यूपी की जर्जर जल संरचनाओं को मिला नया जीवन, बैराज-बांधों के गेट बदले; 70 फीट गहराई में बदले गेट
योगी सरकार में यूपी के प्रमुख बैराज, बांध और रेगुलेटरों के पुराने गेट बदले जा रहे हैं। 60 से 70 फीट गहरे पानी में गेट बदलने के साथ स्पेयर गेट भी तैयार किए गए।

इस अवधि में कई प्रमुख जल संरचनाओं के गेट बदले गए हैं, जबकि संभावित आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए कई स्थानों पर अतिरिक्त स्पेयर गेट भी तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। विभाग के अनुसार, कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में पानी के भीतर 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित गेटों का प्रतिस्थापन आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की सहायता से किया गया है।
गोमती बैराज के सभी 10 गेट बदले, नरौरा के 13 गेटों का काम पूरा
प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि लंबे समय से उपयोग में आने के कारण प्रदेश की कई महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के गेट समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है, ताकि जल संरचनाओं के संचालन में बाधा न आए और सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

विभाग के अनुसार, पीलीभीत स्थित चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी चार गेट बदले जा चुके हैं। बुलंदशहर स्थित नरौरा बैराज के कुल 61 गेटों में से 13 गेटों का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है, जबकि शेष 48 गेटों के निर्माण और प्रतिस्थापन का कार्य जारी है। वहीं लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट बदले जा चुके हैं।
इसी क्रम में एटा स्थित तातारपुर एलजीसी एवं पीएलजीसी कनेक्टिंग रेगुलेटर तथा हेड रेगुलेटर के कुल 20 गेटों का प्रतिस्थापन भी पूरा हो चुका है। प्रमुख सचिव के मुताबिक, इन कार्यों के जरिए पुरानी जल संरचनाओं की कार्यक्षमता को बनाए रखने और उनके सुरक्षित संचालन की दिशा में काम किया जा रहा है।
ओखला और भीमगौड़ा बैराज में भी पुराने गेट बदले गए
प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले जा चुके हैं। आपात स्थिति के लिए वहां तीन स्पेयर गेट भी तैयार रखे गए हैं। इसी तरह भीमगौड़ा बैराज, हरिद्वार के 22 में से आठ खराब गेट बदले गए हैं।
इन गेटों का निर्माण विभाग की आईएसओ प्रमाणित कार्यशालाओं, बरेली और झांसी में किया गया है। विभाग के अनुसार, रामपुर स्थित कैनरी बैराज के 15 में से नौ गेट बदले जा चुके हैं, जबकि गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी आठ गेट बदल दिए गए हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख जल संरचनाओं में भी पुराने गेटों के प्रतिस्थापन का काम किया गया है।
विभाग की ओर से कई बांधों और बैराजों के लिए अतिरिक्त स्पेयर गेट भी सुरक्षित रखे गए हैं। इसका उद्देश्य किसी गेट में अचानक खराबी आने की स्थिति में तत्काल प्रतिस्थापन की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि सिंचाई और जल प्रबंधन व्यवस्था लंबे समय तक बाधित न हो।
60 से 70 फीट गहरे पानी में गेट बदलना बड़ी तकनीकी चुनौती
जल संरचनाओं के आधुनिकीकरण के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण काम पानी के भीतर स्थित गेटों का प्रतिस्थापन रहा। विभाग के अनुसार, प्रदेश में पहली बार अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से पानी के भीतर स्थित गेटों को सफलतापूर्वक बदला गया है।
ललितपुर स्थित माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों का पानी के भीतर प्रतिस्थापन किया गया। कचनौदा बांध में करीब 60 फीट की गहराई पर स्थित दो अंडर-स्लूइस गेटों का प्रतिस्थापन पूरा किया गया है। यहां एक स्पेयर गेट भी सुरक्षित रखा गया है।
विभाग के मुताबिक, हमीरपुर के मौदहा, महोबा के लहचूरा, बिजनौर के खो बैराज, बहराइच के घाघरा बैराज और लखीमपुर खीरी के शारदा बैराज जैसी महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के लिए भी स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं। इसका उद्देश्य आकस्मिक स्थिति में गेट बदलने की प्रक्रिया को तेज करना और किसानों को मिलने वाली सिंचाई जल की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना है।
आपदा से पहले तैयारी पर जोर, स्पेयर गेट रखे गए सुरक्षित
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार का जोर केवल जल संरचनाओं के निर्माण या पुराने गेटों को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी पर भी है। प्रमुख बैराजों के लिए स्पेयर गेट सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि किसी गेट में अचानक खराबी आने पर बिना समय गंवाए उसे बदला जा सके।
उनके अनुसार, इससे संभावित जन-धन की क्षति को रोकने और जल प्रबंधन व्यवस्था को लगातार बनाए रखने में मदद मिलेगी। स्पेयर गेटों की उपलब्धता को विशेष रूप से उन जल संरचनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां गेट की खराबी का सीधा असर सिंचाई व्यवस्था या जल नियंत्रण पर पड़ सकता है।
चंद्रप्रभा बांध में 80 फीट गहराई पर रिसाव रोकने की कवायद
चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में करीब 80 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों से रिसाव की समस्या सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। विभाग के अनुसार, रिसाव के कारण सिंचाई योग्य पानी की लगातार बर्बादी हो रही थी और आसपास के किसानों में चिंता थी।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को रिसाव तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए। इसके लिए विशेषज्ञ गोताखोरों और आधुनिक तकनीक की मदद से पानी के भीतर मौजूद रिसाव को स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। साथ ही कार्य की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने और समयबद्ध तरीके से रिसाव पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खरीफ और आगामी फसलों के लिए नहरों में पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सके।
जल संरचनाओं के गेटों के प्रतिस्थापन, स्पेयर गेटों की उपलब्धता और पानी के भीतर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए जा रहे तकनीकी कार्यों के जरिए विभाग सिंचाई व्यवस्था के साथ-साथ बाढ़ और आपदा प्रबंधन से जुड़ी संरचनाओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सरकार और विभाग की ओर से इन कार्यों का प्रमुख उद्देश्य सिंचाई जल की उपलब्धता बनाए रखने और महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करना बताया गया है।



