BRICS 2026: पुतिन-शी चिनफिंग का हाथ थामे दिखे पीएम मोदी, तस्वीर से दुनिया को दिया बड़ा संदेश
BRICS 2026 के मंच से पीएम मोदी ने पुतिन और शी चिनफिंग के साथ हाथ पकड़े तस्वीर साझा की। दिल्ली में हो रहे शिखर सम्मेलन के बीच भारत-रूस-चीन संबंधों पर दुनिया की नजर।


मोदी-शी-पुतिन की तस्वीर ने खींचा दुनिया का ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं। इनमें एक तस्वीर में मोदी, शी चिनफिंग और व्लादिमीर पुतिन एक साथ नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं का हाथ पकड़े हुए दिखाई देना इस मुलाकात के दृश्य को खास बना रहा है। इसी फोटो के कारण सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में इस तस्वीर की चर्चा हो रही है। BRICS का यह 18वां शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है, जिसमें सदस्य देशों के कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं।
तस्वीर में केवल मोदी, पुतिन और शी चिनफिंग ही नहीं, बल्कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री प्राबोवो सुबियांतो भी नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, BRICS मंच पर इन नेताओं की मौजूदगी को व्यापक वैश्विक संदर्भ में देखा जा रहा है।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी चिनफिंग
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे। यह उनकी करीब सात साल बाद भारत यात्रा है और BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात भी प्रस्तावित है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देश संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। सीमा पर सैन्य तनाव कम करने के लिए 2024 में हुए समझौते के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और आर्थिक संबंधों में भी सुधार के संकेत मिले हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मोदी और शी की बातचीत दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच हो रही है। सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग भी महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं। हालांकि भारत-चीन संबंधों में सुधार के बावजूद सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे अभी भी मौजूद हैं।
पुतिन के साथ पीएम मोदी की अहम द्विपक्षीय बैठक
BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच संबंधों समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भारत में पहली बार आयोजित रूस की INNOPROM India प्रदर्शनी का भी दौरा किया और वहां मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत की।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंध लंबे समय से कायम हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग पर दुनिया की नजर है। इसी बीच BRICS में भारत की 2026 की अध्यक्षता के संदर्भ में भी मोदी और पुतिन ने बहुपक्षीय सहयोग पर विचार साझा किए।
BRICS मंच पर ग्लोबल साउथ को लेकर पीएम मोदी का संदेश
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। मोदी ने कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने ग्लोबल साउथ के नीति-निर्माताओं को वैश्विक बातचीत में भाग लेने के लिए जरूरी जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भारत की इच्छा भी जताई।

BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि इसका विस्तार हो चुका है। मौजूदा BRICS में 11 सदस्य देश हैं और यह दुनिया की करीब आधी आबादी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक संघर्षों जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा के विषय हैं।
मोदी-शी-पुतिन की एक तस्वीर, लेकिन संदेश कई स्तरों पर
मोदी, शी चिनफिंग और पुतिन की हाथ पकड़े तस्वीर को केवल एक फोटो के रूप में देखना इस घटनाक्रम के व्यापक कूटनीतिक संदर्भ को छोटा कर देगा। भारत के रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंध हैं, जबकि चीन के साथ भारत के संबंधों में लंबे समय से सीमा और व्यापार से जुड़े मतभेद रहे हैं। ऐसे में तीनों नेताओं का एक मंच पर साथ दिखना BRICS की उस भूमिका को भी रेखांकित करता है जिसमें भारत पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए रूस, चीन और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी संवाद जारी रखता है।
हालांकि, इस तस्वीर को किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते या तीन देशों के बीच किसी नए गठबंधन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। तस्वीर का प्रतीकात्मक महत्व जरूर है, लेकिन वास्तविक कूटनीतिक संदेश नेताओं की बैठकों, वार्ताओं और सम्मेलन से निकलने वाले फैसलों से स्पष्ट होगा। BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संघर्ष, व्यापार तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
भारत-चीन संबंधों पर भी टिकी दुनिया की नजर
शी चिनफिंग की भारत यात्रा और मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित बैठक को खास तौर पर भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। 2020 के सीमा संघर्ष के बाद दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके बाद सीधी उड़ानों और व्यापारिक संपर्कों को भी धीरे-धीरे बहाल करने की कोशिश हुई है। चीन के राष्ट्रपति की सात साल बाद भारत यात्रा इसी बदलते माहौल का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
ऐसे में BRICS 2026 भारत के लिए केवल बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं है, बल्कि एक ऐसा कूटनीतिक मंच भी है जहां भारत एक ही समय में रूस, चीन, ईरान और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद कर रहा है। मोदी-शी-पुतिन की तस्वीर इसी व्यापक कूटनीतिक सक्रियता की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक बन गई है।



