पूर्वोत्तर में रेलवे कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार, हाथियों और भूस्खलन से निपटने को आधुनिक तकनीक
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने यूपी के पत्रकारों को रेलवे की विकास योजनाओं, विद्युतीकरण, हाथी सुरक्षा प्रणाली, सुरंगों, भूस्खलन और मौसम निगरानी तकनीक की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार को बड़े स्तर पर गति मिली है और लंबे समय से लंबित कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। दुर्गम पर्वतीय इलाकों में सुरंगों के निर्माण से लेकर ट्रैक की निगरानी और हाथियों की आवाजाही का पता लगाने वाली तकनीक तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कपिंजल किशोर शर्मा के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य केवल यात्रियों के लिए बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास, पर्यटन, व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करना है।

2014 के बाद पूर्वोत्तर में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर
संवाद के दौरान कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में रेलवे कनेक्टिविटी के विस्तार और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर बड़े स्तर पर काम किया गया। उनके अनुसार, पहले कई रेल परियोजनाएं लंबे समय से लंबित थीं, लेकिन पिछले वर्षों में इनके निर्माण और विस्तार को गति दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि पूर्वोत्तर के कई ऐसे इलाके, जहां पहले रेल संपर्क सीमित था, अब रेलवे नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़े हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की आधिकारिक जानकारी में भी राज्य की राजधानियों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ी कई नई रेल लाइन परियोजनाओं को क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण पर भी लगातार काम किया जा रहा है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने वर्ष 2025 में दिब्रूगढ़ और नाहरलागुन तक निर्बाध विद्युत रेल संचालन हासिल करने की जानकारी दी थी। रेलवे के मुताबिक इससे ट्रेन परिचालन की गति, समयपालन और विश्वसनीयता में सुधार के साथ परिचालन लागत में कमी तथा डीजल पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।
हाथियों की सुरक्षा के लिए ट्रैक में सेंसर आधारित तकनीक
पूर्वोत्तर के जंगलों और वन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइनों के सामने वन्यजीवों, विशेष रूप से हाथियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती रही है। कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि रेलवे ने इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। उनके अनुसार, रेलवे ट्रैक के नीचे केबल आधारित प्रणाली और प्रेशर रिकॉग्निशन सिस्टम के जरिए हाथियों और अन्य बड़े जानवरों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जाता है। जब किसी संवेदनशील क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही का संकेत मिलता है तो संबंधित स्तर पर इसकी जानकारी पहुंचाकर ट्रेन के लोको पायलट को सतर्क किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस तरह की तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य ट्रेन और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं को कम करना है। कपिंजल शर्मा के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल और अन्य सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप हाथियों से ट्रेन की टक्कर की घटनाओं में कमी आई है और पिछले वर्ष ऐसी केवल एक घटना सामने आई थी। यह व्यवस्था पूर्वोत्तर जैसे जैव-विविधता वाले क्षेत्र में रेलवे परिचालन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भूस्खलन और भूकंप जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति रेलवे निर्माण और परिचालन को दूसरे कई क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती है। विशेष रूप से पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, भारी बारिश और भूकंप जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां रेल ट्रैक के लिए चुनौती पैदा करती हैं। कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि रेलवे इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने बताया कि आई और लेजर आधारित सिस्टम के माध्यम से ट्रैक और उससे जुड़े क्षेत्रों की निगरानी को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में रेलवे लाइन बिछाने के दौरान सुरंगों का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में लंबे घुमावदार रेल मार्गों के बजाय सुरंगों के जरिए अपेक्षाकृत सीधा और सुरक्षित रेल मार्ग तैयार करने में मदद मिलती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पहले भी विभिन्न पर्वतीय और सीमावर्ती रेल परियोजनाओं में नई लाइन, दोहरीकरण और वैकल्पिक रेल मार्गों पर काम की जानकारी देता रहा है।
मौसम की निगरानी के लिए आधुनिक व्यवस्था
पूर्वोत्तर में मौसम की अनिश्चितता भी रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। भारी बारिश, अचानक मौसम में बदलाव, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों का सीधा असर रेल परिचालन पर पड़ सकता है। कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए रेलवे की ओर से मौसम की निगरानी और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि मौसम संबंधी परिस्थितियों पर नजर रखने के लिए रेलवे की अपनी आधुनिक निगरानी व्यवस्था और मौसम संबंधी तकनीकी प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर रेल परिचालन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
रेलवे केवल परिवहन नहीं, पूर्वोत्तर के विकास का आधार
कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर में रेलवे की भूमिका केवल यात्रियों के आवागमन तक सीमित नहीं है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से स्थानीय बाजारों को बड़े बाजारों से जोड़ने, कृषि और स्थानीय उत्पादों की आवाजाही को आसान बनाने, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा रोजगार के अवसरों को मजबूत करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि नई रेल लाइनों के निर्माण के साथ मौजूदा नेटवर्क के आधुनिकीकरण, विद्युतीकरण, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा तकनीक पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में नई लाइन और अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं का उद्देश्य केवल परिवहन सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना भी है। ऐसे में रेलवे का विस्तार पूर्वोत्तर को देश के अन्य हिस्सों से और अधिक मजबूती से जोड़ने की व्यापक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
पत्रकारों ने समझी पूर्वोत्तर की जमीनी विकास यात्रा
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत आयोजित इस मीडिया भ्रमण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पत्रकारों को पूर्वोत्तर में हो रहे विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर समझने का अवसर मिला। रेलवे अधिकारियों के साथ संवाद के दौरान पत्रकारों ने रेल कनेक्टिविटी, नई परियोजनाओं, विद्युतीकरण, यात्री सुविधाओं, वन्यजीव सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में रेलवे निर्माण और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों से जुड़े सवाल पूछे।

इस दौरान पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना, आधुनिक तकनीकों के जरिए रेल परिचालन को सुरक्षित बनाना और पूर्वोत्तर के आर्थिक एवं पर्यटन विकास को कनेक्टिविटी के माध्यम से गति देना इस पूरी प्रक्रिया के प्रमुख पहलुओं के रूप में सामने आया। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत आयोजित यह संवाद उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के बीच विकास, संस्कृति, पर्यटन और आपसी समझ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।



