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अखिलेश यादव पर अनिल राजभर-दानिश आजाद का पलटवार, आपातकाल से एक्सप्रेसवे और पत्रकार सुरक्षा तक साधा निशाना

अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों और पत्रकारों के सम्मान संबंधी बयानों पर मंत्री अनिल राजभर और दानिश आजाद अंसारी ने पलटवार किया। दोनों ने कांग्रेस से सपा की नजदीकी, एक्सप्रेसवे और पत्रकार सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।

आपातकाल से एक्सप्रेसवे और पत्रकारों के सम्मान तक, अखिलेश यादव पर अनिल राजभर-दानिश आजाद का तीखा पलटवार

लखनऊ । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, पत्रकारों की सुरक्षा और उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे से जुड़े बयानों पर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर और दानिश आजाद अंसारी ने पलटवार किया है। दोनों मंत्रियों ने कांग्रेस के साथ सपा की राजनीतिक नजदीकी को लेकर सवाल उठाते हुए आपातकाल का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में एक्सप्रेसवे और पत्रकारों से जुड़े मामलों को लेकर भी आरोप लगाए।

अखिलेश यादव ने 1 अक्टूबर को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सपा सरकार बनने पर बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट देने की बात कही थी। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के लिए भी सम्मान राशि और अन्य सुविधाओं का वादा किया।

अनिल राजभर बोले- आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस के साथ सपा क्यों?

मंत्री अनिल राजभर ने कांग्रेस के साथ सपा की राजनीतिक नजदीकी को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का अपमान किया था। ऐसे में अगर सपा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की बात करती है तो उसे कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक संबंधों पर भी जवाब देना चाहिए।

अनिल राजभर ने सपा के इस रुख को लेकर ‘दोहरा चरित्र’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि एक तरफ सपा लोकतंत्र और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ वह उसी कांग्रेस के साथ राजनीतिक रूप से खड़ी है जिस पर आपातकाल लगाने की जिम्मेदारी रही है। ये बातें अनिल राजभर ने राजनीतिक पलटवार के तौर पर कहीं।

एक्सप्रेसवे को लेकर भी अखिलेश पर लगाए आरोप

अनिल राजभर ने एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में आम लोगों के हित के बजाय राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे को ‘लूट का जरिया’ बनाया गया और सैफई परिवार को इससे फायदा पहुंचा।

इसके विपरीत अनिल राजभर ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार का दावा किया और प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बताया। देश के कुल एक्सप्रेसवे में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत होने का दावा भी उन्होंने किया। यह आंकड़ा उनके बयान का हिस्सा है।

दानिश आजाद बोले- लोकतंत्र की बात पर जनता हंसेगी

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी अखिलेश यादव के लोकतंत्र संबंधी बयानों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सपा जब लोकतंत्र की बात करती है तो जनता इस पर सवाल उठाएगी। दानिश ने भी आपातकाल का संदर्भ देते हुए कहा कि जिस कांग्रेस पर आपातकाल लगाने का आरोप है, उसी के साथ समाजवादी पार्टी की राजनीतिक नजदीकी है।

दानिश आजाद ने आरोप लगाया कि सत्ता में वापसी की कोशिश के बीच सपा को अब लोकतंत्र सेनानियों की याद आ रही है। उनके ये बयान अखिलेश यादव के उसी दिन के लोकतंत्र सेनानियों से जुड़े ऐलान के जवाब में आए, जिसमें अखिलेश ने सरकार बनने पर लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार रुपये मासिक सम्मान राशि और मुफ्त इलाज देने की बात कही थी।

गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का किया जिक्र

एक्सप्रेसवे को लेकर दानिश आजाद ने गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश के सड़क और परिवहन ढांचे को विस्तार मिला है।

उन्होंने सपा सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे के रूट तय करने को लेकर भी आरोप लगाया। दानिश के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में परियोजना का रूट तय होने से पहले ही जमीन खरीदने की कोशिश की गई और इसका फायदा राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को पहुंचाने का प्रयास हुआ। ये आरोप मंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर लगाए हैं।

पत्रकार सुरक्षा के मुद्दे पर भी आमने-सामने आए दोनों पक्ष

अखिलेश यादव ने 1 अक्टूबर को पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कहा कि सपा सरकार बनने पर पत्रकारों को बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट दिए जाएंगे। उन्होंने पत्रकारों को लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वर्ग बताया।

इसके जवाब में दानिश आजाद ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के मामले का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पत्रकार की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

जगेंद्र सिंह की मौत का मामला 2015 में व्यापक रूप से सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें शाहजहांपुर में आग से गंभीर रूप से झुलसने के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां 8 जून 2015 को उनकी मौत हुई। मामले में तत्कालीन मंत्री राम मूर्ति सिंह वर्मा समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि, घटना की परिस्थितियों को लेकर उस समय अलग-अलग दावे सामने आए थे; पुलिस/फॉरेंसिक रिपोर्ट ने आत्मदाह की संभावना बताई थी, जबकि जगेंद्र सिंह के परिवार और उनके बयान में हत्या का आरोप लगाया गया था।

इसलिए दानिश आजाद द्वारा इसे ‘पत्रकार को जिंदा जलाने’ के रूप में पेश करना उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है; घटना की परिस्थितियों को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

अखिलेश के पत्रकारों से व्यवहार पर भी दानिश का आरोप

दानिश आजाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की प्रेस वार्ताओं में पत्रकारों से उनकी पहचान और जाति को लेकर सवाल किए जाते हैं तथा उन्हें अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे रवैये के बीच पत्रकार सम्मान की बात करना विरोधाभासी है। दानिश ने सपा पर ‘नकारात्मक एजेंडे’ के साथ राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

वहीं, अखिलेश यादव की ओर से 1 अक्टूबर को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट देने का प्रस्ताव सामने आया है। इससे पहले भी अखिलेश यादव पत्रकारों और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी यूपी में चुनावी सरगर्मी

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। 1 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने लोकतंत्र सेनानियों, पत्रकार सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर अपने प्रस्ताव रखे, जबकि सरकार के मंत्रियों ने इन बयानों के जवाब में सपा के पिछले शासन और कांग्रेस के साथ उसके मौजूदा राजनीतिक संबंधों को निशाना बनाया। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दावे और राजनीतिक आरोप अलग-अलग हैं, जिन्हें संबंधित नेताओं के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

सरकार का फोकस: सत्ता पक्ष के इन बयानों में मुख्य रूप से मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सड़क एवं एक्सप्रेसवे नेटवर्क, पत्रकार सुरक्षा से जुड़े राजनीतिक विमर्श और पिछली सपा सरकार के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाना शामिल रहा। दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने पत्रकारों की सुरक्षा और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान को लेकर अपनी पार्टी की ओर से प्रस्ताव रखे हैं।

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