कानपुर में ₹5,600 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा! दो महाठग गिरफ्तार, 86 शिकायतें और 76 बोगस फर्मों का नेटवर्क
कानपुर में ₹5,600 करोड़ की कथित साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। शाहवेज वारिस और सलमान हैदराबाद से गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों के खिलाफ 86 शिकायतें और 76 बोगस फर्मों की जांच हो रही है।

कानपुर में ₹5,600 करोड़ की कथित साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। शाहवेज वारिस और सलमान हैदराबाद से गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों के खिलाफ 86 शिकायतें और 76 बोगस फर्मों की जांच हो रही है।
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध से जुड़ा एक बेहद बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने करीब ₹5,600 करोड़ की कथित ठगी और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बेकनगंज के तलाक महल निवासी शाहवेज वारिस और चमनगंज निवासी सलमान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार शाहवेज को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया और वहां की अदालत में पेश करने के बाद उसे 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया। इसके बाद उसकी निशानदेही पर सलमान को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में दोनों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर कुल 86 शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। पुलिस अब बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, डिजिटल लेनदेन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टा और डिजिटल अरेस्ट के जरिए रकम जुटाने का आरोप
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक आरोपित जिस नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं, उसमें लोगों को अलग-अलग तरीकों से आर्थिक जाल में फंसाया जाता था। ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट मैच में सट्टा, निवेश के नाम पर कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से रकम जुटाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और उनके बैंक खातों, फर्जी कंपनियों तथा पैसों के लेनदेन की जांच चल रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रकम को अलग-अलग बैंक खातों और अन्य माध्यमों से इधर-उधर किया जाता था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और रकम के वास्तविक प्रवाह का रास्ता क्या था।
शाहवेज के 11 खातों से जुड़ी शिकायतों में करीब ₹170 करोड़
जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक दोनों आरोपितों के खिलाफ एनसीआरपी पर कुल 86 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें शाहवेज वारिस से जुड़े 11 बैंक खातों के संबंध में दर्ज शिकायतों में करीब ₹170 करोड़ की धोखाधड़ी का उल्लेख है। वहीं सलमान के दो बड़े बैंक खातों के खिलाफ 32 शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें करीब ₹16 करोड़ की धोखाधड़ी की रकम का उल्लेख बताया गया है। पुलिस इन शिकायतों और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कितनी रकम वास्तव में ठगी के मामलों से जुड़ी है और कितनी रकम संदिग्ध लेनदेन के रूप में सामने आई है। यही वजह है कि ₹5,600 करोड़ के पूरे आंकड़े को फिलहाल जांच के दायरे में देखा जा रहा है।
76 बोगस फर्मों के जरिए रकम घुमाने का शक
साइबर क्राइम टीम की जांच में करीब 76 बोगस फर्मों का भी पता चलने की बात कही गई है। पुलिस को आशंका है कि इन फर्मों और उनसे जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल कथित ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया हो सकता है। अब जांच एजेंसियां इन फर्मों के पंजीकरण से लेकर उनके बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि इन कंपनियों को किसने बनाया, इनके बैंक खाते किन लोगों के नाम पर खोले गए और इनके माध्यम से कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
मुकदमा दर्ज होने के बाद दुबई भागा था शाहवेज
पुलिस की जांच के अनुसार शाहवेज वारिस के खिलाफ 18 अगस्त को मुकदमा दर्ज होने के बाद उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद उसके विदेश जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि वह दुबई में किन लोगों के संपर्क में था और क्या वहां रहते हुए भी कथित साइबर नेटवर्क का संचालन या संपर्क बनाए रखा गया था। बाद में उसके हैदराबाद में होने की जानकारी मिलने पर साइबर क्राइम टीम सक्रिय हुई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस उसे हैदराबाद की अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लेकर आई।
लुकआउट नोटिस के बाद हैदराबाद एयरपोर्ट पर पकड़ा गया
पुलिस जांच के मुताबिक शाहवेज के विदेश जाने और वापस आने की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह एक बार 21 अगस्त को वापस आया, लेकिन बाद में 24 अगस्त को लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद फिर दुबई चला गया। इसके बाद जब वह हैदराबाद एयरपोर्ट पहुंचा तो लुकआउट नोटिस के आधार पर उसे पकड़ लिया गया। शुक्रवार रात पुलिस टीम उसे लेकर कानपुर पहुंची। अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि विदेश यात्रा के दौरान उसका किन लोगों से संपर्क रहा और इस नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियां हैं या नहीं।
पहले गिरफ्तार आरोपितों के खातों में भी मिले थे करोड़ों के लेनदेन
जांच के दौरान पुलिस की नजर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों पर भी है। चांद सिद्दीकी और बेकनगंज निवासी मो. अमान खान को 24 अगस्त को एक अन्य ठगी के मामले में जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस के मुताबिक चांद के एक खाते में करीब ₹33.82 करोड़ और अमान के एक खाते में करीब ₹559 करोड़ के लेनदेन मिले थे। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन खातों का शाहवेज और सलमान से क्या संबंध है और क्या सभी लेनदेन एक ही बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।
कम समय में रकम कई गुना करने का लालच देकर फंसाते थे
पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क में लोगों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग तरह के लालच दिए जाते थे। निवेश के नाम पर कम समय में रकम कई गुना करने का दावा किया जाता था। ऑनलाइन गेमिंग और क्रिकेट मैचों में सट्टे से बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देकर भी लोगों से बैंक खातों में रकम मंगाई जाती थी। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर पैसे ऐंठने की बात भी जांच में सामने आई है। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का वह तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करके पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं और वीडियो कॉल या अन्य माध्यमों से उसे अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश करते हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इन तरीकों से कितनी रकम हासिल की गई।
कानपुर में पहले भी सामने आ चुके हैं करोड़ों के बड़े मामले
कानपुर में साइबर और आर्थिक अपराध से जुड़े बड़े मामले पहले भी सामने आए हैं। दिसंबर 2025 में रवींद्रनाथ सोनी की गिरफ्तारी के बाद जांच में करीब ₹1,500 करोड़ की कथित ठगी का मामला सामने आया था। रिपोर्टिंग के मुताबिक 700 से अधिक लोगों से जुड़ी इस जांच में निवेश के नाम पर रिटर्न और रकम दोगुनी करने का लालच देने का आरोप था। बाद की जांच में उसके खिलाफ कई मुकदमे और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलू भी सामने आए।
इसी तरह मई 2026 में कानपुर पुलिस ने महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को करीब ₹3,200 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया था। जांच में फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और हवाला नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की बात सामने आई थी। बाद में इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
₹5,600 करोड़ के नेटवर्क में कौन-कौन शामिल, जांच जारी
शाहवेज वारिस और सलमान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल इस पूरे नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और पैसों के अंतिम प्रवाह का है। एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का मिलान किया जा रहा है। 76 बोगस फर्मों की भूमिका, दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर खोले गए खातों और संदिग्ध बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होने की उम्मीद है कि ₹5,600 करोड़ का आंकड़ा किन-किन प्रकार के लेनदेन और शिकायतों से जुड़ा है, कितनी रकम वास्तविक साइबर ठगी की है और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे।



