बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब? किसान तुरंत करें ये काम, बीमा है तो ऐसे करें क्लेम
बारिश या ओलावृष्टि से फसल खराब होने पर किसान क्या करें? जानिए बीमा कराने वाले और बिना बीमा वाले किसानों के लिए नुकसान दर्ज कराने, सर्वे और राहत की पूरी प्रक्रिया।

बारिश या ओलावृष्टि से फसल खराब हो गई? किसान तुरंत करें ये काम, बीमा है तो अलग और नहीं है तो अलग प्रक्रिया
तेज बारिश, ओलावृष्टि या दूसरी प्राकृतिक आपदा से खेत में खड़ी फसल खराब हो जाए तो किसान को परेशान होकर घर बैठने के बजाय समय पर नुकसान की सूचना और रिकॉर्ड तैयार करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, उनके लिए प्रक्रिया अलग है, जबकि बिना बीमा वाले किसानों को सरकारी स्तर पर नुकसान दर्ज कराने और सर्वे की प्रक्रिया पर ध्यान देना होता है।
वीडियो देखें – https://youtu.be/UgeuEhbvjzw?si=JtHPzc2JPuwxE4GV
अगर फसल का बीमा कराया है तो क्या करें?
अगर किसान ने अपनी फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के तहत बीमा कराया हुआ है और उसकी फसल को योजना में शामिल किसी जोखिम से नुकसान हुआ है, तो उसे नुकसान की सूचना जल्द से जल्द देनी चाहिए। PMFBY में ओलावृष्टि जैसी स्थानीय आपदाओं को कवर किए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा निर्धारित पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान के लिए भी योजना में प्रावधान मौजूद है।
स्थानीय आपदा और निर्धारित पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान के मामलों में किसान को 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देने का प्रावधान है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार सूचना संबंधित बैंक शाखा/वित्तीय संस्था, चैनल पार्टनर या बीमा कंपनी को दी जा सकती है। इसके बाद प्रभावित खेत में नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे की प्रक्रिया होती है।
PMFBY की आधिकारिक वेबसाइट पर कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन (KRPH) 14447 उपलब्ध है। यहां किसान फसल नुकसान की सूचना और शिकायत से संबंधित सहायता ले सकते हैं। आधिकारिक पोर्टल पर पॉलिसी स्टेटस और अन्य किसान सेवाओं की सुविधा भी उपलब्ध है।
नुकसान होने के बाद किसान को अपने खेत की साफ फोटो और वीडियो भी सुरक्षित रखनी चाहिए। तस्वीरों में फसल और नुकसान की स्थिति स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। हालांकि केवल फोटो या वीडियो के आधार पर बीमा राशि तय नहीं होती। नुकसान का आकलन और संबंधित सर्वे प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। PMFBY के तहत स्थानीय आपदा के नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे की व्यवस्था है।
अगर फसल का बीमा नहीं कराया है तो क्या करें?
अब बात उन किसानों की, जिन्होंने अपनी फसल का बीमा नहीं कराया है। ऐसे किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम नहीं कर सकते, क्योंकि यह योजना बीमित फसल और लागू शर्तों के अनुसार नुकसान की भरपाई से जुड़ी है।
लेकिन बीमा नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि किसान फसल नुकसान होने के बाद कुछ न करे। अगर फसल को ओलावृष्टि या किसी अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुआ है, तो किसान को अपने क्षेत्र में फसल नुकसान की सूचना संबंधित लेखपाल, राजस्व विभाग, कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को देनी चाहिए और यह जानकारी लेनी चाहिए कि नुकसान का सरकारी सर्वे कब और कैसे किया जा रहा है।
सरकारी आपदा राहत के नियमों में ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए सहायता के प्रावधान हैं। SDRF के मौजूदा मानकों में फसल नुकसान की स्थिति में 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर कृषि इनपुट सब्सिडी का प्रावधान दिया गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर किसान को नुकसान होते ही एक निश्चित राशि स्वतः मिल जाएगी। सहायता लागू नियमों, नुकसान के आकलन, क्षेत्र और अन्य पात्रता शर्तों के अनुसार निर्धारित होती है।
इसलिए बिना बीमा वाले किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपने फसल नुकसान को सरकारी रिकॉर्ड और सर्वे में दर्ज कराने की प्रक्रिया को नजरअंदाज न करे। नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखें तथा अधिकारियों को दी गई सूचना, आवेदन, रसीद या शिकायत संख्या जैसे रिकॉर्ड भी संभालकर रखें।
बीमा वाले और बिना बीमा वाले किसान में क्या अंतर है?
दोनों किसानों के खेत में नुकसान एक जैसा हो सकता है, लेकिन आगे की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
बीमा कराया हुआ है, तो किसान को PMFBY की लागू प्रक्रिया के तहत नुकसान की सूचना देनी होगी। निर्धारित स्थानीय आपदा या पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान के मामलों में 72 घंटे की समय-सीमा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। 14447 हेल्पलाइन के अलावा संबंधित बीमा कंपनी या बैंक के माध्यम से भी जानकारी ली जा सकती है।
बीमा नहीं कराया है, तो PMFBY का बीमा दावा लागू नहीं होगा। ऐसे किसान को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की जानकारी स्थानीय प्रशासन, राजस्व या कृषि विभाग को देकर सरकारी सर्वे और लागू राहत प्रावधानों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
किसान फसल खराब होने के बाद ये काम जरूर करें
फसल खराब होने के बाद किसान कुछ आसान कदम तुरंत उठा सकता है। सबसे पहले खेत में हुए नुकसान की फोटो और वीडियो बना लें। इसके बाद अगर फसल का बीमा कराया है तो योजना के तहत लागू प्रक्रिया के अनुसार नुकसान की सूचना जल्द दें और निर्धारित मामलों में 72 घंटे की समय-सीमा का ध्यान रखें। PMFBY से संबंधित सहायता के लिए 14447 पर संपर्क किया जा सकता है।
अगर फसल का बीमा नहीं कराया है, तो अपने क्षेत्र के लेखपाल, राजस्व या कृषि विभाग से संपर्क कर नुकसान दर्ज कराने और सरकारी सर्वे की जानकारी लें। साथ ही नुकसान से संबंधित सभी दस्तावेज, आवेदन की रसीद और शिकायत या सूचना का नंबर संभालकर रखें।
33 प्रतिशत फसल नुकसान पर क्या मिलता है?
फसल नुकसान के मामले में 33 प्रतिशत का आंकड़ा अक्सर चर्चा में रहता है। मौजूदा SDRF मानकों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान की स्थिति में कृषि इनपुट सब्सिडी का प्रावधान है। वर्तमान मानकों में कृषि और बागवानी फसलों के लिए सहायता की दर और क्षेत्र संबंधी सीमाएं भी निर्धारित हैं। उदाहरण के लिए मौजूदा मानकों में वर्षा-आधारित क्षेत्र के लिए ₹6,800 प्रति हेक्टेयर की दर और अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की सीमा का उल्लेख है, लेकिन सहायता लागू शर्तों और पात्रता के अधीन है।
इसलिए किसान को केवल “33 प्रतिशत नुकसान” सुनकर निश्चित मुआवजे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। वास्तविक सहायता के लिए सरकारी सर्वे, नुकसान का आकलन और लागू नियम महत्वपूर्ण होंगे।
निष्कर्ष
बारिश या ओलावृष्टि से फसल खराब होने के बाद किसान के लिए सबसे जरूरी है कि वह नुकसान को समय पर दर्ज कराए और अपनी स्थिति के अनुसार सही प्रक्रिया अपनाए। बीमा कराया है तो PMFBY के तहत लागू नुकसान की सूचना समय पर दें और निर्धारित मामलों में 72 घंटे की समय-सीमा का ध्यान रखें। वहीं बीमा नहीं कराया है तो स्थानीय प्रशासन, राजस्व या कृषि विभाग के माध्यम से नुकसान दर्ज कराने और सरकारी सर्वे की प्रक्रिया को समझें।
खेत के नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखना, सूचना या आवेदन की रसीद संभालकर रखना और सर्वे की प्रक्रिया में सहयोग करना दोनों परिस्थितियों में उपयोगी है। सरकारी राहत या बीमा का लाभ लागू नियमों और नुकसान के आकलन के आधार पर ही निर्धारित होगा।



