सांसद बृजलाल का अखिलेश यादव पर हमला, बोले- चुनाव आते ही याद आता है सनातन धर्म
राज्यसभा सांसद एवं पूर्व डीजीपी बृजलाल ने अखिलेश यादव पर धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाए। आतंकी मामलों और अयोध्या-मथुरा को लेकर भी सवाल उठाए।

लखनऊ। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह चुनाव के समय मंदिर, तिलक और सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों की बात करते हैं, जबकि अन्य समय उनकी राजनीति तुष्टिकरण पर केंद्रित रहती है। बृजलाल ने सपा सरकारों के कार्यकाल के कुछ पुराने फैसलों, आतंकवाद से जुड़े मामलों और अखिलेश यादव की धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए उनकी राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म चुनाव के समय अपनाई जाने वाली वेशभूषा नहीं, बल्कि आस्था का विषय है। उनके ये बयान अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की राजनीति को लेकर उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक आलोचना के तौर पर देखे जाने चाहिए।
आतंकवाद से जुड़े मुकदमों की वापसी को लेकर लगाए आरोप
बृजलाल ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद आतंकवाद से जुड़े 14 मुकदमे वापस लेने की पहल की थी। उन्होंने दावा किया कि इनमें रामपुर स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमले से जुड़े आरोपियों के मामले भी शामिल थे। बृजलाल ने 7 मार्च 2006 को वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हुए बम विस्फोट का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना में 20 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की कोशिश की गई और अब अखिलेश यादव धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से अपनी छवि प्रस्तुत कर रहे हैं।
हालांकि, मुकदमों की वापसी से जुड़े इन आरोपों और संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति का आकलन करने के लिए न्यायालय के आदेशों तथा आधिकारिक अभिलेखों की अलग से पुष्टि आवश्यक है। बृजलाल के बयान में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
वाराणसी के अन्य विस्फोटों और संभल दंगों का भी किया उल्लेख
राज्यसभा सांसद ने वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर 23 फरवरी 2005 को हुए विस्फोट और 7 दिसंबर 2010 को शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान हुए बम धमाके का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में भी मुकदमे वापस लेने की कार्रवाई की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का जिक्र करते हुए 1978 के संभल दंगों से जुड़े मामलों की चार्जशीट वापस लेने का आरोप लगाया।
बृजलाल ने इन घटनाओं और कथित फैसलों को समाजवादी पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाने के लिए आधार बनाया। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के न्यायिक रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।
अयोध्या और मथुरा में दर्शन को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना
बृजलाल ने अखिलेश यादव की धार्मिक गतिविधियों और सार्वजनिक बयानों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि वह चुनाव के समय हनुमान जी की पूजा और धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल क्यों करते हैं। उन्होंने नवंबर 2003 में अयोध्या की हनुमानगढ़ी के निकट रोजा-इफ्तार और नमाज के आयोजन का हवाला देते हुए तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने अखिलेश यादव के वीडियो में भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से जुड़ी छवि का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अयोध्या में प्रभु श्रीराम और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करने क्यों नहीं जाते। बृजलाल ने इस आधार पर अखिलेश यादव की धार्मिक अभिव्यक्ति और राजनीतिक संदेश पर सवाल खड़े किए। यह टिप्पणी उनके राजनीतिक आरोपों का हिस्सा है; इससे किसी व्यक्ति की निजी धार्मिक आस्था के बारे में स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
सनातन धर्म को चुनावी वेशभूषा बताने पर जताई आपत्ति
बृजलाल ने मथुरा के केशवदेव मंदिर और शाही ईदगाह से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जनवरी 1670 में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मंदिर को ध्वस्त कराया गया था और बाद में वहां शाही ईदगाह का निर्माण हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी के डर से श्रीकृष्ण जन्मभूमि जाने से बचते हैं। इस दावे और ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़े विवरणों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय ऐतिहासिक अभिलेखों तथा संबंधित न्यायिक दस्तावेजों का संदर्भ आवश्यक है।
बृजलाल ने कहा कि सनातन धर्म चुनावी वेशभूषा नहीं, बल्कि आस्था का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की जनता तुष्टिकरण की राजनीति देख चुकी है और अब नेताओं के धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल के बजाय उनके काम तथा वास्तविक राजनीतिक रुख को देखेगी। उनका कहना था कि अखिलेश यादव की राजनीति को लेकर जनता अपना फैसला करेगी।



