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यूपी के मदिरा निर्यात में नया रिकॉर्ड, जुलाई में 89.7% बढ़ा निर्यात, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज रफ्तार

उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा का निर्यात जुलाई 2026 में 89.7 प्रतिशत बढ़कर 55.2 लाख डॉलर पहुंचा। राष्ट्रीय औसत 25.7 प्रतिशत रहा। चार माह में यूपी ने 183 लाख डॉलर का निर्यात किया।

यूपी के निर्यात में नया रिकॉर्ड, राष्ट्रीय औसत से साढ़े तीन गुना तेज बढ़ी रफ्तार; जुलाई में 89.7% बढ़ा मदिरा निर्यात

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) के परिणाम उत्तर प्रदेश के मदिरा निर्यात के आंकड़ों में दिखाई देने लगे हैं। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश से बोतलबंद मदिरा का निर्यात बढ़कर 55.2 लाख अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष जुलाई में यह आंकड़ा 29.1 लाख डॉलर था। इस तरह जुलाई में प्रदेश के बोतलबंद मदिरा निर्यात में 89.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में देश का समग्र निर्यात 25.7 प्रतिशत बढ़ा। जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में उत्तर प्रदेश की निर्यात वृद्धि राष्ट्रीय वृद्धि की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना रही।

राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 8.3% से बढ़कर 12.5%

जुलाई 2026 में राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की मासिक हिस्सेदारी भी बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गई। इस वृद्धि के साथ उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के मदिरा निर्यात में वृद्धि केवल मूल्य के स्तर पर ही नहीं बल्कि निर्यात की मात्रा और बाजार विस्तार के स्तर पर भी दर्ज की गई है।

प्रदेश के निर्यात प्रदर्शन में व्हिस्की और वोदका की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जुलाई में व्हिस्की के निर्यात में 78.8 प्रतिशत, जबकि वोदका के निर्यात में 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मात्रा के लिहाज से उत्तर प्रदेश का निर्यात 230 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मात्रा में वृद्धि 90 प्रतिशत रही। इससे प्रदेश के निर्यात बाजार में विस्तार और उत्पादों की विदेशी मांग में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।

चार महीने में 183 लाख डॉलर का निर्यात

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख अमेरिकी डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार महीने की अवधि में प्रदेश के निर्यात में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। इस दौरान उत्तर प्रदेश ने 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की।

राष्ट्रीय निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी भी इस अवधि में 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात से जुड़ी लाइनें 29 से बढ़कर 39 हो गईं, जबकि संचालित बंदरगाहों की संख्या भी सात से बढ़कर 10 हो गई है। यह बदलाव प्रदेश के निर्यात नेटवर्क के विस्तार को दर्शाता है।

नई औद्योगिक इकाइयों से निवेश और किसानों को लाभ

नीति के सकारात्मक प्रभाव से प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और बंद संयंत्रों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। वहीं वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है। एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को फिर से सक्रिय किया है। गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है।

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि नीति का प्रभाव किसानों से जुड़े क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। उनके अनुसार ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। नीति में यह प्राविधान भी किया गया है कि जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति के तहत मिलने वाली छूट नहीं दी जाएगी।

कांच, पैकेजिंग और परिवहन क्षेत्र में भी बढ़े अवसर

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह के अनुसार जुलाई में देशभर में बोतलबंद मदिरा के निर्यात में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में इसी अवधि में 55.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बोतलबंद निर्यात में प्रदेश की राष्ट्रीय हिस्सेदारी भी 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई।

निर्यात में वृद्धि का असर केवल आसवनी उद्योग तक सीमित नहीं रहने की बात कही गई है। इससे गन्ना, शीरा और अनाज जैसी कच्ची सामग्री से जुड़े क्षेत्रों के साथ-साथ कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे सहायक क्षेत्रों में भी कारोबार के अवसर बढ़ने की संभावना है। इसी क्रम में बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात भी पूरा हुआ, जिससे पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण यह राशि ऊपर बताए गए निर्यात आंकड़ों के अतिरिक्त है।

राष्ट्रीय स्तर पर यूपी की निर्यात नीति का उल्लेख

उत्तर प्रदेश की आबकारी निर्यात नीति के अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स विभिन्न राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा समेत विभिन्न राज्यों के आबकारी विभागों की भागीदारी है।

टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना किए जाने और इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचे के रूप में प्रस्तुत किए जाने की जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय आदर्श नीति तैयार करते समय उत्तर प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस तरह प्रदेश की आबकारी निर्यात नीति के तहत सामने आए अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की दिशा में भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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