Export From UP : यूपी के आम की विदेशों में बढ़ी मिठास, पांच साल में 90,844 क्विंटल निर्यात; चौसा की सबसे ज्यादा मांग
उत्तर प्रदेश से पांच वित्तीय वर्षों में 90,844 क्विंटल से अधिक आम का निर्यात हुआ। चौसा, दशहरी, रटौल और लंगड़ा की विदेशों में मांग बढ़ी। पैक हाउस और HortiNet से निर्यात श्रृंखला मजबूत हो रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आम की पहचान अब देश के बाजारों तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों से तैयार होने वाला फल खाड़ी देशों समेत कई विदेशी बाजारों तक पहुंच रहा है। राज्य सरकार की ओर से उत्पादन के साथ पैकेजिंग, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, ब्रांडिंग और निर्यात सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश से कुल 9,084.41 मीट्रिक टन यानी 90,844 क्विंटल से अधिक आम का निर्यात किया गया। यूएई, सऊदी अरब, कतर समेत खाड़ी क्षेत्र और नेपाल प्रमुख बाजारों में शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी APEDA के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख आम उत्पादक राज्य है और 2024-25 में उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 26.56 प्रतिशत रही।
प्रदेश में आम को बाग से सीधे विदेशी बाजार तक पहुंचाने के लिए पोस्ट-हार्वेस्ट और निर्यात ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। लखनऊ, सहारनपुर और गोरखपुर सहित विभिन्न स्थानों पर आम के लिए मान्य पैक हाउस मौजूद हैं, जबकि 2026 में मिर्जापुर के चुनार में APEDA का इंटीग्रेटेड पैकहाउस भी मान्य सूची में शामिल हुआ है। इन सुविधाओं में आम की ग्रेडिंग, पैकिंग और निर्यात मानकों के अनुरूप उपचार जैसी प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद मिलती है।
बाग से विदेशी बाजार तक तैयार हुई निर्यात की श्रृंखला
आम के निर्यात में केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं होता। विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं के अनुरूप फल की गुणवत्ता, उपचार, पैकिंग, परीक्षण, प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी जैसी प्रक्रियाएं भी जरूरी होती हैं। APEDA के MangoNet/HortiNet सिस्टम में आम के खेतों के पंजीकरण से लेकर पैकहाउस, परीक्षण, पैकिंग और फाइटोसैनिटरी प्रमाणन तक की प्रक्रिया को जोड़ा गया है। APEDA के अनुसार इसका उद्देश्य आम को निर्यात श्रृंखला में ट्रेस करने, अवशेषों की निगरानी और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में मदद करना है।
उत्तर प्रदेश में इसी निर्यात श्रृंखला को मजबूत करने के लिए मंडी परिषद और APEDA के स्तर पर पैक हाउस तथा उत्पादक फार्मों को निर्यात व्यवस्था से जोड़ने का काम किया जा रहा है। APEDA के मौजूदा रिकॉर्ड में लखनऊ का Mango Pack House, सहारनपुर का Mango Pack House और गोरखपुर का Integrated Pack House आम के लिए मान्य सुविधाओं के रूप में दर्ज हैं। चुनार, मिर्जापुर स्थित APEDA Integrated Packhouse में Vapour Heat Treatment, कोल्ड स्टोरेज और क्वारंटीन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
विदेशी बाजार में चौसा सबसे आगे
उत्तर प्रदेश से निर्यात होने वाले आम की किस्मों में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत बताई गई है। इसके बाद दशहरी की करीब 25 प्रतिशत और रटौल की करीब 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। लंबी दूरी के बाजारों के लिए फल की टिकाऊपन और शेल्फ लाइफ महत्वपूर्ण होती है, इसलिए निर्यात श्रृंखला में ऐसी किस्मों की मांग विशेष महत्व रखती है।
प्रदेश की अलग-अलग आम किस्मों की अपनी विशिष्ट पहचान है। मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है, जबकि बागपत का रटौल अपने विशिष्ट स्वाद और सुगंध के लिए पहचान रखता है। बनारसी लंगड़ा भी अपने अलग स्वाद के कारण देश-विदेश के बाजारों में मांग रखता है। इसके अलावा आम्रपाली और पूर्वांचल की गवरजीत जैसी किस्मों को भी बड़े बाजारों से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
HortiNet से 650 के करीब आम उत्पादक फार्म जुड़े
आम के निर्यात में ट्रेसबिलिटी को मजबूत करने के लिए उत्पादक फार्मों का HortiNet/MangoNet जैसी प्रणालियों से पंजीकरण महत्वपूर्ण है। APEDA के 1 अक्टूबर 2026 के MangoNet आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के 653 आम उत्पादक फार्म पंजीकृत दिखाई देते हैं, जिनमें 149 नवीनीकृत और 504 नए पंजीकरण शामिल हैं।
APEDA के अनुसार MangoNet प्रणाली में राज्य के बागवानी विभाग, निर्यातक, पैक हाउस, प्रयोगशालाएं, Agmark और फाइटोसैनिटरी विभाग जैसे हितधारक जुड़े होते हैं। निर्यात के लिए पंजीकृत फार्म से उत्पाद लेने, पैक हाउस में लॉट बनाने, परीक्षण और प्रमाणन जैसी प्रक्रियाओं को इसी तरह की ट्रेसबिलिटी व्यवस्था के जरिए जोड़ा जाता है।
इस व्यवस्था से विदेशी बाजारों के लिए आवश्यक गुणवत्ता और अवशेष मानकों के अनुपालन को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकता है। खास तौर पर यूरोपीय बाजारों जैसे कड़े गुणवत्ता मानकों वाले बाजारों के लिए ट्रेसबिलिटी और परीक्षण व्यवस्था निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
15 लाख मैंगो कवर से गुणवत्ता सुधार पर जोर
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद की ओर से इस वर्ष फल उत्पादकों को 15 लाख मैंगो कवर उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। इन कवर का उद्देश्य आम को कीटों, दाग-धब्बों और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से बचाने में मदद करना है। इससे निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले फल तैयार करने में किसानों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
निर्यात बाजार में केवल आम की मात्रा नहीं बल्कि उसकी बाहरी गुणवत्ता, आकार, रंग, रोग-मुक्त स्थिति और निर्धारित मानकों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बाग स्तर पर गुणवत्ता सुधार की कोशिशों को पोस्ट-हार्वेस्ट सुविधाओं के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
निर्यातकों को भाड़े और मार्केटिंग पर प्रोत्साहन
प्रदेश की निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 के तहत निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों का प्रावधान बताया गया है। दिए गए विवरण के अनुसार हवाई, समुद्री और सड़क मार्ग से निर्यात पर कुल भाड़े का 25 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जा सकता है और एक निर्यातक को सालाना अधिकतम 20 लाख रुपये तक लाभ का प्रावधान है।
इसके अलावा ट्रेड फेयर, बायर-सेलर मीट, डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात सर्टिफिकेशन जैसी अनुमन्य गतिविधियों पर 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान बताया गया है। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य निर्यातकों की बाजार तलाशने, विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने और निर्यात से जुड़ी लागत को कम करने में मदद करना है।
अमरोहा से समुद्री रास्ते दुबई पहुंचा आम
निर्यात के लिए नए परिवहन मार्गों का इस्तेमाल भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दिए गए विवरण के अनुसार जुलाई में अमरोहा से 12.5 मीट्रिक टन दशहरी और लंगड़ा आम की व्यावसायिक खेप रीफर कंटेनर के जरिए समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई। समुद्री मार्ग से आम भेजने की ऐसी व्यवस्था हवाई मालभाड़े पर निर्भरता कम करने और बड़ी मात्रा में फल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के विकल्प के रूप में देखी जा सकती है।
आम जैसे जल्दी खराब होने वाले फल के लिए तापमान नियंत्रित परिवहन और उपयुक्त पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण पैक हाउस से लेकर कोल्ड चेन और रीफर कंटेनर तक की व्यवस्था निर्यात श्रृंखला का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
पांच साल में 90,844 क्विंटल से अधिक आम विदेश गया
डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश से कुल 9,084.41 मीट्रिक टन यानी 90,844 क्विंटल से अधिक आम का निर्यात हुआ। वर्षवार आंकड़ा इस प्रकार है:
| वित्तीय वर्ष | आम निर्यात |
|---|---|
| 2021-22 | 4,122.79 मीट्रिक टन |
| 2022-23 | 527.59 मीट्रिक टन |
| 2023-24 | 567.62 मीट्रिक टन |
| 2024-25 | 396.64 मीट्रिक टन |
| 2025-26 | 3,469.77 मीट्रिक टन |
| कुल | 9,084.41 मीट्रिक टन |
इन आंकड़ों में वर्ष-दर-वर्ष काफी अंतर दिखाई देता है, लेकिन 2025-26 में निर्यात मात्रा फिर बढ़कर 3,469.77 मीट्रिक टन पहुंची। राष्ट्रीय स्तर पर APEDA के अनुसार भारत ने 2025-26 में कुल 31,819.46 मीट्रिक टन ताजा आम का निर्यात किया।
यूपी के आम को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
मंडी निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को बेहतर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए पैक हाउस तथा निर्यात सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। चौसा, दशहरी, रटौल और लंगड़ा के साथ आम्रपाली और गवरजीत को भी बड़े बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के आम की वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने के लिए बाग स्तर की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी, पैक हाउस, उपचार, प्रमाणन, कोल्ड चेन और परिवहन—इन सभी कड़ियों का मजबूत होना जरूरी है। मौजूदा APEDA रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश के कई आम पैक हाउस और सैकड़ों पंजीकृत आम उत्पादक फार्म इस निर्यात ढांचे का हिस्सा दिखाई देते हैं। ऐसे में प्रदेश की प्रमुख आम किस्मों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश केवल निर्यात मात्रा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की उपज को बेहतर बाजार और अंतरराष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।



