खेल

कामाख्या मंदिर पहुंचे यूपी के पत्रकार, PRASHAD योजना से धार्मिक पर्यटन को मिल रही नई रफ्तार

एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत असम दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने माँ कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए। PRASHAD योजना के तहत मंदिर और गुवाहाटी के तीर्थ पर्यटन विकास की जानकारी दी गई।

गुवाहाटी। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत असम के दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी स्थित प्रसिद्ध माँ कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में आयोजित इस मीडिया दौरे का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को करीब से समझना और देश के दूसरे हिस्सों तक उसकी जानकारी पहुंचाना है। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को कामाख्या मंदिर की धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ तीर्थ स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की PRASHAD योजना के बारे में भी जानकारी दी गई।

मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को माँ कामाख्या मंदिर के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और यहां होने वाले प्रमुख अनुष्ठानों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कामाख्या मंदिर केवल असम ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आस्था और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

PRASHAD योजना के तहत कामाख्या मंदिर के विकास को मिला बढ़ावा

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की PRASHAD (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive) योजना के तहत देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर बुनियादी पर्यटन सुविधाओं और तीर्थयात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य किए जा रहे हैं। योजना की शुरुआत 2014-15 में की गई थी और बाद में अक्टूबर 2017 में इसका नाम बदलकर “National Mission on Pilgrimage Rejuvenation, Spiritual and Heritage Augmentation Drive (PRASHAD)” किया गया।

कामाख्या मंदिर के लिए भी इस योजना के तहत विशेष परियोजना स्वीकृत की गई थी। पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक “Development of Kamakhya Temple and Pilgrimage Destination in and around Guwahati” परियोजना को वित्तीय वर्ष 2015-16 में ₹29.80 करोड़ की लागत से मंजूरी दी गई थी। मंत्रालय की दिसंबर 2025 की आधिकारिक सूची में इसे पूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

PRASHAD योजना का व्यापक उद्देश्य देश के प्रमुख तीर्थ और आध्यात्मिक स्थलों पर पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करना और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। ऐसे विकास कार्यों का असर केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आसपास के पर्यटन क्षेत्र, परिवहन, आतिथ्य, स्थानीय बाजार और अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

नीलाचल पहाड़ी पर आस्था का प्रमुख केंद्र है कामाख्या मंदिर

माँ कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है और असम की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। मंदिर देश के प्रमुख शक्ति उपासना केंद्रों में शामिल है और यहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। मंदिर की धार्मिक परंपराएं और यहां होने वाले अनुष्ठान इसे देश के महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थलों में अलग पहचान देते हैं।

मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने मीडिया प्रतिनिधियों को मंदिर की धार्मिक परंपराओं और इसके आध्यात्मिक महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कामाख्या मंदिर आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे मीडिया भ्रमण कार्यक्रमों के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों के लोग असम की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को और करीब से समझ सकते हैं।

धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति

कामाख्या मंदिर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही का प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। तीर्थ यात्रियों के आगमन से होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, भोजन और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इस तरह धार्मिक पर्यटन केवल आध्यात्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने का माध्यम भी बनता है।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को इसी संदर्भ में बताया गया कि तीर्थ स्थलों का योजनाबद्ध विकास श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार करने में भी मदद करता है। PRASHAD जैसी योजनाओं के जरिए धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थलों पर पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है।

यूपी के पत्रकारों ने समझी असम की आध्यात्मिक विरासत

कामाख्या मंदिर पहुंचने के दौरान उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और असम की आध्यात्मिक संस्कृति को समझने का प्रयास किया। पत्रकारों ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं, विरासत और विकास यात्रा से जोड़ना है।

उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल का असम दौरा इसी कड़ी में पूर्वोत्तर की विविधता को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। कामाख्या मंदिर के दर्शन के जरिए प्रतिनिधिमंडल ने असम की आध्यात्मिक पहचान को करीब से समझा, वहीं PRASHAD योजना के जरिए तीर्थ स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी भी प्राप्त की। इस तरह यह दौरा आस्था, पर्यटन, संस्कृति और विकास के बीच संबंध को समझने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button