अखिलेश यादव के नकल और नौकरी के आरोपों पर योगी सरकार का पलटवार, मंत्रियों ने सपा शासन पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव के शिक्षा और नौकरी से जुड़े आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों कपिल देव अग्रवाल और हंसराज विश्वकर्मा ने पलटवार किया। दोनों ने सपा शासन में नकल और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए।

‘नौकरियों का रेट तय करने वाले आज नकल पर ज्ञान दे रहे हैं’, अखिलेश यादव के आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों का पलटवार
कपिल देव अग्रवाल और हंसराज विश्वकर्मा ने सपा शासन की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा- पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दें
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नौकरियों को लेकर लगाए गए आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों ने पलटवार किया है। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल और राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने सपा शासनकाल की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए। मंत्रियों ने कहा कि जिस समय सपा की सरकार थी, उस दौरान परीक्षाओं में नकल और सरकारी नौकरियों में सिफारिश तथा कथित सौदेबाजी को लेकर सवाल उठते थे, जबकि मौजूदा सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा कर रही है।
कपिल देव अग्रवाल बोले- पहले सपा शासन का इतिहास देखें
कपिल देव अग्रवाल ने अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस समाजवादी पार्टी के शासनकाल में नकल और सरकारी नौकरियों को लेकर लगातार सवाल उठते थे, उसके नेता का मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान परीक्षाओं में सामूहिक नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के मामले सामने आते थे। उन्होंने सरकारी नौकरियों में जातिगत पक्षपात और सिफारिश के आरोपों का भी उल्लेख किया।
मंत्री के मुताबिक, उस दौर में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं और उनके परिवारों के सामने सिफारिश और कथित सौदेबाजी जैसी समस्याएं थीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सपा सरकार के कार्यकाल की व्यवस्था को देख चुकी है और आज की युवा पीढ़ी भी उस दौर से जुड़े राजनीतिक दावों और आरोपों को समझ रही है।
9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों का दावा
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि नियुक्तियों में जाति या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया गया और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी रखा गया। पुलिस और पीएसी भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बेटियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है।
9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों का आंकड़ा इससे पहले भी राज्य सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री की ओर से सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल किया गया है। सितंबर में रोजगार को लेकर जारी राजनीतिक बहस में अखिलेश यादव ने इन सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए उन्हें गलत बताया था।
हंसराज विश्वकर्मा ने भी सपा शासन पर साधा निशाना
राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव को भाजपा सरकार पर सवाल उठाने से पहले समाजवादी पार्टी के शासनकाल का आकलन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर नकल होती थी। साथ ही उन्होंने सरकारी नौकरियों में सिफारिश और राजनीतिक पहुंच के प्रभाव का आरोप लगाया।
विश्वकर्मा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने भर्ती आयोगों के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, अभ्यर्थी अब बिना भय के प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं और नकल पर रोक लगाने के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं।
हंसराज विश्वकर्मा उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी हैं और परिषद की आधिकारिक सदस्य सूची में उनका नाम भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में दर्ज है।
रोजगार के आंकड़ों पर पहले से चल रही राजनीतिक बहस
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी नौकरियां और रोजगार राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। अखिलेश यादव ने सितंबर में राज्य सरकार द्वारा बताए जा रहे सरकारी नौकरी के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सरकार विज्ञापनों में रोजगार के आंकड़े पेश कर रही है। इसके जवाब में सत्तापक्ष की ओर से 9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने का दावा दोहराया गया।
राज्य के आधिकारिक रोजगार पोर्टल ‘रोजगार संगम’ पर सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों, रोजगार मेलों, कैंपस प्लेसमेंट और अप्रेंटिसशिप से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं। पोर्टल पर सरकारी मिशन रोजगार से जुड़े शासनादेश और रोजगार संबंधी विभिन्न सेवाओं की जानकारी भी दी गई है।
विकास और सामाजिक योजनाओं का भी किया उल्लेख
हंसराज विश्वकर्मा ने शिक्षा और नौकरी के मुद्दे के साथ योगी सरकार की ओर से किए गए अन्य कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा बहुओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पीआरडी जवानों, होमगार्ड और पुलिसकर्मियों समेत विभिन्न वर्गों के लिए किए गए कार्यों को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा। उन्होंने विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।
मंत्रियों ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर भू-माफिया, शिक्षा माफिया और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया है।
इस पूरे विवाद में एक तरफ अखिलेश यादव सरकार के रोजगार और शिक्षा से जुड़े दावों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर योगी सरकार के मंत्री सपा शासनकाल की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को लेकर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में रोजगार, भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में बने रहने की संभावना है।



