अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर 3 शतायु बुजुर्गों और 4 वरिष्ठ अचीवर्स का सम्मान, असीम अरुण ने किया सम्मानित
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर समाज कल्याण विभाग के समारोह में 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाले तीन वरिष्ठजनों को शतायु सम्मान और चार वरिष्ठ अचीवर्स को सम्मानित किया गया।

अनुभव की विरासत को सम्मान, शतायु बुजुर्गों का बढ़ा मान , अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर लखनऊ में विशेष समारोह, 3 शतायु और 4 वरिष्ठ अचीवर्स सम्मानित
लखनऊ, 1 अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर लखनऊ में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सामाजिक संरक्षण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग, हेल्पेज इंडिया और वरिष्ठ नागरिक महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए समारोह में 100 वर्ष की आयु पूरी कर चुके तीन वरिष्ठजनों को ‘शतायु सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही समाज में रचनात्मक योगदान देने वाले चार वरिष्ठ नागरिकों को ‘सीनियर अचीवर्स सम्मान’ प्रदान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के अनुभव, जीवन मूल्यों और समाज के प्रति उनके योगदान को रेखांकित करते हुए उनके सम्मान को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
तीन शतायु वरिष्ठजनों को मिला विशेष सम्मान
समारोह के मुख्य अतिथि समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लल्ली देवी, रानी कपूर और सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ को शतायु सम्मान प्रदान किया। वहीं समाज में अपने अनुभव और सक्रिय योगदान के माध्यम से उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे विनोद कुमार शुक्ल, ललित सिंह पोखरिया, इतिहासकार एवं लेखक डॉ. रवि भट्ट और डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य को सीनियर अचीवर्स सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना तथा समाज में उनके प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करना रहा।
वरिष्ठजनों के अनुभव को समाज की अमूल्य पूंजी बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असीम अरुण ने कहा कि वरिष्ठजन केवल उम्र के लिहाज से समाज का महत्वपूर्ण वर्ग नहीं हैं, बल्कि उनके पास वर्षों का अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों की ऐसी विरासत है, जिससे समाज लगातार सीख सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान केवल परिवार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक संरक्षण के लिए सरकार की ओर से विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है।
केयर इकोनॉमी को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने पर जोर
असीम अरुण ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल से जुड़े केयर इकोनॉमी के क्षेत्र को भी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की उपलब्धता बढ़ाना इस दिशा में महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम और राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना जैसी व्यवस्थाएं संचालित हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में भरण-पोषण अधिकरण गठित किए गए हैं।
वृद्धाश्रमों की सुविधाओं पर दिखाई गई डॉक्युमेंट्री
समारोह के दौरान समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्धाश्रमों में उपलब्ध सुविधाओं पर आधारित डॉक्युमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध देखभाल और सामाजिक संरक्षण की व्यवस्थाओं की जानकारी देना रहा। वहीं सीएमएस, आरडीएसओ शाखा के बच्चों ने ‘अपने मां-बाप का तू दिल न दुखा’ गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में युवाओं ने वरिष्ठजनों के सम्मान का संकल्प भी लिया, जिससे पीढ़ियों के बीच सम्मान और संवाद की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
सरकार का फोकस: सम्मान के साथ सामाजिक संरक्षण
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम वरिष्ठ नागरिकों के लिए केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा, पेंशन, सामाजिक संरक्षण और देखभाल जैसे विषयों को भी सामने लाया। समाज कल्याण विभाग की ओर से वरिष्ठजनों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और व्यवस्थाओं के साथ-साथ उनके सम्मान को सामाजिक सरोकार के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में निदेशक समाज कल्याण संजीव सिंह, हेल्पेज इंडिया के स्टेट हेड अनूप पंत, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, संयुक्त निदेशक आरपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी अनामिका सिंह समेत विभागीय अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।



