उत्तर प्रदेशराजनीति

68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती पर संजय सिंह का योगी सरकार पर हमला, ओबीसी-दलित अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग

 

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती और 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े आरक्षण के विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो अलग-अलग पत्र भेजकर ओबीसी, एससी और अन्य प्रभावित अभ्यर्थियों के मामलों में सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। संजय सिंह ने 68,500 शिक्षक भर्ती में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति लागू करने तथा ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की छूट देने की मांग उठाई है। वहीं 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विवाद से प्रभावित 6,800 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से सकारात्मक कानूनी पक्ष रखने की अपील की है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी लंबे समय से आरक्षण और नियुक्ति के मुद्दे को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।

68,500 शिक्षक भर्ती में 5 प्रतिशत छूट देने की मांग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पहले पत्र का हवाला देते हुए संजय सिंह ने कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में ओबीसी और दिव्यांग अभ्यर्थी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 5 जनवरी 2022 की अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखते हुए 16 जून 2026 की बैठक में इस मामले पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को संस्तुति भेजे जाने की बात कही गई, जिसमें ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 पूर्णांक में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर उत्तीर्ण मानने और उसी आधार पर परीक्षा परिणाम में संशोधन कर नियुक्ति देने की बात कही गई है। संजय सिंह का कहना है कि यदि आयोग की यह संस्तुति लागू होती है तो लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे पात्र अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है।

संजय सिंह ने पत्र में अभ्यर्थियों की ओर से किए गए उस दावे का भी उल्लेख किया है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में लगभग 23 हजार पद अभी रिक्त हैं, जिनमें करीब 9 हजार पद ओबीसी वर्ग से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया को सात वर्ष बीत जाने का हवाला देकर अभ्यर्थियों को आयोग की संस्तुति का लाभ नहीं दिया जा रहा है। आम आदमी पार्टी सांसद का कहना है कि विभागीय देरी या प्रक्रिया में हुई कमियों का खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए जो निर्धारित मानकों के अनुसार नियुक्ति के लिए पात्र हैं।

अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का आरोप

संजय सिंह ने योगी सरकार पर शिक्षक भर्ती के मामलों में दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2019 और प्रधानाध्यापक भर्ती-2021 में ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की छूट दिए जाने की बात स्वीकार की है। ऐसे में उनका तर्क है कि यदि दूसरी भर्तियों में ओबीसी अभ्यर्थियों को यह राहत दी गई है तो 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों को इससे वंचित रखना समानता के अधिकार से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों पर सवाल खड़ा करता है। इसी आधार पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए सरकार से मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

संजय सिंह ने कहा कि विभागीय स्तर पर हुई देरी या कथित लापरवाही का दंड उन युवाओं को नहीं मिलना चाहिए जो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति पर तत्काल कार्रवाई कराने और पात्र अभ्यर्थियों के हित में निर्णय लेने की मांग की है।

69,000 शिक्षक भर्ती में 6,800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा

संजय सिंह ने अपने दूसरे पत्र में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद को उठाया है। उन्होंने कहा कि 5 जनवरी 2022 को आरक्षित वर्ग के 6,800 अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की गई थी, लेकिन इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला अब तक लंबित है। संजय सिंह के मुताबिक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 16 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है और उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य सरकार अदालत के समक्ष अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट और सकारात्मक विधिक पक्ष रखे।

आप सांसद ने कहा कि यदि 6,800 अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति देना कानूनी रूप से संभव नहीं है तो बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताए गए 4,946 रिक्त पदों पर मेरिट डाउन कर ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों के समायोजन पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि यदि नियुक्ति का रास्ता तैयार होता है तो इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति को 1 जून 2020 से प्रभावी माना जाए, ताकि सेवा और वरिष्ठता से जुड़े उनके हितों की रक्षा हो सके।

‘युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

संजय सिंह ने कहा कि शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी कई वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। आम आदमी पार्टी सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी इन अभ्यर्थियों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक उठाएगी और सरकार से मांग करेगी कि योग्य युवाओं को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिले।

संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोनों भर्ती मामलों में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। 68,500 शिक्षक भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत छूट देने से जुड़े आयोग के निर्णय पर कार्रवाई और 69,000 शिक्षक भर्ती के 6,800 अभ्यर्थियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सरकार का रुख अब इस पूरे विवाद में अहम मुद्दा बना हुआ है। हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

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