कोकून से धागे तक, यूपी के पत्रकारों ने देखा एरी सिल्क मील
असम दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने बक्सा के मुषलपुर स्थित एरी सिल्क स्पिनिंग मील का दौरा किया। जानिए एरी सिल्क, मिल की क्षमता और स्थानीय रोजगार से जुड़ी पूरी जानकारी।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि एरी सिल्क असम और पूर्वोत्तर की पारंपरिक रेशम विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिल के जरिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एरी कोकून को आधुनिक मशीनरी की मदद से गुणवत्तापूर्ण रेशम के धागे में बदलने की व्यवस्था विकसित की गई है। इसका उद्देश्य केवल रेशम उत्पादन को आधुनिक स्वरूप देना नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों, रेशम उत्पादकों, बुनकरों और ग्रामीण परिवारों को बाजार से जोड़कर एरी सिल्क की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना भी है।
₹14.92 करोड़ की लागत से तैयार हुआ प्लांट
मुषलपुर के खारुआजान स्थित इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क में स्थापित इस एरी सिल्क स्पिनिंग मिल को ₹14.92 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। NEHHDC के अनुसार प्लांट का निर्मित क्षेत्र करीब 12,916 वर्ग फुट है और इसमें 960 रिंग-फ्रेम स्पिंडल लगाए गए हैं। मिल की उत्पादन क्षमता लगभग 450 किलोग्राम एरी सिल्क यार्न प्रतिदिन बताई गई है। प्लांट को 2 जनवरी 2025 को औपचारिक रूप से संचालन में लाया गया था।

इस परियोजना को पूर्वोत्तर क्षेत्र में एरी सिल्क के उत्पादन को औद्योगिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। NEHHDC के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकरों के लिए गुणवत्तापूर्ण एरी सिल्क यार्न की मांग को पूरा करना है। इसके लिए मिल में आधुनिक स्पिनिंग मशीनरी स्थापित की गई है, जिससे पारंपरिक एरी सिल्क उत्पादन को बड़े पैमाने पर व्यवस्थित उत्पादन प्रणाली से जोड़ा जा सके।
कोकून से धागे तक ऐसे तैयार होता है एरी सिल्क
मीडिया प्रतिनिधिमंडल को एरी सिल्क की उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। एरी सिल्क का आधार एरी कोकून होता है, जिसे आगे की प्रक्रिया के लिए मिल में लाया जाता है। इसके बाद कच्चे माल की गुणवत्ता के अनुसार उसे प्रसंस्करण और स्पिनिंग की विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। आधुनिक मशीनरी की मदद से रेशे को व्यवस्थित कर उसे स्पिन किया जाता है और अंततः एरी सिल्क यार्न तैयार होता है, जिसका इस्तेमाल आगे बुनाई और वस्त्र निर्माण में किया जाता है।

एरी सिल्क की खासियत यह भी है कि इसे आमतौर पर ‘अहिंसा सिल्क’ या ‘पीस सिल्क’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसकी पारंपरिक उत्पादन प्रक्रिया में रेशमकीट को मारने की आवश्यकता नहीं होती। इसकी बनावट और उपयोग की विशेषताओं के कारण एरी सिल्क का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कपड़ों और हस्तकरघा उत्पादों में किया जाता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ा बड़ा प्रोजेक्ट
एरी सिल्क स्पिनिंग मिल को केवल औद्योगिक इकाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका से जोड़ने वाली परियोजना के रूप में भी विकसित किया गया है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पूरी क्षमता से संचालन होने पर मिल से 375 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और करीब 50 हजार परिवारों को अप्रत्यक्ष आजीविका से लाभ मिलने की संभावना है। मिल के संचालन से एरी कोकून उत्पादकों, ग्रामीण परिवारों और बुनकरों के लिए बाजार का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
एरी सिल्क उत्पादन से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार पहले से जुड़े हुए हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्पिनिंग सुविधा विकसित होने से कच्चे कोकून को दूसरे स्थानों तक भेजने की जरूरत कम हो सकती है और उत्पादन श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा क्षेत्र के भीतर ही विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ने के साथ रेशम आधारित गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए आय के नए अवसर तैयार होने की संभावना है।
पारंपरिक रेशम को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश
NEHHDC का यह प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा अर्थव्यवस्था को आधुनिक उत्पादन और बाजार व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। एरी सिल्क लंबे समय से पूर्वोत्तर की संस्कृति और ग्रामीण जीवन का हिस्सा रहा है, लेकिन आधुनिक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्तापूर्ण यार्न की नियमित उपलब्धता, उत्पादन क्षमता और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए स्पिनिंग मिल जैसी सुविधाओं को विकसित किया गया है।
NEHHDC के मुताबिक इस संयंत्र का लक्ष्य स्थानीय रेशम उत्पादन को व्यापक बाजार से जोड़ना और कारीगरों तथा बुनकरों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। संस्था ने इसे पूर्वोत्तर की सिल्क इंडस्ट्री को मजबूत करने और क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में योगदान देने वाली पहल के रूप में रेखांकित किया है।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत पत्रकारों ने समझी असम की रेशम विरासत
उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के लिए एरी सिल्क स्पिनिंग मिल का दौरा केवल एक औद्योगिक इकाई को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए पत्रकारों ने असम की पारंपरिक रेशम संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक के बीच बन रहे संबंध को भी करीब से समझा। प्रतिनिधिमंडल ने मिल में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी, उत्पादन व्यवस्था और एरी सिल्क से जुड़ी आर्थिक संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत आयोजित यह मीडिया दौरा पूर्वोत्तर की उन विकास कहानियों को समझने का अवसर दे रहा है, जिनमें स्थानीय परंपरा और आधुनिक तकनीक एक साथ दिखाई देती हैं। एरी सिल्क स्पिनिंग मिल इसका एक उदाहरण है, जहां सदियों पुरानी रेशम परंपरा को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़कर रोजगार, ग्रामीण आजीविका और बाजार के नए अवसर पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।



