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यूपी बजट खर्च पर योगी आदित्यनाथ सख्त, दो महीने में 60% खर्च और 70% स्वीकृतियों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट खर्च की रफ्तार तेज करने के निर्देश दिए हैं। अगले दो माह में 70% वित्तीय स्वीकृतियां और कुल बजट का कम से कम 60% व्यय सुनिश्चित करने को कहा।

यूपी बजट खर्च पर योगी आदित्यनाथ सख्त, दो महीने में 60% खर्च और 70% स्वीकृतियों का लक्ष्य

लखनऊ, 27 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्राविधानों के अनुरूप धनराशि जारी करने और विकास कार्यों पर खर्च की गति बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। रविवार शाम हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त होने जा रही है, इसलिए जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने अगले दो माह में कम से कम 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया है।

बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों की वित्तीय प्रगति और स्वीकृतियों की स्थिति की बिंदुवार समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट केवल धनराशि आवंटित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका समयबद्ध और प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक बजट दस्तावेज में वित्तीय वर्ष 2026-27 के मूल बजट का आकार ₹9,12,696.35 करोड़ दर्ज है; सितंबर की समकालीन रिपोर्टिंग में वर्तमान बजट आकार करीब ₹9.99 लाख करोड़ बताया गया है।

₹5.15 लाख करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी

समीक्षा बैठक में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के वर्तमान बजट का आकार ₹9,99,056.48 करोड़ बताया गया। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ₹1,58,474.15 करोड़ अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए ₹5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है।

अब तक शासन स्तर से ₹5,15,918.44 करोड़, यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित ₹2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष अब तक प्रदेश में ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने विभागों को निर्देश दिया कि शेष अवधि में स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय दोनों की गति को बढ़ाया जाए, ताकि बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विभागों में स्वीकृतियां जारी करने अथवा धनराशि खर्च करने में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी अड़चनें सामने आ रही हैं, उन्हें लंबित न रखा जाए। ऐसी समस्याओं का तत्काल समाधान कराया जाए और वित्त विभाग नियमित रूप से इसकी निगरानी करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराए।

वित्त मंत्री विभागीय मंत्रियों के साथ करेंगे बजट की समीक्षा

योगी आदित्यनाथ ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को निर्देश दिया कि विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट प्राविधानों और खर्च की नियमित समीक्षा की जाए। समीक्षा केवल कुल खर्च के आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि विभागवार और योजनावार यह देखा जाए कि धनराशि कहां स्वीकृत हुई, कितना पैसा जारी हुआ और वास्तविक स्तर पर कितना व्यय हुआ।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा न हो कि धनराशि केवल बजट में प्राविधानित रह जाए और समय पर उसका उपयोग न हो सके। विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने देने की बात कहते हुए उन्होंने उपलब्ध बजट के पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग की जिम्मेदारी विभागों पर तय की।

इन प्रमुख विभागों की वित्तीय स्थिति

बैठक में अलग-अलग विभागों की वित्तीय स्वीकृतियों और व्यय की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया है।

ऊर्जा विभाग के लिए ₹73,348.56 करोड़ का बजट है, जिसके सापेक्ष ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के ₹82,245.68 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹65,982.04 करोड़ यानी 80.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हुई हैं और ₹31,718.92 करोड़ का व्यय दर्ज किया गया है।

गृह विभाग के ₹43,891.37 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़ यानी 92.2 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं और ₹14,712.68 करोड़ खर्च हुआ है। लोक निर्माण विभाग में ₹45,270.69 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹27,375.91 करोड़ यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हुई हैं और ₹14,178.60 करोड़ का व्यय हुआ है।

इसी तरह चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़ यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹10,286.50 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।

किसानों को केसीसी से जोड़ने के लिए गांववार मैपिंग

मुख्यमंत्री ने बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराने के निर्देश दिए गए, ताकि ऐसे किसानों की पहचान की जा सके जो पात्र होने के बावजूद बैंकिंग सुविधाओं और संस्थागत ऋण से नहीं जुड़े हैं।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। इसके लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में किसानों और अन्य पात्र लाभार्थियों तक बैंकिंग एवं ऋण सुविधाओं की पहुंच को बेहतर बनाना है।

मुख्यमंत्री ने बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अधिकारियों से कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमा धन और ऋण वितरण के बीच संतुलन बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लिए केंद्रीय मंत्रियों से समन्वय

केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागों को केंद्रीय सहायता से जुड़ी धनराशि और स्वीकृतियों के मामलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए।

मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्रियों से कहा कि वे संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं। उनका कहना है कि केंद्र से मिलने वाली सहायता में देरी के कारण राज्य में संचालित योजनाओं की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग पर एमएसएमई विभाग को जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और शिल्प को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग को प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की अपनी विशिष्ट पहचान है और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाना चाहिए। ब्रांडिंग, प्रचार और बाजार उपलब्धता के माध्यम से जीआई उत्पादों को अधिक व्यापक उपभोक्ता आधार तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता नहीं

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी परियोजना के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी होती है या निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में जाकर विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराया जाए और वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने में सरकार की ओर से कमी नहीं रहने दी जाएगी, लेकिन आवंटित बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट पर मुख्यमंत्री की सितंबर 2026 की विभिन्न समीक्षा एवं विकास संबंधी गतिविधियां भी प्रकाशित हैं।

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