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यूपी में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार, 1,500 स्थानों का लक्ष्य; 240 जगहें चिह्नित

प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश में 1,500 स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य है। 240 स्थान चिह्नित और 238 स्थानों पर काम आगे बढ़ा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की योजना पर काम तेज किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत यूपी रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (यूपीआरईवी) की ओर से राज्य में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। योजना के मौजूदा चरण में 20 समूहों में 238 स्थान स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 139 स्थानों के एमओयू अभी लंबित हैं। इसके साथ ही योजना के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश के लिए कुल 1,500 स्थानों का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित चार्जिंग नेटवर्क में एनसीआर और गैर-एनसीआर क्षेत्रों के कई जिले शामिल हैं। एनसीआर क्षेत्र में गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 39, गाजियाबाद के 6 और मेरठ के 35 स्थान शामिल हैं। वहीं गैर-एनसीआर क्षेत्र में आगरा के 21, प्रयागराज के 13, गोरखपुर के 32, कानपुर के 12, कानपुर देहात के 2, लखनऊ के 36, मथुरा के 14 और वाराणसी के 28 स्थान प्रस्तावित हैं। कुल 238 स्वीकृत स्थानों में से 99 स्थानों पर एमओयू निष्पादित हो चुके हैं।

पीएम ई-ड्राइव के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के दूसरे चरण में एनसीआर के आठ जिलों और माल परिवहन गलियारे को ध्यान में रखते हुए राज्य में 1,500 स्थानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस नेटवर्क के लिए केवल एक विभाग या संस्था के परिसरों पर निर्भर रहने के बजाय नगर निगमों, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, परिवहन विभाग, विद्युत वितरण कंपनियों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, पर्यटन, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, गन्ना संस्थान और मंडी समितियों सहित विभिन्न विभागों के स्थानों को शामिल किया जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार दूसरे चरण के लिए अब तक 240 स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 1,260 स्थानों की पहचान की जानी बाकी है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को प्रमुख शहरों के साथ-साथ अन्य सार्वजनिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी चार्जिंग सुविधा मिल सके।

नगर निगम क्षेत्रों में 129 स्थान चिह्नित

दूसरे चरण के तहत प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में कुल 129 स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें अलीगढ़ के 22, अयोध्या के 13, बरेली के 16, फिरोजाबाद के 15, झांसी के 16, मुरादाबाद के 7, सहारनपुर के 5, शाहजहांपुर के 10, आगरा के 8, कानपुर नगर के 11, मेरठ के 5 और कानपुर देहात का एक स्थान शामिल है।

इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के लिए 74, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए 10 और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 26 स्थानों की पहचान की गई है। इस तरह प्रस्तावित नेटवर्क में शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ परिवहन और औद्योगिक ढांचे से जुड़े स्थानों को भी शामिल किया जा रहा है।

अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचेगा नेटवर्क

प्रस्तावित चार्जिंग नेटवर्क को सार्वजनिक उपयोग के अलग-अलग प्रमुख स्थानों तक विस्तारित करने की योजना है। इसके तहत मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, औद्योगिक क्षेत्र, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक पार्क, विश्वविद्यालय, गन्ना संस्थान केंद्र, मंडी समितियां और जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन तथा तहसील कार्यालय जैसे स्थान भी चिन्हित किए जा रहे हैं।

प्रस्तावित सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में 60 किलोवाट क्षमता के दो डीसी चार्जर और 12 किलोवाट क्षमता के एक एसी/डीसी चार्जर की व्यवस्था का प्रावधान बताया गया है। योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक चार्जिंग का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में सुलभ और व्यापक सुविधा उपलब्ध करा सके।

जिलाधिकारियों को उपयुक्त स्थानों का जल्द चिन्हीकरण करने के निर्देश

हाल ही में मुख्य सचिव की बैठक में एनसीआर और गैर-एनसीआर क्षेत्रों में चिन्हित 238 लोकेशन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि इनमें से 99 स्थानों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जबकि 139 स्थानों के एमओयू अभी शेष हैं।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन के लिए उपयुक्त स्थानों का चिन्हीकरण कर संबंधित विभाग को प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। इसके लिए सार्वजनिक स्थल, बड़े कार्यालय, बस स्टेशन, इंडस्ट्रियल पार्क, शिक्षण संस्थान, मॉल, ढाबे और पार्किंग स्थल समेत अन्य उपयुक्त स्थानों को शामिल करने को कहा गया है। निर्देशों का उद्देश्य चार्जिंग अवसंरचना के विकास की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।

राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा की जरूरत भी बढ़ रही है। प्रस्तावित 1,500 स्थानों का नेटवर्क इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर विकसित किया जाना है, जिसमें सरकारी कार्यालयों से लेकर परिवहन केंद्रों, औद्योगिक क्षेत्रों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों तक अलग-अलग श्रेणी के स्थानों को शामिल किया जा रहा है।

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