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यूपी में 1,606 करोड़ की 65 स्वास्थ्य परियोजनाएं, लखनऊ में बनेगा 1,010 बेड का अस्पताल; मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में 1,606.83 करोड़ रुपये की 65 चिकित्सा परियोजनाओं को शिलान्यास और लोकार्पण के लिए तैयार कर रही है। लखनऊ में 855 करोड़ से 1,010 बेड का अस्पताल बनेगा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के बाद अब चिकित्सा संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। योगी सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में करीब 1,606.83 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाएं शिलान्यास और लोकार्पण के लिए तैयार हैं। इनमें करीब 1,400.70 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाएं शिलान्यास से संबंधित हैं, जबकि करीब 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण के लिए तैयार हैं। इन परियोजनाओं का दायरा केवल नए अस्पताल भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में बढ़ी सीटों के अनुरूप छात्रावास, लेक्चर थिएटर, परीक्षा भवन, नर्सिंग कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र, संक्रामक रोग चिकित्सालय, ट्रांसप्लांट यूनिट, सीवरेज, जलापूर्ति और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी इसमें शामिल किया गया है। यानी प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार होने के साथ अब उससे जुड़े पूरे सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
फ़ोटो- प्रतीकात्मक
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लखनऊ में 855 करोड़ से बनेगा 1,010 बेड का नया अस्पताल

प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे बड़ी परियोजना राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की है। संस्थान के गोमतीनगर विस्तार स्थित नए परिसर में निर्मित बेसमेंट के ऊपर 1,010 शैय्या वाले अस्पताल भवन का निर्माण करीब 855.04 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी परियोजना में अत्याधुनिक मल्टी स्पेशियलिटी इमरजेंसी सेंटर के साथ नए ओपीडी और टीचिंग ब्लॉक के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। दूसरी ओर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में करीब 43.68 करोड़ रुपये की लागत से बहुमंजिला रोगी सहायक आधुनिक कैंटीन प्रस्तावित है। कानपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में नए जनरेटर के साथ करीब 49.40 करोड़ रुपये की लागत से नए संक्रामक रोग चिकित्सालय के निर्माण की तैयारी है।

लखनऊ की इस बड़ी परियोजना के साथ-साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी मरीजों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े अस्पतालों में उपचार की क्षमता बढ़ाने के साथ मरीजों को अस्पताल परिसर में बेहतर और अधिक व्यवस्थित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। वहीं मेडिकल कॉलेजों में बढ़ती छात्र संख्या और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के मद्देनजर अकादमिक एवं आवासीय सुविधाओं को भी समानांतर रूप से विकसित करने की योजना है।

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मेरठ में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर और एमसीएच सेंटर का विस्तार

मेरठ मेडिकल कॉलेज में मरीजों के उपचार के साथ-साथ कैंपस की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मौजूदा लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर को 100 बेड के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने पर करीब 48.15 करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित हैं। इसके साथ बाल रोग विभाग में एमसीएच सेंटर के निर्माण पर करीब 34.82 करोड़ रुपये की लागत आएगी। ट्रॉमा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इन परियोजनाओं के अलावा सीवरेज व्यवस्था, महिला एवं पुरुष पीजी छात्रावास, जलापूर्ति सिस्टम, 10 एमएलडी एसटीपी और बिजली से संबंधित बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। इस तरह मेरठ मेडिकल कॉलेज में मरीजों के उपचार की क्षमता बढ़ाने के साथ चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों के लिए आवश्यक कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विस्तार दिया जाएगा।

फ़ोटो- प्रतीकात्मक
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मेडिकल सीटें बढ़ीं तो हॉस्टल और अकादमिक सुविधाएं भी होंगी मजबूत

योगी सरकार की चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी रणनीति में मेडिकल सीटों के विस्तार के साथ छात्रों के लिए पर्याप्त अकादमिक और आवासीय सुविधाएं विकसित करना भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। झांसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस यूजी सीटों में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बहुमंजिला भवन में लेक्चर थिएटर, वातानुकूलित पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया और परीक्षा हॉल के निर्माण की परियोजना प्रस्तावित है, जिस पर करीब 28.44 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसी क्रम में 272 बेड के यूजी बालिका छात्रावास के निर्माण पर करीब 26.89 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। एटा में छात्र-छात्राओं के लिए बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल सहित परिसर की अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाना है। कुशीनगर में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल और एसटीपी जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अयोध्या मेडिकल कॉलेज में भी 100 शैय्या इंटर्नशिप हॉस्टल, 100 शैय्या बॉयज हॉस्टल और 100 शैय्या यूजी गर्ल्स हॉस्टल सहित अन्य निर्माण कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और मेडिकल सीटों में विस्तार के साथ छात्रावास तथा शिक्षण सुविधाओं की आवश्यकता भी बढ़ी है। 2026-27 के यूपी बजट में भी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास और चिकित्सालय निर्माण के लिए प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं को मेडिकल शिक्षा के विस्तार से जुड़े आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।

नर्सिंग शिक्षा के विस्तार पर भी फोकस

चिकित्सकों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग मानव संसाधन तैयार करने पर भी प्रदेश सरकार का जोर है। प्रस्तावित शिलान्यास परियोजनाओं में गोंडा मेडिकल कॉलेज में करीब 9.93 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज की स्थापना शामिल है। वहीं लोकार्पण के लिए तैयार परियोजनाओं में बहराइच, अयोध्या और हरदोई के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में करीब 20.82 करोड़ रुपये की लागत से 60 सीट का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में करीब 20.82 करोड़ रुपये की लागत से कॉलेज ऑफ नर्सिंग भी सूची में शामिल है।

नर्सिंग शिक्षा का विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की जरूरत भी बढ़ती है। ऐसे में नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना को स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक मानव संसाधन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

अस्पतालों के साथ डॉक्टरों और छात्रों के लिए भी बढ़ेंगी सुविधाएं

इन परियोजनाओं का दायरा अस्पताल और क्लासरूम तक सीमित नहीं है। जौनपुर के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सकों के आवास, टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-4 आवास, 200 क्षमता वाले दो व्याख्यान कक्ष, इंटर्न पुरुष छात्रावास, फैकल्टी पार्किंग, फायर फाइटिंग सिस्टम और गेस्ट हाउस सहित कई कैंपस सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं। मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस छात्रों के लिए 160 क्षमता और छात्राओं के लिए 140 क्षमता वाले छात्रावास के साथ चार व्याख्यान कक्षों में ध्वनिरोधक निर्माण कार्य प्रस्तावित है। बस्ती में ओपेक चिकित्सालय कैली में क्लीनिकल ब्लॉक का निर्माण प्रस्तावित है, जबकि लोकार्पण की सूची में इसी अस्पताल परिसर में गेस्ट हाउस, बैंक, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शवगृह जैसे भवन भी शामिल हैं। शाहजहांपुर में इमरजेंसी विभाग के जीर्णोद्धार एवं निर्माण के साथ नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से संबंधित परियोजनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

इससे साफ है कि चिकित्सा संस्थानों में सिर्फ मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ाने के बजाय पूरे कैंपस को आधुनिक और उपयोगी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अस्पताल, मेडिकल शिक्षा, छात्रावास, डॉक्टरों के आवास, फायर सेफ्टी, जलापूर्ति और सीवरेज जैसी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने का उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों को व्यापक स्तर पर मजबूत करना है।

206.13 करोड़ की 21 तैयार परियोजनाओं का होगा लोकार्पण

शिलान्यास के साथ सरकार का जोर ऐसी परियोजनाओं को जनता और मेडिकल छात्रों के उपयोग के लिए समर्पित करने पर भी है, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है। करीब 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण के लिए तैयार हैं। कानपुर मेडिकल कॉलेज में बढ़ी यूजी सीटों के अनुरूप मेडिकल रिकॉर्ड सेक्शन और यूजी बॉयज हॉस्टल विस्तार का कार्य तैयार है। मानसिक रोग विभाग में एमडी साइकियाट्री पाठ्यक्रम के लिए विभाग का विस्तार और डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक भी लोकार्पण सूची में शामिल है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल, 100 बेड इंटर्न हॉस्टल, परीक्षा भवन विस्तार और लेक्चर थिएटर जैसी परियोजनाएं तैयार हैं। वहीं गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बहुमंजिला डबल सीटेड गर्ल्स छात्रावास भी तैयार परियोजनाओं में शामिल है।

इन तैयार परियोजनाओं के लोकार्पण से संबंधित संस्थानों में पहले से चल रही चिकित्सा शिक्षा और उपचार व्यवस्था को अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है। खासतौर पर मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ने के साथ छात्रावास, परीक्षा भवन, लेक्चर थिएटर और रिकॉर्ड सेक्शन जैसी सुविधाओं की जरूरत बढ़ती है, इसलिए तैयार परियोजनाओं को उपयोग में लाना मेडिकल संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की दिशा में भी विस्तार

सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं के लिहाज से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की परियोजना विशेष महत्व रखती है। संस्थान के मुख्य चिकित्सा भवन की छठी और सातवीं मंजिल पर किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन यूनिट स्थापित करने की परियोजना लोकार्पण सूची में शामिल है। इसकी लागत करीब 18.22 करोड़ रुपये दर्ज है। इसके अलावा इसी संस्थान के 200 बेड राम प्रकाश गुप्ता मेमोरियल मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में रेडियोलॉजिकल ब्लॉक के पास 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हॉल भी तैयार परियोजनाओं में शामिल है। इन सुविधाओं से सुपर स्पेशियलिटी उपचार और मरीजों के लिए अस्पताल की सहायक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में विस्तार का संकेत मिलता है।

मेडिकल एजुकेशन के बाद अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के बाद अब चिकित्सा संस्थानों की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। 65 परियोजनाओं का यह पैकेज इसी दिशा में एक व्यापक प्रयास के रूप में सामने आता है। एक तरफ लखनऊ में 1,010 बेड का बड़ा अस्पताल भवन, मेरठ में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर और एमसीएच सेंटर तथा सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर नर्सिंग कॉलेज, छात्रावास, लेक्चर थिएटर, परीक्षा भवन, चिकित्सक आवास, जलापूर्ति, सीवरेज और फायर सेफ्टी जैसी सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के 2026-27 बजट में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़े स्तर पर प्रावधान किए गए हैं। बजट दस्तावेजों के अनुसार चिकित्सा शिक्षा के साथ मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों के निर्माण तथा विस्तार को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में प्रस्तावित और तैयार 65 परियोजनाएं प्रदेश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अगले स्तर तक ले जाने की इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इन परियोजनाओं के जरिए मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधाओं के साथ मरीजों के उपचार की क्षमता तथा अस्पतालों की सहायक व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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