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गांधी जयंती 2026: चरखा स्वावलंबन का आधार, ODOP स्वदेशी भाव से लोकल को ग्लोबल बना रहा- मुख्यमंत्री योगी

गांधी जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चरखे को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। कहा- ODOP बापू के स्वदेशी भाव से स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल बाजार तक पहुंचाने का अभियान है।

लखनऊ। महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वदेशी, स्वावलंबन, स्वच्छता और ग्राम स्वराज के विचारों को वर्तमान भारत के विकास से जोड़ते हुए कहा कि बापू का चरखा केवल सूत कातने का साधन नहीं था, बल्कि भारत के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का आधार था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना उसी स्वदेशी भावना को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की शुरुआत व्यक्ति, परिवार और गांव को स्वावलंबी बनाने से होती है।

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बापू के प्रिय भजनों का श्रवण किया और चरखा चलाकर स्वदेशी एवं स्वावलंबन के संदेश को स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता से स्वदेशी, स्वदेशी से स्वावलंबन और स्वावलंबन से ग्राम स्वराज तक गांधीजी के विचार आज भी देश के लिए प्रासंगिक हैं।

गांधी आश्रम के वस्त्र आजादी और स्वदेशी के प्रतीक: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में गांधी आश्रम के वस्त्रों से जुड़ी बचपन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि बचपन में गांधी आश्रम के कपड़ों को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता रहती थी। उनके अनुसार ये वस्त्र केवल पहनने के लिए कपड़े नहीं थे, बल्कि भारत की आजादी और स्वदेशी के मंत्र के प्रतीक भी थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने चरखे को स्वावलंबन के संदेश से जोड़ा। चरखा केवल सूत कातने का साधन नहीं रहा, बल्कि उसने अपने श्रम, अपने उत्पाद और अपनी सामर्थ्य पर भरोसा करके आगे बढ़ने की भावना को प्रतीकात्मक रूप दिया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के लिए स्वदेशी का अर्थ केवल किसी वस्तु का उपयोग करना नहीं था, बल्कि देश और समाज को अपने संसाधनों तथा श्रम के आधार पर मजबूत बनाना भी था।

ODOP के जरिए ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की एक जनपद-एक उत्पाद योजना बापू के स्वदेशी भाव को आधुनिक आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है। योजना के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल से ग्लोबल’ और आत्मनिर्भर भारत के विचार से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने से कारीगरों, शिल्पकारों, बुनकरों और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है और इसकी शुरुआत स्वदेशी तथा स्वावलंबन की भावना से होती है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ODOP पहल के तहत जिलावार विशिष्ट उत्पादों को पहचान, ब्रांडिंग, बाजार और निर्यात से जोड़ने पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ODOP को स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

दक्षिण अफ्रीका में अन्याय और रंगभेद के खिलाफ उठाई आवाज

मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के पोरबंदर में जन्मे गांधीजी ने उच्च शिक्षा के बाद दक्षिण अफ्रीका में वकालत शुरू की। वहां उन्होंने अन्याय, शोषण और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाई तथा भारतीय मूल के लोगों को संगठित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका का संघर्ष आगे चलकर भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनके नेतृत्व की आधारभूमि बना। भारत लौटने के बाद गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से नेतृत्व दिया और व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में भूमिका निभाई।

गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को बनाया व्यापक जन आंदोलन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व गांधीजी के हाथों में आया, तब उन्होंने इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया। उनके अनुसार उस समय समाज के एक हिस्से में यह निराशा थी कि भारत कब और कैसे स्वतंत्र होगा, लेकिन गांधीजी के नेतृत्व ने आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। गांवों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ी और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े। उन्होंने गांधीजी के नेतृत्व की इसी जनभागीदारी को स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापकता से जोड़ते हुए कहा कि बापू ने सामान्य नागरिक को भी स्वतंत्रता संघर्ष का सहभागी बनाया।

आधी धोती और हाथ में छड़ी, दुनिया ने देखी नेतृत्व की ताकत

मुख्यमंत्री ने गांधीजी की सादगी का उल्लेख करते हुए कहा कि आधी धोती पहनकर और हाथ में छड़ी लेकर चलने वाले गांधीजी के नेतृत्व में ऐसा जनआंदोलन खड़ा हुआ जिसने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन मूल्यों को समाज से जोड़ा, उनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार स्वच्छता, स्वदेशी, स्वावलंबन और ग्राम स्वराज को केवल ऐतिहासिक विचार मानने के बजाय इन्हें वर्तमान सामाजिक और आर्थिक जीवन से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी का भाव व्यक्ति, परिवार और समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने से जुड़ा है।

स्वच्छ भारत अभियान को गांधीजी के स्वच्छता संदेश से जोड़ा

मुख्यमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से इस विचार को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 12 करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए हैं और स्वच्छता अभियान ने स्वास्थ्य तथा नारी गरिमा से जुड़े विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाई। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के आधिकारिक दस्तावेजों में भी ग्रामीण भारत में 10 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों के निर्माण का उल्लेख है।

केंद्र सरकार वर्तमान में स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में खुले में शौच से मुक्त स्थिति को बनाए रखने के साथ-साथ ठोस और तरल कचरा प्रबंधन पर भी जोर दे रही है। सितंबर 2026 में शुरू किए गए स्वच्छता ही सेवा अभियान में भी सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को प्रमुखता दी गई है।

ग्राम सचिवालयों से ग्राम स्वराज की परिकल्पना को जोड़ने की बात

मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना को वर्तमान ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए कहा कि गांव भारत की आधारभूत इकाई हैं। उन्होंने कहा कि गांवों को स्वावलंबन का आधार बनाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री के अनुसार इसी सोच के तहत ग्राम सचिवालयों की स्थापना की गई है, जहां तकनीक के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम सचिवालय केवल जनसुविधाओं का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके माध्यम से प्रत्येक गांव में चार से सात लोगों को रोजगार मिलने की सुविधा उपलब्ध हो रही है।

लाल बहादुर शास्त्री को भी किया नमन

गांधी जयंती के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर मुख्यमंत्री ने उन्हें भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन देश के दूसरे प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है।

मुख्यमंत्री ने गांधी और शास्त्री के जीवन को सादगी, भारतीयता और राष्ट्रसेवा से जोड़ते हुए कहा कि दोनों नेताओं के जीवन में उनके विचार और आचरण के बीच समानता दिखाई देती थी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के शब्दों में तभी प्रभाव आता है जब उसके आचार और विचार में समन्वय हो।

‘जय जवान-जय किसान’ को राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता से जोड़ा

लाल बहादुर शास्त्री के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी ने स्वदेशी के माध्यम से जनचेतना को जगाया, जबकि शास्त्री जी ने ‘जय जवान-जय किसान’ के उद्घोष के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश के सामने सुरक्षा और खाद्यान्न दोनों मोर्चों पर चुनौतियां थीं, तब एक ओर जवान सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे थे और दूसरी ओर किसान खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में योगदान दे रहे थे। उनके अनुसार शास्त्री जी का यह संदेश आगे चलकर भारत की आत्मनिर्भरता की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

खाद्यान्न आत्मनिर्भरता का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय भारत को गेहूं सहित खाद्यान्न की जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी बड़ी आबादी की खाद्यान्न जरूरतें पूरी करने के साथ दुनिया के कई देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति करने की स्थिति में है।

यह टिप्पणी मुख्यमंत्री के संबोधन का हिस्सा थी। भारत की खाद्यान्न स्थिति और निर्यात से जुड़े वास्तविक आंकड़े फसल, वर्ष और वस्तु के अनुसार अलग-अलग होते हैं, इसलिए इसे व्यापक राजनीतिक भाषण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

पूर्वजों के आदर्शों से भविष्य निर्माण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखता है तथा उनके आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है, उसका भविष्य उज्ज्वल होता है। उन्होंने कहा कि आज का भारत गांधीजी के स्वच्छता, स्वदेशी, स्वावलंबन और ग्राम स्वराज के विचारों को नए संदर्भों में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, खादी एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा, क्षेत्रीय गांधी आश्रम के मंत्री देवी प्रसाद शर्मा, व्यवस्थापक अखिलेश कुमार उपाध्याय, सरोजित तिवारी, प्रमुख समाजसेवी एवं साहित्यकार अखिलेश द्विवेदी, क्षेत्रीय गांधी आश्रम से जुड़े पदाधिकारी तथा विधायकगण उपस्थित रहे।

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