यूपीएसआईएफएस की ‘टीम 12’ एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा में बनाएगी पहचान
यूपीएसआईएफएस के 150 विद्यार्थियों ने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। इनमें से चुनी गई ‘टीम 12’ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी की तैयारी करेगी।

यूपीएसआईएफएस की ‘टीम 12’ एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा में तलाशेगी वैश्विक अवसर
लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव देने की दिशा में पहल की गई है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के 150 विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। इनमें से चयनित 12 विद्यार्थियों की टीम को अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी के लिए तैयार किया जा रहा है। विद्यार्थियों ने अपने प्रेजेंटेशन ब्राविटी (Braviti) के सीईओ पवन शर्मा और केआईपीएल (KIPL) के सीईओ पराग शेंडे के समक्ष प्रस्तुत किए। पवन शर्मा अमेरिका में एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक समस्याओं के समाधान और तकनीकी नवाचार से जोड़ना है।
150 विद्यार्थियों के प्रेजेंटेशन के बाद चुनी गई ‘टीम 12’
यूपीएसआईएफएस में आयोजित इस पहल के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी विषयों पर अपने विचार और समाधान प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में से 12 सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में ईशानी पांडे, ईशानी ओझा, सिद्धि वत्स, साक्षी गहलोत, पुष्कर सिंह, रवि यादव, विवेक मिश्रा, प्रखर सिंह, दिव्यम श्रीवास्तव, अनिमेष शुक्ला, अनुभव चतुर्वेदी और रविशंकर कुशवाहा शामिल हैं।
इस टीम की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी प्रस्तावित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक के व्यावहारिक उपयोग, वास्तविक समस्याओं के विश्लेषण और समाधान विकसित करने से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित परियोजनाओं के नाम, भागीदारी की समय-सीमा और विद्यार्थियों की प्रस्तावित भूमिकाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षा पर जोर
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने, नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने और उनके ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने पर जोर दिया।
एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। डिजिटल अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और जटिल तकनीकी प्रणालियों के विश्लेषण में इन तकनीकों की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में समाधान विकसित करने का अवसर देना उनकी तकनीकी समझ और समस्या-समाधान क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
टेक्नोलॉजी, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान का समन्वय
यूपीएसआईएफएस की शिक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया जाता है। आधुनिक अपराधों की जांच में डिजिटल साक्ष्यों, तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इन क्षेत्रों की संयुक्त समझ विद्यार्थियों को साइबर अपराध की जांच, डिजिटल फॉरेंसिक और तकनीकी अनुसंधान जैसे कार्यक्षेत्रों के लिए तैयार करने में उपयोगी हो सकती है।
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी विचारों को व्यावहारिक समाधान में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भविष्य में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं हैं।
अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़ने की तैयारी
‘टीम 12’ की प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय भागीदारी इस पहल का प्रमुख आकर्षण है। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में एआई, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में होने वाले तकनीकी विकास के संदर्भ में भारतीय विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हालांकि, इन देशों में किसी विशिष्ट परियोजना या संस्थान के साथ टीम की भागीदारी की पुष्टि उपलब्ध प्रेस नोट में नहीं की गई है।
इस परियोजना का नेतृत्व यूपीएसआईएफएस के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल की प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह कर रही हैं। संस्थान की इस पहल से विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने, विशेषज्ञों के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने और भविष्य के शोध एवं पेशेवर अवसरों के लिए तैयारी करने का मंच मिल रहा है।



