Kushinagar News : कुशीनगर में बाढ़ राहत अभियान तेज, 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय, 13 हजार से ज्यादा लंच पैकेट बांटे
कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद राहत और बचाव अभियान तेज है। 16 राहत शिविर, 10 बाढ़ चौकियां और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं।
कुशीनगर में बाढ़ राहत अभियान तेज, 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय; 13 हजार से अधिक लंच पैकेट बांटे
लखनऊ/कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बड़ी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था और खड्डा तथा तमकुहीराज तहसीलों के कुल 32 गांव प्रभावित बताए गए हैं।
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार 29 सितंबर की सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का बिंदु 96 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर था। वाल्मीकि नगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ राहत एवं बचाव गतिविधियों को सक्रिय रखा गया है।
16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय
बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय की हैं। इन शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ उनकी भोजन और अन्य जरूरी जरूरतों की निगरानी की जा रही है। प्रभावित गांवों में स्थिति के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई भी जारी है। इससे पहले भी जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आपात व्यवस्था को लेकर टीमें सक्रिय की गई थीं।
प्रशासन का फोकस इस समय प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री जल्द से जल्द पहुंचाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव सुनिश्चित करने पर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के साथ पीएसी की टीमें तैनात
बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी बाढ़ राहत दलों की टीमें तैनात की गई हैं। स्थानीय स्तर पर नावों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि पानी से प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। राहत एवं बचाव कार्य में स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम भी सक्रिय है।
कुशीनगर में हालात बिगड़ने के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजे जाने की पुष्टि पूर्व की रिपोर्टिंग में भी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 सितंबर को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया था और अधिकारियों को प्रभावित परिवारों तक शीघ्र सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
16 सामुदायिक रसोई से प्रभावित परिवारों को भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 16 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनमें खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में तीन सामुदायिक रसोई स्थापित की गई हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर रह रहे लोगों को भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े।
इसके अतिरिक्त प्रशासन की ओर से अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। राहत सामग्री के वितरण और उपलब्धता की निगरानी लगातार की जा रही है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री के कुशीनगर दौरे के दौरान भी प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और लंच पैकेट वितरित किए गए थे। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए 5,000 राहत किट की व्यवस्था की जानकारी भी दी गई थी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी सक्रिय
बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दो मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति समेत संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव अभियान में सक्रिय रखा गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग पहले से ही आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य सामग्री की व्यवस्था पर काम कर रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ चौकियों पर चिकित्सकीय टीमों के साथ ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां, ब्लीचिंग पाउडर और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सर्पदंश और कुत्ते के काटने की स्थिति में तत्काल उपचार के लिए आवश्यक टीकों की उपलब्धता पर भी जोर दिया गया है।
स्थिति पर लगातार नजर, जरूरत के अनुसार बढ़ाई जाएगी राहत व्यवस्था
कुशीनगर में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों और राहत शिविरों की लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और राशन उपलब्ध कराने तथा चिकित्सा सहायता देने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर है। बड़ी गंडक और नारायणी नदी के बढ़े जलस्तर के बीच प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बनाए रखने की चुनौती है।
इससे पहले 29 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत सामग्री वितरित की और अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने बाढ़ के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय रखने, राहत शिविरों में भोजन उपलब्ध कराने और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सहायता पहुंचाने पर भी जोर दिया था।



