Ayodhya : अयोध्या 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का बदलेगा स्वरूप, ₹1,140 करोड़ से 31 किमी फोरलेन; दीपोत्सव से पहले पूरा करने का लक्ष्य
अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण अंतिम चरण में है। करीब ₹1,140 करोड़ से 31 किमी मार्ग फोरलेन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने और रोशनी की सुविधा विकसित हो रही है।

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में धार्मिक आस्था से जुड़े 14 कोसी परिक्रमा मार्ग को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आवागमन के अनुरूप विकसित करने का काम अंतिम चरण में पहुंच रहा है। करीब ₹1,140 करोड़ की लागत से 31 किलोमीटर लंबे हिस्से का चौड़ीकरण कर उसे फोरलेन बनाया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को अधिक सुगम बनाने के साथ मार्ग पर जरूरी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सितंबर 2026 की स्थानीय रिपोर्टिंग में भी इस परियोजना के फोरलेन निर्माण को अंतिम चरण में बताया गया था।
14 कोसी परिक्रमा मार्ग की कुल लंबाई करीब 42 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें कुछ हिस्सा पंचकोसी परिक्रमा मार्ग से भी जुड़ा है। परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने की व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। मार्ग के डिवाइडर पर पीली रेलिंग, पौधारोपण और आकर्षक लाइटिंग के जरिए इसके स्वरूप को भी बदला जा रहा है। परियोजना को दीपोत्सव से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा को मिल रही आधुनिक सुविधाओं की जोड़
14 कोसी परिक्रमा अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अवसरों पर रामनगरी पहुंचकर इस परिक्रमा में शामिल होते हैं। ऐसे में मार्ग का चौड़ीकरण केवल सड़क की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन और सुविधाओं से भी है।
अयोध्या में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से भी अयोध्या में आध्यात्मिक और पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं के जरिए आधुनिक visitor amenities विकसित करने की जानकारी दी गई है, जिसमें सांस्कृतिक और विरासत स्वरूप को बनाए रखने पर जोर है।
इसी व्यापक विकास प्रक्रिया के बीच 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण भी श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इससे मार्ग के उन हिस्सों में भी यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है, जहां धार्मिक आयोजनों के दौरान दबाव बढ़ जाता है।
सड़क के साथ शौचालय, पानी, टिन शेड और बैठने की सुविधा
परिक्रमा मार्ग के विकास में केवल सड़क निर्माण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। परियोजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें शौचालय, वाटर कियोस्क, टिन शेड, बैठने की व्यवस्था और प्रकाश प्रमुख हैं।
इन सुविधाओं का उद्देश्य परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं को लंबे मार्ग पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। खासकर गर्मी, बारिश या रात के समय होने वाली परिक्रमा में पेयजल, बैठने और प्रकाश जैसी सुविधाएं उपयोगी हो सकती हैं। मार्ग के विभिन्न हिस्सों में निर्माण और सुविधाओं से जुड़े कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
जनौरा अंडरपास भी फोरलेन परियोजना का हिस्सा
14 कोसी परिक्रमा पथ से जुड़े जनौरा अंडरपास को भी फोरलेन किए जाने का काम परियोजना के साथ आगे बढ़ाया गया है। मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एनएचएआई से अनापत्ति मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-3 ने अंडरपास क्षेत्र में आवागमन प्रतिबंधित कर निर्माण कार्य शुरू किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि पहले यह अंडरपास टू-लेन था और परिक्रमा या सामान्य दिनों में यातायात दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बनती थी।
अंडरपास का चौड़ीकरण इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि सड़क के किसी एक हिस्से को फोरलेन बनाने के बाद यदि प्रमुख क्रॉसिंग या अंडरपास संकरा रह जाए तो यातायात का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसलिए परिक्रमा पथ से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण हिस्सों को भी परियोजना के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
पीली रेलिंग, पौधारोपण और रोशनी से बदलेगा परिक्रमा पथ
परियोजना के सौंदर्यीकरण हिस्से में मार्ग के डिवाइडर पर पीले रंग की रेलिंग लगाई जा रही है। कई स्थानों पर पौधारोपण के बाद ट्री गार्ड भी लगाए गए हैं। इससे सड़क के मध्य हिस्से को हरित स्वरूप देने के साथ मार्ग की दृश्य पहचान को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही परिक्रमा पथ को रोशन करने के लिए आकर्षक प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। अचारी सगरा के आसपास भी प्रकाश व्यवस्था शुरू होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में परियोजना पूरी होने के बाद मार्ग पर दिन के साथ रात में भी रोशनी और अन्य सुविधाओं के कारण अलग स्वरूप देखने को मिल सकता है।
मोदहा के पास रेलवे ओवरब्रिज का काम पूरा
परिक्रमा मार्ग से जुड़े मोदहा के पास फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे रेलवे क्रॉसिंग से जुड़े यातायात को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। परिक्रमा मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में सड़क, पुल, अंडरपास और अन्य संरचनाओं को परियोजना के अनुरूप विकसित करने का उद्देश्य पूरे मार्ग पर आवागमन को अधिक व्यवस्थित करना है।
यह भी उल्लेखनीय है कि अयोध्या में परिक्रमा मार्गों से जुड़ी परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं। अगस्त 2026 में सरकार ने पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के 9.025 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन करने के लिए करीब ₹466.46 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी थी। यह 14 कोसी मार्ग से संबंधित व्यापक सड़क अवसंरचना विकास की अलग परियोजना है, इसलिए दोनों के आंकड़ों को एक ही परियोजना मानना उचित नहीं होगा।
दीपोत्सव से पहले पूरा करने की तैयारी
परियोजना के अंतिम चरण में लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-3 की ओर से शेष कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि दीपोत्सव के दौरान अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सत्य पाल सिंह के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त प्रकाश और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं को अनावश्यक असुविधा से बचाते हुए मार्ग को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
आस्था और आधुनिक विकास का संगम बनेगा परिक्रमा पथ
अयोध्या में धार्मिक आयोजनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का फोरलेन स्वरूप और उसके साथ विकसित की जा रही सुविधाएं धार्मिक यात्रा के अनुभव को प्रभावित कर सकती हैं। सड़क चौड़ीकरण के साथ पानी, शौचालय, बैठने, टिन शेड, प्रकाश और स्वच्छता जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से श्रद्धालुओं के लिए लंबी परिक्रमा यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस तरह 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर चल रहा विकास कार्य अयोध्या की पुरानी धार्मिक परंपरा को आधुनिक सड़क और नागरिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। दीपोत्सव से पहले परियोजना के प्रमुख कार्य पूरे होने की स्थिति में रामनगरी आने वाले श्रद्धालुओं को एक विकसित और अधिक व्यवस्थित परिक्रमा पथ देखने को मिल सकता है।



