
लखनऊ , राज्य ब्यूरो । उत्तर प्रदेश के चर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव से जुड़े मामलों में अब ED ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मांगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने मुकेश श्रीवास्तव से जुड़ी सात से अधिक कंपनियों से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे हैं। ED की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मुकेश श्रीवास्तव का नाम NRHM से जुड़े पुराने मामलों के साथ-साथ हाल के वित्तीय अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी सामने आया है। जून 2026 में विजिलेंस ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा NRHM से जुड़े विभिन्न जिलों के मामलों में भी जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।
सात से अधिक कंपनियों के रिकॉर्ड की पड़ताल
मामले में ED का फोकस अब उन कंपनियों और फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड पर है, जिनका संबंध पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव से बताया जा रहा है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने UPMSCL से सात से अधिक कंपनियों से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं। इन रिकॉर्ड के जरिए जांच एजेंसी स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल सप्लाई से जुड़े कामकाज, कंपनियों की भूमिका तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा सकती है। खास तौर पर यह देखा जा सकता है कि सरकारी खरीद और सप्लाई से संबंधित गतिविधियों में किन कंपनियों की भूमिका रही और उनसे जुड़े भुगतान का प्रवाह किस तरह हुआ। हालांकि, किसी कंपनी या व्यक्ति का जांच में नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
क्या है NRHM घोटाले से जुड़ा पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश का NRHM घोटाला काफी पुराना मामला है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आने वाले सरकारी धन और उससे जुड़े कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इस मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों तक पहुंची। मुकेश श्रीवास्तव का नाम भी इस मामले में पहले सामने आ चुका है। बाद के वर्षों में उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में जांच आगे बढ़ी और 2026 में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद मामला फिर चर्चा में आया।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी गिरफ्तारी
पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव को 10 जून 2026 को विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की FIR वर्ष 2023 में दर्ज की गई थी। इससे पहले शासन के निर्देश पर वर्ष 2021 में उनके खिलाफ गोपनीय जांच शुरू हुई थी और विजिलेंस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 12 अक्टूबर 2022 को शासन को सौंपी थी।
जांच के अनुसार, मुकेश श्रीवास्तव ने आय के वैध स्रोतों से कुल 1,12,65,635 रुपये अर्जित किए थे, जबकि चल-अचल संपत्तियों की खरीद और उनके रखरखाव में 1,79,96,526 रुपये खर्च किए गए। विजिलेंस के मुताबिक दोनों के बीच 67,30,891 रुपये का अंतर था, जो उनकी वैध आय से 59.74 प्रतिशत अधिक था। इस अंतर को लेकर वह जांच एजेंसी को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे। इसके बाद शासन की अनुमति से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई। विजिलेंस ने छापेमारी और जांच के दौरान साक्ष्य जुटाने के बाद उनकी गिरफ्तारी की।
श्रावस्ती और बलरामपुर के मामलों ने बढ़ाई मुश्किलें
मुकेश श्रीवास्तव के खिलाफ केवल आय से अधिक संपत्ति का मामला ही नहीं है। NRHM योजना से जुड़े कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर श्रावस्ती और बलरामपुर में भी मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कराए गए कार्यों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। यही वजह है कि ED की ओर से अब संबंधित दस्तावेजों और कंपनियों के रिकॉर्ड जुटाए जाने को जांच के अगले महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।
ED की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल
इस पूरे मामले में ED की भूमिका इसलिए अहम है क्योंकि एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलू की जांच कर रही है। जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो सकता है कि कथित अनियमितताओं से जुड़ी रकम का इस्तेमाल कहां हुआ, किन संस्थाओं या कंपनियों के माध्यम से वित्तीय लेनदेन हुआ और क्या किसी रकम को अलग-अलग माध्यमों से आगे बढ़ाया गया। UPMSCL से रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद सरकारी मेडिकल सप्लाई से जुड़ी गतिविधियों और संबंधित कंपनियों के बीच वित्तीय संबंध भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
मुकेश श्रीवास्तव की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
मुकेश श्रीवास्तव बहराइच की पयागपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे हैं। वर्ष 2012 से 2017 के बीच वह विधायक रहे। बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा और वर्ष 2017 तथा 2022 में सपा के टिकट पर पयागपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा । NRHM घोटाले में नाम सामने आने के बाद भी वर्ष 2014 में कांग्रेस ने उन्हें बहराइच से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया था। बाद में उनके राजनीतिक दल बदलने और जांच से जुड़े मामलों के कारण उनका नाम लगातार चर्चा में रहा।
भाई के खिलाफ भी विजिलेंस की कार्रवाई
इस मामले में अगस्त 2026 में मुकेश श्रीवास्तव के भाई अजय श्रीवास्तव भी विजिलेंस की कार्रवाई के घेरे में आए। रिपोर्ट के अनुसार, अजय श्रीवास्तव बलरामपुर CMO कार्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात रहे थे। विजिलेंस की जांच में उनके पास करीब 28 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा सामने आया, जिसमें लखनऊ में छह मंजिला होटल, कई प्लॉट और फार्म हाउस जैसी संपत्तियां शामिल बताई गईं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच में उनकी संपत्ति उनकी आय से लगभग 763 गुना अधिक बताई गई और लखनऊ, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच तथा श्रावस्ती में कार्रवाई की गई।
अब आगे क्या होगा?
अब ED द्वारा UPMSCL से रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद जांच का अगला फोकस संबंधित कंपनियों, सरकारी सप्लाई और वित्तीय लेनदेन के दस्तावेजों पर रहने की संभावना है। एजेंसी इन रिकॉर्ड को पहले से उपलब्ध जांच सामग्री और अन्य मामलों से जोड़कर देख सकती है।फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है। ED या विजिलेंस की जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम अपराध सिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में आगे जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।



