बच्चे को किस स्तर की चिकित्सा सुविधा की जरूरत है, उसके अनुसार रेफरल व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। इससे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक मरीज को भेजने में लगने वाला अतिरिक्त समय कम किया जा सकेगा और गंभीर स्थिति वाले बच्चों को जल्द विशेषज्ञ उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी। हालिया चिकित्सा शोध में भी प्रशिक्षित पीडियाट्रिक ट्रॉमा रिससिटेशन के बाद शुरुआती परिणामों में सुधार दर्ज किया गया है, जिससे बच्चों के लिए विशेष ट्रॉमा प्रशिक्षण और समयबद्ध उपचार की उपयोगिता सामने आती है।

‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज पर विशेष जोर

बच्चों के ट्रॉमा मामलों में दुर्घटना के बाद शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित व्यवस्था में ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष फोकस रहेगा। इसके लिए दुर्घटना के बाद तत्काल रिस्पांस, प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उपयुक्त ट्रॉमा सेंटर तक तेजी से रेफरल की व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने की योजना है। प्रदेश में बच्चों के ट्रॉमा मामलों पर हुए शोध में भी सड़क दुर्घटनाओं को प्रमुख कारणों में शामिल पाया गया है और समय पर विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

करीब 45 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

इस एकीकृत पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर व्यवस्था को विकसित करने के लिए योगी सरकार की ओर से करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्तावित निवेश का उद्देश्य ट्रॉमा केयर के अलग-अलग स्तरों को जोड़ना, आवश्यक बेड क्षमता विकसित करना, इमरजेंसी रिस्पांस और रेफरल व्यवस्था को मजबूत करना तथा बच्चों को दुर्घटना के बाद समय पर उपयुक्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

सरकार का फोकस: समय पर इलाज और समन्वित बाल ट्रॉमा केयर

इस पहल में सरकार का मुख्य फोकस बच्चों में गंभीर चोटों के बाद इलाज में होने वाली देरी को कम करने और मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य ढांचे को पीडियाट्रिक ट्रॉमा के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर है। करीब 6 करोड़ बच्चों की आबादी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित मॉडल में अस्पताल, एंबुलेंस, मेडिकल विशेषज्ञ, ट्रॉमा यूनिट और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क में लाने की योजना है। 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाओं और 2,853 नए बेड के प्रस्ताव के साथ यह मॉडल प्रदेश में बच्चों के लिए ट्रॉमा उपचार की उपलब्धता और समयबद्धता बढ़ाने पर केंद्रित है।

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