यूपी के सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा हुनर, ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत 30 सितंबर से ट्रेनिंग
योगी सरकार के ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण मिलेगा। 31 प्रशिक्षण संस्थाओं को लक्ष्य दिया गया है और 30 सितंबर 2026 तक ट्रेनिंग शुरू होगी।

उत्तर प्रदेश में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने एक और पहल की है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत प्रदेश के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को प्रशिक्षण का लक्ष्य सौंपा गया है। सभी चयनित संस्थाओं को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, उनका अनुमोदन कराने, विद्यार्थियों का पंजीकरण करने और बैच गठित करने की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करनी होगी। सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर 30 सितंबर 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।
पढ़ाई के साथ रोजगारपरक कौशल सीखेंगे विद्यार्थी
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का उद्देश्य सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल से जोड़ना है, जो भविष्य में उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों के लिए तैयार कर सकें . विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के अनुसार अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट सहित अन्य रोजगारपरक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार की कौशल विकास नीति के तहत इस पहल का उद्देश्य युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार की ओर ले जाना है। स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और भविष्य के लिए जरूरी दक्षताएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी
प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बैच का आकार भी निर्धारित किया गया है। एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी शामिल होंगे। वहीं प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को नियमित स्कूली शिक्षा प्रभावित किए बिना कौशल प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिलेगा। मिशन का जोर केवल प्रशिक्षण शुरू कराने पर नहीं, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी है। प्रशिक्षण प्रदाता को मिशन मुख्यालय में अनुबंध जमा कर उसकी पुष्टि करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) को बैच गठित करने की अनुमति दी जाएगी।
मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही दिया जाएगा प्रशिक्षण
विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणिक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए बैच को मंजूरी देने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर संबंधित जॉब रोल की जांच की जाएगी। इसके बाद केवल वैध और मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पोर्टल पर भी उन्हीं बैच और सेक्टर को मंजूरी मिलेगी, जो संबंधित प्रशिक्षण संस्था को आवंटित किए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर मिलेगी पाठ्य सामग्री
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को आवश्यक संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं को बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर पाठ्य सामग्री उपलब्ध करानी होगी। विद्यार्थियों को सामग्री दिए जाने की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें भी मिशन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए भुगतान भी निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के अनुसार किया जाएगा।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर जोर
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने प्रशिक्षण प्रदाताओं को सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुसार पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मिशन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तव में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण कौशल हासिल हो। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल में ही कौशल प्रशिक्षण मिलने से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे रोजगार एवं बेहतर करियर के अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।
क्या है ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का उद्देश्य?
‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक और रोजगारपरक कौशल से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों के लिए तैयार करना है। इस पहल के तहत प्रशिक्षण की गुणवत्ता, बैच के आकार, मान्यता प्राप्त जॉब रोल, पाठ्य सामग्री और प्रशिक्षण की समयसीमा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे का बयान
“हमारा लक्ष्य है कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थी स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में कुशल हो सकें, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें। स्कूल में ही कौशल से जुड़ने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे रोजगार व बेहतर करियर के अवसरों के लिए वे अधिक सक्षम बन सकेंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को इस पहल का पूरा लाभ मिले।”
— पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन



