SIR विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला, ईवीएम से बालाकोट तक उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIR को लेकर कांग्रेस, सपा और आरजेडी पर निशाना साधा। ईवीएम, चुनाव आयोग, 1975 की इमरजेंसी, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए।

SIR विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला, बोले- ईवीएम को ब्लैक बॉक्स कहना दुर्भाग्यपूर्ण
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों के रुख पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR को लेकर विपक्ष द्वारा जिस तरह “हाय-तौबा” मचाई जा रही है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि SIR कोई पहली बार होने वाली प्रक्रिया नहीं है और पहले भी अलग-अलग समय पर यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है।
SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को SIR को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय पूरी प्रक्रिया को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी देश में अलग-अलग समय पर SIR की प्रक्रिया हुई है और इनमें कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों का दौर भी शामिल रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी इस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने मौजूदा SIR को लेकर कांग्रेस, सपा और आरजेडी के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने चुनावी नतीजों को लेकर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं तो उसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन यदि जनता उन्हें नकार देती है तो चुनाव आयोग या ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस पर आत्मावलोकन करना चाहिए। यह मुख्यमंत्री का विपक्ष के राजनीतिक व्यवहार को लेकर किया गया आरोप है।
राहुल गांधी, कैम्ब्रिज और राफेल का भी किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दिए गए वक्तव्यों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने वहां भारत की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। इसके साथ ही उन्होंने 2019 के राफेल विवाद के दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं को लगातार कटघरे में खड़ा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उनके बयान में चुनाव आयोग के साथ-साथ न्यायपालिका और CAG को लेकर विपक्ष के पुराने रुख को वर्तमान SIR विवाद से जोड़कर सवाल उठाए गए।

ईवीएम को ‘ब्लैक बॉक्स’ कहने पर भी निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने EVM को लेकर विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिन EVM से चुनाव हुए, उन्हीं चुनावों के जरिए कांग्रेस केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में आई। ऐसे में EVM को “ब्लैक बॉक्स” कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इसे भारत की चुनाव प्रणाली और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर सवाल उठाने के रूप में पेश किया।
यहां मुख्यमंत्री का तर्क चुनावी परिणामों और EVM को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग समय के रुख पर आधारित था। EVM को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष इस समय देश में जारी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की अपनी आधिकारिक स्थिति में कहा था कि SIR से जुड़े निर्णय आयोग की सर्वसम्मत स्वीकृति से लिए गए थे और SIR के आदेश को सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा गया था।
1975 की इमरजेंसी का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 और देश में लगी इमरजेंसी का भी जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान विपक्षी दलों की चुनी हुई सरकारों को अनैतिक तरीके से गिराने का काम किया गया। ये मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस के ऐतिहासिक राजनीतिक आचरण को लेकर लगाए गए आरोप हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसके रुख को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान SIR विवाद को भी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर भी सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने विपक्ष की ओर से इन सैन्य अभियानों पर उठाए गए सवालों का संदर्भ देते हुए कहा कि भारतीय जवानों के शौर्य और पराक्रम पर सवाल खड़ा करना देशभक्ति नहीं है।
मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी आरोप लगाए। इन बयानों को मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फॉर्म-6 और छूटे मतदाताओं को लेकर भी कही बात
मुख्यमंत्री ने SIR के दौरान छूटे मतदाताओं और फॉर्म-6 को लेकर भी कहा कि पात्र मतदाताओं को अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट किए जाने का उल्लेख किया और कहा कि इसके बावजूद आयोग तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग ने भी 26 सितंबर को कहा था कि SIR से संबंधित उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आयोग ने छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए प्रक्रिया के संबंध में स्पष्टीकरण दिया है।
‘लोकतंत्र में हिंसा और दुष्प्रचार के लिए जगह नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से जनता और संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगने की मांग भी की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR मुख्य मुद्दा रहा, लेकिन इसके साथ उन्होंने EVM, चुनाव आयोग, न्यायपालिका, CAG, 1975 की इमरजेंसी तथा बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए विपक्ष के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए।



