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यूपीआईटीएस-2026 में वाराणसी के युवा का कमाल, AI आधारित ‘पेनटेस्टरेडार’ से साइबर सुरक्षा जांच में नया प्रयोग

यूपीआईटीएस-2026 में वाराणसी के युवा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मृत्युंजय सिंह का AI आधारित पेनटेस्टरेडार चर्चा में है। स्टार्टअप वेबसाइट और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा कमजोरियां पहचानने के लिए स्वचालित पेनिट्रेशन टेस्टिंग प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है।

 

यूपीआईटीएस-2026 में वाराणसी के युवा का कमाल, AI आधारित ‘पेनटेस्टरेडार’ बदल रहा साइबर सुरक्षा जांच का तरीका

ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार पारंपरिक उत्पादों और उद्योगों के साथ प्रदेश की युवा तकनीकी प्रतिभा भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस वैश्विक व्यापार मंच पर वाराणसी से आया साइबर सुरक्षा स्टार्टअप ‘पेनटेस्टरेडार’ डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में विकसित किए जा रहे अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान को प्रदर्शित कर रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एथिकल हैकर मृत्युंजय सिंह द्वारा विकसित किए जा रहे इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य वेबसाइट, एप्लीकेशन और अन्य डिजिटल प्रणालियों में संभावित सुरक्षा कमजोरियों की पहचान को अधिक स्वचालित और तेज बनाना है। स्टार्टअप के अनुसार, प्लेटफॉर्म कमजोरियों की पहचान करने के साथ उनकी गंभीरता को समझने और उन्हें दूर करने में तकनीकी टीमों की मदद करने वाली रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम करता है।

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा भी पहुंचे स्टार्टअप के स्टॉल पर

यूपीआईटीएस-2026 में पेनटेस्टरेडार को उस समय भी ध्यान मिला जब पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने स्टार्टअप के स्टॉल का दौरा किया। स्टार्टअप से जुड़े एक सार्वजनिक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, उन्होंने टीम से बातचीत की और पेनटेस्टरेडार के AI आधारित साइबर सुरक्षा समाधान के बारे में जानकारी ली।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपीआईटीएस जैसे बड़े व्यापार मंच पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से आने वाले स्टार्टअप को अपने तकनीकी उत्पाद उद्योग जगत, निवेशकों और संभावित ग्राहकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। वाराणसी से विकसित हो रहा पेनटेस्टरेडार इसी तरह के स्थानीय तकनीकी नवाचार को बड़े कारोबारी मंच तक पहुंचाने का उदाहरण बनकर सामने आया है।

एथिकल हैकिंग से साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म बनाने तक का सफर

मृत्युंजय सिंह की उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका काम साइबर सुरक्षा रिसर्च, एथिकल हैकिंग और डिजिटल कमजोरियों की पहचान से जुड़ा रहा है। उनकी प्रोफाइल में MeitY, Meta, Microsoft, NASA और Apple से जुड़े प्लेटफॉर्मों पर vulnerability reporting और security research का उल्लेख किया गया है।

साइबर सुरक्षा में काम करने के दौरान डिजिटल प्रणालियों में मौजूद कमजोरियों की पहचान का अनुभव आगे चलकर अपने उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी उपयोगी रहा। इसी क्रम में पेनटेस्टरेडार जैसे समाधान पर काम किया जा रहा है, जिसका फोकस संगठनों और कारोबारों को उनकी डिजिटल सुरक्षा स्थिति को समझने तथा संभावित कमजोरियों की पहचान करने में सहायता देना है।

साइबर ठगी के पीड़ितों की मदद से जमीनी अनुभव

मृत्युंजय सिंह का साइबर सुरक्षा से जुड़ा काम केवल तकनीकी परीक्षण तक सीमित नहीं रहा। उनके द्वारा साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा जागरूकता से जुड़ी पहलों पर भी काम किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। साइबर ठगी से प्रभावित लोगों के संपर्क में आने के अनुभव ने डिजिटल सुरक्षा की जमीनी चुनौतियों को समझने में मदद की।

यही अनुभव इस बात को समझने में उपयोगी रहा कि साइबर सुरक्षा केवल बड़ी कंपनियों या बड़े संस्थानों का विषय नहीं है। छोटे कारोबारी, स्टार्टअप और सामान्य डिजिटल उपयोगकर्ता भी वेबसाइट, एप्लीकेशन, डेटा और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

360FlashDrive से हार्डवेयर सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रयोग

मृत्युंजय सिंह की प्रोफाइल में 360FlashDrive नाम के सुरक्षित डेटा स्टोरेज उत्पाद से जुड़े डिजाइन नवाचार का भी उल्लेख है। उनके अनुसार इस उत्पाद के डिजाइन को भारतीय डिजाइन पेटेंट और ब्रिटेन में डिजाइन अप्रूवल मिला है। साथ ही सुरक्षित स्टोरेज और embedded security mechanisms से संबंधित utility patent application की जानकारी भी दी गई है।

इस तरह उनके तकनीकी प्रयोग केवल सॉफ्टवेयर आधारित साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि सुरक्षित डेटा स्टोरेज और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े हार्डवेयर समाधानों तक भी फैले हुए हैं।

MSME Idea Hackathon 4.0 से मिला प्रोटोटाइप विकास का अवसर

मृत्युंजय सिंह की उपलब्ध प्रोफाइल में MSME Idea Hackathon 4.0 के विजेता के रूप में चयन और करीब ₹15 लाख के सरकारी समर्थित इनोवेशन ग्रांट का उल्लेख है। MSME मंत्रालय के अनुसार Hackathon 4.0 का उद्देश्य युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स में आइडिया इनक्यूबेशन तथा इनोवेशन को बढ़ावा देना था और स्वीकृत आइडिया के लिए अधिकतम ₹15 लाख तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया था।

यह सहायता किसी विचार को केवल कॉन्सेप्ट के स्तर से आगे ले जाकर प्रोटोटाइप और उत्पाद विकास की दिशा में काम करने का अवसर देती है। पेनटेस्टरेडार जैसे तकनीकी समाधान के विकास में इस तरह के इनक्यूबेशन और नवाचार समर्थन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

क्या है पेनटेस्टरेडार और कैसे काम करता है?

पेनटेस्टरेडार को एक AI आधारित automated penetration testing और security assessment platform के रूप में विकसित किया जा रहा है। सामान्य भाषा में समझें तो penetration testing में किसी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को एथिकल हैकर की तरह जांचने की कोशिश की जाती है, ताकि संभावित कमजोरियों को वास्तविक साइबर हमले से पहले पहचाना जा सके।

स्टार्टअप के अनुसार, पेनटेस्टरेडार इस प्रक्रिया के कई हिस्सों को स्वचालित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य संभावित vulnerabilities की पहचान करने, उनकी गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता तय करने और तकनीकी टीम के लिए रिपोर्ट तैयार करने में मदद करना है। स्टार्टअप की ओर से 50 से अधिक प्रकार की सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने की क्षमता का दावा किया गया है। हालांकि, ऐसे दावों का वास्तविक आकलन करते समय स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण, false positives/false negatives और विशेषज्ञ सत्यापन जैसे तकनीकी मानकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

10-15 दिन की प्रक्रिया को करीब 15 मिनट तक लाने का दावा

पेनटेस्टरेडार से जुड़ी सबसे चर्चित बात इसकी बताई जा रही गति है। मृत्युंजय सिंह के अनुसार, जिन सुरक्षा जांच प्रक्रियाओं में मैनुअल तरीके से कई दिन लग सकते हैं, उन्हें स्वचालन और AI की मदद से करीब 15 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। स्टार्टअप का मानना है कि इस तरह का समाधान खास तौर पर छोटे कारोबारों और स्टार्टअप के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां नियमित रूप से विस्तृत साइबर सुरक्षा जांच कराना समय और लागत दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, गति के साथ साइबर सुरक्षा में सटीकता भी महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी automated penetration testing platform की उपयोगिता केवल कम समय में रिपोर्ट तैयार करने से नहीं, बल्कि कमजोरियों की सही पहचान, जोखिम की प्राथमिकता और विशेषज्ञों द्वारा परिणामों के सत्यापन जैसे मानकों से भी निर्धारित होती है।

बीएचयू के इनक्यूबेशन सेंटर से यूपीआईटीएस तक पहुंचा नवाचार

मृत्युंजय सिंह अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए बीएचयू के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े होने की जानकारी देते हैं। इनक्यूबेशन व्यवस्था स्टार्टअप को उत्पाद विकास, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।

अब यूपीआईटीएस-2026 उनके साइबर सुरक्षा समाधान को बड़े कारोबारी मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर दे रहा है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्टार्टअप और उद्यमी अपने उत्पादों और तकनीकी समाधानों को देश-विदेश के कारोबारी प्रतिनिधियों और संभावित ग्राहकों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

लोकल प्रतिभा से ग्लोबल टेक समाधान की ओर बढ़ता यूपी

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और नवाचार का दायरा अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे युवा उद्यमी भी अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। यूपीआईटीएस जैसे मंच इस प्रक्रिया में उन्हें उद्योग और संभावित बाजार से जोड़ने का अवसर देते हैं।

पेनटेस्टरेडार की कहानी इसी बदलाव को रेखांकित करती है। वाराणसी का एक युवा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एथिकल हैकिंग और vulnerability research के अनुभव से आगे बढ़कर अपना तकनीकी उत्पाद विकसित कर रहा है और उसे ग्रेटर नोएडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के लिए ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा केवल ओडीओपी और पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि प्रदेश की युवा तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल समाधान भी इसका हिस्सा बनते दिखाई देते हैं।

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