वाराणसी के 11,219 परिवारों को ₹191 करोड़ से अधिक की मदद, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष बना संकट में सहारा
वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 11,219 लाभार्थियों को ₹191.11 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। गंभीर बीमारी और दुर्घटना में जरूरतमंद परिवारों को मदद मिली।

मुश्किल घड़ी में ‘अभिभावक’ बनी योगी सरकार, वाराणसी के 11,219 परिवारों को ₹191 करोड़ से अधिक की मदद
वाराणसी। गंभीर बीमारी या अचानक आई दुर्घटना किसी भी परिवार की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। इलाज का खर्च बढ़ने के साथ जमा-पूंजी खत्म होने, कर्ज लेने और कई बार संपत्ति बेचने जैसी परिस्थितियां भी सामने आ जाती हैं। ऐसे कठिन समय में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से पात्र और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक 11,219 लाभार्थियों को कुल ₹1,91,11,58,416, यानी करीब ₹191.11 करोड़, की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
यह सहायता विशेष रूप से गंभीर बीमारियों के उपचार और आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, हृदय और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ-साथ आकस्मिक दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में भी पात्र लोगों को इस व्यवस्था के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जिला प्रशासन के अनुसार इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है, ताकि उपचार और जरूरी सहायता में केवल पैसों की कमी बाधा न बने।
गंभीर बीमारी और दुर्घटना में आर्थिक सहायता का सहारा
गंभीर बीमारी के उपचार में जांच, दवाइयों, अस्पताल में भर्ती, ऑपरेशन और लंबे समय तक चलने वाले उपचार का खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता पर भारी पड़ सकता है। खासतौर पर उन परिवारों के लिए स्थिति और कठिन हो जाती है, जिनकी आय किसी एक सदस्य पर निर्भर होती है। ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से पात्र जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
वाराणसी के अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) विनय कुमार सिंह ने बताया कि मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से जिले के 11,219 लाभार्थियों को ₹1,91,11,58,416 की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। उनके अनुसार गंभीर बीमारी और आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह सहायता ऐसे समय में परिवारों के लिए आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करती है, जब उपचार का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, हृदय और किडनी रोग के मरीजों को मदद
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए पात्र लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा आकस्मिक दुर्घटनाओं अथवा अन्य गंभीर परिस्थितियों में भी जरूरतमंद परिवार सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गंभीर बीमारी का असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। कई मामलों में परिवार की आय उपचार पर खर्च होने लगती है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे में सरकारी सहायता से उपचार की प्रक्रिया को जारी रखने में मदद मिल सकती है।
प्रशासन का जोर समयबद्ध और पारदर्शी सहायता पर
जिला प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पात्र लाभार्थियों को सरकारी सहायता समय पर उपलब्ध हो। इसके लिए आवेदन से लेकर सत्यापन, संस्तुति और स्वीकृति की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि पात्र जरूरतमंदों को सरकार की इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए, जिससे संकट की घड़ी में उन्हें आवश्यक राहत मिल सके।
प्रशासन के अनुसार गंभीर बीमारी या आकस्मिक परिस्थिति में आर्थिक सहायता का समय पर मिलना परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए पात्र मामलों में सहायता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जैतपुरा के बुनकर परिवार को मिला इलाज के लिए सहारा
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता पाने वाले परिवारों में वाराणसी के जैतपुरा का एक बुनकर परिवार भी शामिल है। परिवार के एक सदस्य के अनुसार उनके 54 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और उपचार के लिए तत्काल आर्थिक मदद की आवश्यकता थी। परिवार ने सरकारी सहायता के लिए आवेदन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता मिली। परिवार के अनुसार इस सहायता से पिता का इलाज कराया जा सका और उनकी जान बच सकी।
परिवार के सदस्य ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस तरह की मदद बड़े सहारे के रूप में काम करती है। बीमारी के समय इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए मुश्किल था, लेकिन सरकारी सहायता मिलने से उपचार जारी रखना संभव हुआ।
ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित शिल्पी का सफल ऑपरेशन
पिंडरा तहसील के पुआरी कला गांव निवासी ऑटो चालक अरविंद कुमार की पत्नी शिल्पी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। उनके उपचार और ऑपरेशन का खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर था। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिली आर्थिक सहायता परिवार के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।
परिवार के अनुसार सहायता मिलने के बाद शिल्पी का ऑपरेशन सफलतापूर्वक कराया गया और अब उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। अरविंद कुमार ने बताया कि सरकारी मदद मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली और उपचार कराना संभव हो सका।
कैंसर से जूझ रही महिला के इलाज में बनी मददगार
भोजूबीर निवासी एक किसान की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं। परिवार ने शुरुआत में इलाज का खर्च उधार लेकर उठाया, लेकिन बीमारी का उपचार लंबा चलने के कारण आर्थिक दबाव बढ़ता गया। बाद में परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के बारे में जानकारी मिली और उपचार के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।
47 वर्षीय मरीज के पति के अनुसार यदि यह सहायता नहीं मिलती तो इलाज जारी रखना मुश्किल हो जाता। उनके लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष संकट के समय आर्थिक सहारे के रूप में सामने आया और उपचार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
वाराणसी में मई 2017 से सितंबर 2026 तक स्वीकृत ₹191.11 करोड़ से अधिक की सहायता के आंकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि गंभीर बीमारी और आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सहायता की जरूरत बड़ी संख्या में परिवारों को पड़ती है। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से पात्र जरूरतमंदों को उपचार और संकट की परिस्थितियों में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था जारी है।



