मिर्जापुर में दिव्यांग बच्चों के लिए बनेगा बचपन डे केयर सेंटर, योगी सरकार ने जारी की 2 करोड़ की पहली किस्त
मिर्जापुर में दिव्यांग बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटर का भवन बनेगा। 328.42 लाख रुपये की लागत वाली परियोजना के लिए योगी सरकार ने 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है।

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में दिव्यांग बच्चों के बेहतर विकास, शिक्षा और पुनर्वास के लिए सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। मिर्जापुर में दिव्यांग बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटर के भवन का निर्माण कराया जाएगा। शासन ने इस परियोजना के लिए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी अवमुक्त कर दी गई है। इस भवन के निर्माण पर कुल 328.42 लाख रुपये, यानी करीब 3.28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्थानीय रिपोर्ट में भी मिर्जापुर में इसी लागत और 2 करोड़ रुपये की पहली स्वीकृति की जानकारी सामने आई है।
3 से 7 वर्ष के दिव्यांग बच्चों के लिए होगा सेंटर
बचपन डे केयर सेंटर का उद्देश्य कम उम्र के दिव्यांग बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक शिक्षण, प्रशिक्षण और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रदेश में 3 से 7 वर्ष की आयु के श्रवणबाधित, मानसिक मंदित और दृष्टिबाधित बच्चों की प्री-स्कूल रेडीनेस के लिए मंडलीय स्तर पर ऐसे सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इन केंद्रों में बच्चों को शिक्षण और प्रशिक्षण के साथ सामान्य विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया जाता है।
मिर्जापुर में नए भवन के निर्माण से ऐसे बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित और मजबूत करने में मदद मिलेगी। अभी जिले में बचपन डे केयर सेंटर किराए के भवन में संचालित होने की जानकारी सामने आई है और स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक वहां करीब 60 बच्चे पंजीकृत हैं। नए भवन के उपलब्ध होने के बाद सेंटर की क्षमता और सुविधाओं को बेहतर तरीके से विकसित करने का अवसर मिलेगा।
328.42 लाख रुपये की लागत से बनेगा भवन
शासन की ओर से भवन निर्माण के लिए कुल 328.42 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 200 लाख रुपये यानी 2 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त जारी की गई है। शेष धनराशि का आहरण और व्यय आवश्यकता के अनुसार निर्धारित वित्तीय नियमों के तहत किश्तों में किया जाएगा। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार पहले भवन के लिए करीब 3.45 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे पुनरीक्षित करते हुए 328.42 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।
सरकार की इस पहल का फोकस केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। दिव्यांग बच्चों को शुरुआती उम्र में ही उनकी जरूरत के अनुरूप शिक्षण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने से उनके आगे के शैक्षिक विकास के लिए बेहतर आधार तैयार किया जा सकता है। इसी वजह से बचपन डे केयर सेंटरों को दिव्यांग बच्चों की प्री-स्कूल रेडीनेस और पुनर्वास व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
निर्माण शुरू होने से पहले तकनीकी स्वीकृति और वैधानिक मंजूरी जरूरी
शासन ने भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही शुरू किया जाएगा। साथ ही निर्धारित मानकों और स्वीकृत विशिष्टियों के अनुरूप निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्था की होगी। निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय क्लियरेंस प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित परियोजना और मानकों के अनुरूप हो तथा दिव्यांग बच्चों के लिए तैयार होने वाला भवन लंबे समय तक उपयोगी और सुरक्षित रहे। वित्तीय अनुशासन के तहत जारी धनराशि का आहरण एवं व्यय आवश्यकता के अनुसार निर्धारित नियमों के मुताबिक किया जाएगा।
प्रदेश में बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांग बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है। राज्य के बजट दस्तावेज में भी वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान बचपन डे केयर सेंटरों के संचालन के लिए 800 लाख रुपये की व्यवस्था का उल्लेख है। सरकारी जानकारी के अनुसार इन केंद्रों में 3 से 7 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों को शिक्षण और प्रशिक्षण देकर उन्हें आगे सामान्य विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए तैयार करने की व्यवस्था की जाती है।
बचपन डे केयर सेंटरों की व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दिव्यांग बच्चों के विकास में शुरुआती उम्र का प्रशिक्षण और विशेष सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे केंद्रों के जरिए बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के साथ परिवारों को भी सहयोग मिल सकता है। मिर्जापुर में स्थायी भवन का निर्माण इसी व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर जोर
योगी सरकार की दिव्यांगजन कल्याण से जुड़ी नीति में सहायता के साथ-साथ पुनर्वास, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सशक्तीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। बचपन डे केयर सेंटर जैसी सुविधाओं का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही उनकी जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण और शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे आगे चलकर वे अपनी क्षमता के अनुसार शिक्षा और सामाजिक जीवन में बेहतर भागीदारी कर सकें।
मिर्जापुर में 328.42 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित भवन और इसके लिए जारी 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त इसी दिशा में उठाया गया कदम है। परियोजना का निर्माण तकनीकी स्वीकृति और आवश्यक वैधानिक मंजूरियों के बाद शुरू होगा। इससे जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित डे केयर व्यवस्था को अपना भवन मिलने की दिशा में रास्ता साफ होगा और भविष्य में सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जा सकेगा।



