दिव्यांगजन की पेंशन फिर बढ़ाएगी योगी सरकार, 18 मंडलों में बनेंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि जल्द बढ़ाने का ऐलान किया। 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित होंगे और 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए।

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में दिव्यांगजन सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रम में पेंशन की धनराशि में जल्द ही एक बार फिर बढ़ोतरी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन को पहले ₹300 की पेंशन मिलती थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर पहले ₹500 और फिर ₹1,000 किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर वृद्धि की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दिव्यांगजन को केवल सहायता तक सीमित न रखते हुए उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, स्मार्टकेन, ब्रेल किट, हियरिंग एड, स्मार्टफोन और कृत्रिम अंग समेत विभिन्न उपकरण शामिल रहे। कार्यक्रम के उपकरणों की संख्या और लाभार्थियों का विवरण स्वतंत्र रिपोर्टिंग में भी दर्ज है।
जल्द फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेंशन की धनराशि में जल्द ही फिर बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले दिव्यांगजन को ₹300 मासिक पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹500 और उसके बाद ₹1,000 किया। अब इसमें एक बार फिर वृद्धि किए जाने की तैयारी है। सितंबर में भी मुख्यमंत्री की ओर से पेंशन की राशि और दायरा बढ़ाने की घोषणा की रिपोर्टिंग हुई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहारा देने के साथ उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है। दिव्यांगजन के लिए पेंशन के साथ-साथ सहायक उपकरण, शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
सभी 18 मंडलों में स्थापित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र शुरू हो चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगजन को पुनर्वास, मार्गदर्शन और आवश्यक सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है।
योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में संचालित दिव्यांगजन से संबंधित विभिन्न संस्थानों का भी उल्लेख किया। इनमें स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित किए जा रहे हैं।
हर विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर छूटे दिव्यांगजनों को जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर आयोजित कर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता के माध्यम से बच्चों को समय रहते आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में तीन से सात वर्ष की आयु के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों को मुख्यमंत्री युवा, प्रधानमंत्री स्वनिधि, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), प्रधानमंत्री विश्वकर्मा, प्रधानमंत्री मुद्रा और स्टैंड-अप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट के लिए छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है।
509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरणों का वितरण
गोरखपुर क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 509 दिव्यांगजनों को करीब सवा करोड़ रुपये मूल्य के 664 सहायक उपकरण वितरित किए। लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता और दिव्यांगता के अनुरूप अलग-अलग उपकरण उपलब्ध कराए गए।
वितरण में 127 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 25 को ई-ट्राइसाइकिल और 70 को ट्राइसाइकिल दी गईं। वहीं 155 दिव्यांगजनों को कुल 319 स्मार्टकेन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड और पांच को स्मार्टफोन दिए गए। इसके अलावा एक लाभार्थी को ब्रेल लिपि में गीता और एक को ब्रेल लिपि में रामचरितमानस उपलब्ध कराई गई। दस दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ और पांच दिव्यांग विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें प्रदान की गईं। यह वितरण विवरण उपलब्ध रिपोर्टिंग से भी मेल खाता है।
मुख्यमंत्री बोले- प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की जरूरत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शारीरिक चुनौती किसी व्यक्ति की प्रतिभा की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकती। उनके अनुसार दिव्यांगजनों को दया की नहीं, बल्कि अवसर, सही साधन और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार और प्रीति पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उपलब्धियां मजबूत हौसले से हासिल की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन में भी प्रतिभा और क्षमता है तथा उन्हें उचित अवसर और संसाधन मिलने पर वे समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सरकार का प्रयास ऐसे अवसरों को बढ़ाना है।
‘दिव्यांग’ शब्द के जरिए बदलने का प्रयास किया गया दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज में दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण बदलने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इसी सोच के अनुरूप ब्रेल और ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को दिव्यांगजन सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। इनमें लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय शामिल हैं।
नरेंद्र कश्यप ने बजट बढ़ने का किया दावा
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े नौ वर्षों में दिव्यांगजन के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का बजट ₹2,200 करोड़ हो गया है, जबकि उनके अनुसार पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के समय यह ₹665 करोड़ था। ये आंकड़े मंत्री द्वारा कार्यक्रम में दिए गए राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।
नरेंद्र कश्यप ने यह भी कहा कि दिव्यांगजन की भरण-पोषण पेंशन को ₹300 से बढ़ाकर ₹1,000 किया गया है। उन्होंने दिव्यांग बच्चियों की यात्रा सुगम बनाने के लिए ई-स्कूटी के लिए ₹60 करोड़ दिए जाने और प्रदेश में 55 बचपन डे केयर सेंटर संचालित होने की जानकारी दी। उनके अनुसार 28 और बचपन डे केयर सेंटर खोले जाने हैं।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री एवं जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल और सरवन निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह समेत संबंधित अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का स्वागत संबोधन भाजपा महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता ने किया। मुख्यमंत्री की ओर से पेंशन बढ़ाने की घोषणा और सभी 18 मंडलों में पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश के साथ कार्यक्रम में सहायक उपकरण वितरण को दिव्यांगजन को शिक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और सामाजिक भागीदारी के अवसरों से जोड़ने की व्यापक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।



