उत्तर प्रदेशप्रदेश

महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक समता से हिंदू समाज को किया एकजुट: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखनाथ मंदिर में महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक समता, शिक्षा और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।

गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदू समाज की ताकत उसकी जीवंतता में है और उसमें अपनी विसंगतियों एवं विकृतियों के परिमार्जन की क्षमता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज की एकता के लिए हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे, जबकि राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक समता के आधार पर बिखरी हिंदू शक्ति को एकजुट करने के लिए जीवनभर प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहभोज जैसी पहल इसी सामाजिक समरसता के अभियान का हिस्सा थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत ‘राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पावन पुण्यतिथि’ विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों संतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक, शैक्षिक और धार्मिक योगदान को याद किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन में महंत अवेद्यनाथ की भूमिका का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में रामलला का प्रकटीकरण हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सानिध्य में विश्व हिंदू परिषद द्वारा राष्ट्रीय राम जन्मभूमि मुक्ति समिति के गठन के बाद महंत अवेद्यनाथ ने उसका नेतृत्व संभाला। मुख्यमंत्री के अनुसार, महंत अवेद्यनाथ ने संतों को साथ लेकर राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

उन्होंने इसे गुरु-शिष्य परंपरा और विचारों के निरंतर विस्तार से जोड़ते हुए कहा कि समय, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता के अनुरूप विचारों को आगे बढ़ाकर उन्हें लोकोपयोगी बनाना महापुरुषों की विशेषता होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ इसी चिंतन और परंपरा को आगे बढ़ाती रहेगी।

शिक्षा को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारतीयता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों की स्थापना के पक्षधर थे, जबकि महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा के विस्तार के साथ उसे स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, महंत अवेद्यनाथ बालिकाओं की शिक्षा के साथ उन्हें सिलाई-कढ़ाई जैसे कौशल उपलब्ध कराने को लेकर भी चिंतित रहते थे। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1977 में प्रताप आश्रम और बाद में अन्य छात्रावासों की स्थापना भी की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के इन प्रयासों का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं था, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज के व्यापक विकास से जोड़ना भी था।

सात दिनों तक कथा के साथ हुआ वैचारिक मंथन

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 23 से 29 सितंबर तक श्री गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान-यज्ञ का आयोजन हुआ। इसके साथ ही देश, समाज और समय से जुड़े समसामयिक विषयों पर वैचारिक संगोष्ठियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से संतों और विद्वानों ने भाग लिया।

उन्होंने कहा कि जीवन में स्थिरता सिद्धि का महत्वपूर्ण मंत्र है। जिन महापुरुषों की पूजा और गुणगान किया जाता है, उनके विचारों और गुणों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास भी किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, महापुरुषों की स्मृति तभी सार्थक होगी जब उनके जीवन से जुड़े आदर्श व्यवहार और सामाजिक जीवन में दिखाई दें।

महंत बालकनाथ ने योगी को फिर मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही

राजस्थान के विधायक एवं संत महंत बालकनाथ ने कार्यक्रम में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों संतों ने नाथ संप्रदाय और गोरक्षपीठ की पहचान को देशभर में स्थापित किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

महंत बालकनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के लोग योगी आदित्यनाथ को फिर मुख्यमंत्री बनाएंगे। यह उनके द्वारा कार्यक्रम में व्यक्त किया गया राजनीतिक मत था।

गौरतलब है कि 2024 के इसी पुण्यतिथि समारोह के दौरान भी महंत बालकनाथ और अन्य संतों की ओर से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा तथा उनके भविष्य में देश का नेतृत्व करने की इच्छा संबंधी वक्तव्य रिपोर्ट किए गए थे।

रामकमलाचार्य ने काशी-मथुरा को लेकर जताई आकांक्षा

जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने महंत अवेद्यनाथ के राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों का परिणाम अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के रूप में सामने आया है।

डॉ. रामकमलाचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी और मथुरा से जुड़ी हिंदू समाज की आकांक्षाओं के साकार होने की उम्मीद जताई। उन्होंने अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने और आगे देश की बागडोर संभालने की भी उम्मीद व्यक्त की। यह वक्तव्य कार्यक्रम में उनके द्वारा व्यक्त राजनीतिक/व्यक्तिगत मत के रूप में सामने आया।

गोरक्षपीठ ने सनातन विचार को मजबूत किया: विजय दुबे

कुशीनगर के सांसद विजय दुबे ने कहा कि जब-जब सनातन समाज को बांटकर सत्ता प्राप्त करने के प्रयास हुए, तब-तब गोरक्षपीठ ने सनातन विचारधारा को मजबूत करने का काम किया। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा के फलीभूत होने से जोड़ा।

उनके अनुसार, महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने धार्मिक एवं सामाजिक चेतना के साथ शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा और सामाजिक एकता को लेकर दोनों संतों के योगदान का उल्लेख

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह ने कहा कि दोनों ब्रह्मलीन संतों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से पूर्वांचल में शिक्षा के विस्तार का कार्य किया और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि संतों का प्रभाव केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। उनके अनुसार, महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और कर्तव्यबोध का आधार बनाया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के प्रांत संघचालक महेंद्र अग्रवाल ने दोनों संतों के जीवन को लोककल्याण से जुड़ा बताया और गोरक्षपीठ तथा संघ के विचारों में सामंजस्य का उल्लेख किया। महापौर मंगलेश श्रीवास्तव ने शिक्षा के क्षेत्र में दोनों संतों के योगदान को अनुकरणीय बताया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बाबू रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘जटायु’ का विमोचन

कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। मृत्युंजय उपाध्याय और गौरव तिवारी ने गोरक्ष अष्टक की प्रस्तुति दी, जबकि डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने महंत अवेद्यनाथ स्तोत्र प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बाबू रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘जटायु’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में संतों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की।

संतों और जनप्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल देवाचार्य, संतोषाचार्य सतुआ बाबा, महंत बालकनाथ, महंत चेताईनाथ, महंत बलबीर गिरि, स्वामी विद्याचैतन्य, महंत राजूदास, महंत योगी लालनाथ, महंत पीर शेरनाथ, महंत धर्मदास, महंत रामबालक दास, महंत रामलखन दास, महंत बलराम दास, महंत रवींद्र दास और महंत मिथिलेशनाथ मौजूद रहे।

इसके अलावा जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पूर्व मंत्री एवं एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, सांसद विजय दुबे समेत विभिन्न जनप्रतिनिधि, संत, शिक्षाविद और संगठनों के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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