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कानपुर में बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सिरप बांटने के आरोप का खंडन, सीएमओ ने जांच के बाद बताया तथ्यहीन

कानपुर में बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल सिरप बांटने के आरोपों का सीएमओ ने खंडन किया है। जांच में राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर में दवा की कोई प्रविष्टि नहीं मिली।

कानपुर: कानपुर नगर में बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड दवा बांटे जाने के आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने जांच के बाद ऐसे आरोपों को तथ्यहीन बताया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि 2 सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैंप में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप का वितरण नहीं किया गया था। सीएमओ के मुताबिक, जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड, दवा के स्टॉक और बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर की पड़ताल की गई, जिसमें उक्त सिरप के वितरण से संबंधित कोई प्रविष्टि नहीं मिली। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब 9 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कानपुर के बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच एक्सपायर्ड सिरप बांटे जाने का आरोप लगाया गया था। उस रिपोर्ट में जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुकी दवा दिए जाने और कुछ बच्चों की तबीयत खराब होने के दावे किए गए थे, हालांकि उस समय भी दवा के सेवन और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध स्पष्ट नहीं था।

सीएमओ ने जांच के बाद क्या बताया?मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह के अनुसार विभागीय जांच में सामने आया कि 2 सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप का वितरण नहीं किया गया था। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन करते हुए कहा कि विभागीय रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि उक्त सिरप बाढ़ राहत कैंप में बांटा गया था। जांच के दौरान बाढ़ राहत के लिए तैयार किए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा गया। विभाग के मुताबिक, रजिस्टर में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप की एक भी प्रविष्टि दर्ज नहीं थी। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने एक्सपायर्ड सिरप बांटे जाने के आरोपों को तथ्यहीन बताया है।

2025 में ड्रग वेयरहाउस पहुंची थी दवा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस कानपुर नगर में प्राप्त हुआ था। विभाग का कहना है कि इसके बाद मार्च 2025 तक यह दवा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को वितरित की जा चुकी थी। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक वर्तमान में किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने इसी रिकॉर्ड को अपने पक्ष का आधार बनाया है और कहा है कि 2 सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में इस दवा के वितरण की बात विभागीय दस्तावेजों से पुष्ट नहीं होती है।

बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर में नहीं मिली दवा की एंट्री

सीएमओ की जांच में बाढ़ राहत के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। विभाग के अनुसार रजिस्टर की जांच में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप की कोई एंट्री नहीं मिली। इसका मतलब स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2 सितंबर के राहत कैंप में इस दवा का वितरण दर्ज नहीं है। सीएमओ ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि कैंप में उक्त सिरप बांटे जाने की बात रिकॉर्ड से प्रमाणित नहीं होती है और इसी आधार पर संबंधित खबर का खंडन किया गया है।

पहले क्या सामने आया था एक्सपायर्ड सिरप का मामला?

इससे एक दिन पहले प्रकाशित एक रिपोर्ट में कानपुर के बर्रा मायापुरम क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित करीब 20 परिवारों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाएं दिए जाने और उनमें कथित तौर पर जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुका सिरप शामिल होने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट में कुछ परिवारों की ओर से बच्चों की तबीयत खराब होने का दावा भी किया गया था। हालांकि उस रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया था कि बच्चों की तबीयत खराब होने और कथित एक्सपायर्ड सिरप के सेवन के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ था। साथ ही मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच की आवश्यकता बताई गई थी।

विभागीय जांच के बाद अब क्या स्थिति है?

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार फिलहाल 2 सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सिरप बांटे जाने का कोई विभागीय रिकॉर्ड नहीं मिला है। सीएमओ इन्द्रदेव सिंह ने जांच के आधार पर एक्सपायर्ड दवा बांटे जाने के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए संबंधित खबर का खंडन किया है। ऐसे में मामले में सामने आए आरोप और स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। विभाग का पक्ष यह है कि संबंधित दवा वर्ष 2025 में प्राप्त होने के बाद मार्च 2025 तक स्वास्थ्य केंद्रों को वितरित की जा चुकी थी और बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर में इस दवा की कोई एंट्री नहीं थी। अब उपलब्ध विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अपने ऊपर लगाए गए एक्सपायर्ड सिरप बांटने के आरोपों को खारिज कर दिया है।

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