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UP Rise 2026: मुरादाबाद में टीएमयू के 3 स्टार्टअप्स ने मारी बाजी, ‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ को ₹25 हजार

मुरादाबाद में UP Rise 2026 के फाइनल में टीएमयू की तीन छात्र टीमों ने बाजी मारी। ‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ को पहला पुरस्कार और ₹25 हजार का चेक मिला।

मुरादाबाद में UP Rise 2026 का महामंच, टीएमयू के तीन युवा स्टार्टअप्स ने मारी बाजी , 100 टीमों से शुरू हुआ मुकाबला, तीन चरणों की स्क्रीनिंग के बाद 15 टीमें पहुंचीं फाइनल में; ‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ को मिला ₹25 हजार का पुरस्कार

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित UP Rise 2026 का आयोजन तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू), मुरादाबाद में हुआ। ‘संवाद, संकल्प, सफलता’ की थीम वाले इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपने स्टार्टअप आइडिया और व्यावसायिक मॉडलों को विशेषज्ञों और मेंटर्स के सामने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में 100 टीमों के पंजीकरण से शुरू हुई प्रतियोगिता तीन चरणों की स्क्रीनिंग के बाद 15 टीमों के फाइनल तक पहुंची। अंतिम चरण के तकनीकी मूल्यांकन के बाद तीन छात्र स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया। शीर्ष स्थान हासिल करने वाली ‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ टीम को 25 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। यूपी राइज 2026 के विभिन्न आयोजनों में विद्यार्थियों के स्टार्टअप आइडिया को पिचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ ने जीता पहला पुरस्कार, पानी के दबाव से जीभ की सफाई का प्रोटोटाइप

प्रतियोगिता में पहला स्थान टीएमयू के डेंटल कॉलेज की टीम ‘ओरल केयर इनोवेटर्स’ ने हासिल किया। टीम को 25,000 रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया। टीम के सदस्यों ने अपने आइडिया की प्रस्तुति में बताया कि दांतों की सफाई पर आमतौर पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि जीभ की सफाई की अनदेखी से मुंह की दुर्गंध यानी हैलिटोसिस और कैंडिडिआसिस जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। टीम पिछले करीब एक वर्ष से ऐसे प्रोटोटाइप पर काम कर रही है, जिसमें नियंत्रित वाटर प्रेशर के जरिए जीभ पर जमा परत को साफ करने का प्रयास किया गया है। टीम के अनुसार इसका उद्देश्य पारंपरिक टंग क्लीनर के मुकाबले अधिक सुविधाजनक और प्रभावी विकल्प विकसित करना है।

‘सॉकेट सेवर्स’ दूसरे स्थान पर, दांत निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाने का दावा

दूसरा स्थान भी टीएमयू के डेंटल कॉलेज की छात्राओं समर्पिता गाबा और आशिका जैन की टीम ‘सॉकेट सेवर्स’ ने हासिल किया। टीम ने दांत निकालने की प्रक्रिया से जुड़े दर्द और यांत्रिक खिंचाव को कम करने के उद्देश्य से अपनी तकनीक प्रस्तुत की। टीम के मुताबिक उन्होंने लोकल एनेस्थीसिया के साथ इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष इंजेक्शन तकनीक विकसित करने का प्रयास किया है, जिससे दांत को निकालने के दौरान भारी यांत्रिक बल की जरूरत कम हो सके। टीम का लक्ष्य आगे इसके क्लिनिकल ट्रायल पूरे कर स्थानीय स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करना है। टीम के अनुसार इससे तकनीक को व्यावहारिक रूप देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकेंगे।

‘टीम वास्तव’ का एसओएस सिस्टम, आपात स्थिति में मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध कराने का आइडिया

तीसरे स्थान पर कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज के छात्रों तन्मय, विनीत, कार्तिक और नमन की ‘टीम वास्तव’ रही। टीम ने सड़क दुर्घटनाओं जैसी आपात स्थितियों में मरीज की मेडिकल जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के लिए एसओएस आधारित मेडिकल डेटा सिस्टम प्रस्तुत किया। टीम के मुताबिक दुर्घटना में घायल व्यक्ति के बेहोश होने की स्थिति में डॉक्टरों के लिए उसकी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी, पुरानी बीमारियों और अन्य जरूरी जानकारी हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए सिस्टम में एसओएस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किए जाने के बाद संबंधित अस्पताल तक मरीज की आवश्यक जानकारी पहुंचाने का मॉडल पेश किया गया है। टीम के अनुसार इसमें ब्लड ग्रुप, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री का संक्षिप्त डेटा उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी और आगे इसका व्यापक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है।

100 टीमों से 15 फाइनलिस्ट तक पहुंचा मुकाबला

टीएमयू में आयोजित इस प्रतियोगिता में शुरुआती चरण में 100 टीमों ने पंजीकरण कराया। स्क्रीनिंग के अगले चरण में 35 टीमों का चयन हुआ और इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन के जरिए 15 टीमों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया। अंतिम चरण में जजों के पैनल ने छात्र टीमों के आइडिया की उपयोगिता, सामाजिक प्रभाव और व्यावसायिक संभावनाओं को परखा। इस प्रक्रिया के बाद डेंटल कॉलेज की दो टीमों ने पहला और दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि कंप्यूटर साइंस की टीम तीसरे स्थान पर रही। इस तरह प्रतियोगिता में स्वास्थ्य और तकनीक से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों के छात्र नवाचारों को मंच मिला।

16 हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले टीएमयू में नवाचार पर जोर

टीएमयू के कुलपति डॉ. वी.के. जैन के अनुसार विश्वविद्यालय में 16 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और आधुनिक संसाधनों के साथ उन्हें नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी आधारभूत व्यवस्था और विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए टीएमयू को यूपी राइज के आयोजन के लिए केंद्र बनाया गया। प्रतियोगिता में शामिल जजों के पैनल में स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों के आइडिया को व्यावहारिक उपयोग, सामाजिक प्रभाव और कारोबारी संभावनाओं के आधार पर परखा।

‘शक्ति क्षेत्र’ में युवाओं ने साझा किए आत्मनिर्भर यूपी के सपने

कार्यक्रम के दौरान परिसर में विद्यार्थियों की रचनात्मकता को मंच देने के लिए ‘शक्ति क्षेत्र’ भी बनाया गया। यहां छात्र-छात्राओं ने विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश को लेकर अपने विचार, सपने और सुझाव साझा किए। आयोजन में विभिन्न गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाई गई और सक्रिय प्रतिभागियों को किट, उपहार और प्रमाणपत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का व्यापक संदेश युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाले के रूप में नहीं, बल्कि अपने नवाचार और उद्यम के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करने वाले संभावित उद्यमी के रूप में तैयार करने पर केंद्रित रहा।

सरकार का फोकस: युवाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ना

UP Rise 2026 के आयोजन में युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार, करियर और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश में इस अभियान के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में आयोजित चरणों में छात्र टीमों को अपने आइडिया विशेषज्ञों के सामने रखने, मेंटरशिप हासिल करने और पिचिंग के जरिए अपने मॉडल को परखने का अवसर दिया जा रहा है। मुरादाबाद के टीएमयू चरण में भी यही मॉडल दिखाई दिया, जहां 100 टीमों की शुरुआती भागीदारी से आगे बढ़ते हुए 15 टीमें फाइनल तक पहुंचीं और तीन टीमों को उनके प्रस्तुत नवाचारों के लिए सम्मानित किया गया।

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