अखिलेश यादव पर अनिल राजभर का हमला, लाल टोपी से लेकर पुरानी पेंशन तक साधा निशाना
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव के लाल-हरे रंग वाले बयान पर पलटवार किया। पुरानी पेंशन, जयंत चौधरी और पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह के मुद्दे पर भी निशाना साधा।

‘लाल टोपी वालों के कारनामे भूली नहीं है यूपी की जनता’, अखिलेश पर अनिल राजभर का तीखा हमला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से हरे और लाल रंग को लेकर दिए गए बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने तीखा पलटवार किया है। अनिल राजभर ने 2012 से 2017 के बीच की समाजवादी पार्टी सरकार का जिक्र करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता उस दौर के ‘लाल रंग के असर’ को भूली नहीं है। उनके बयान में लाल टोपी, कानून-व्यवस्था, पुरानी पेंशन और जयंत चौधरी से जुड़े राजनीतिक विवाद प्रमुख मुद्दे रहे।
अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग सत्ता में रहते हुए लाल टोपी पहनते थे और उनके अनुसार उस दौरान गरीबों की जमीन पर कब्जे तथा महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामले सामने आते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लाल टोपी देखकर व्यापारी अपना शटर बंद कर देते थे। ये आरोप अनिल राजभर ने अपने राजनीतिक पलटवार के दौरान लगाए हैं।
‘सत्ता में लाल टोपी, बाहर आते ही क्रांति’
अनिल राजभर ने समाजवादी पार्टी पर रंग और राजनीतिक भूमिका बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के लोग सत्ता में रहते हुए लाल टोपी पहनकर जनता का शोषण करते हैं और सरकार से बाहर आने के बाद उन्हें क्रांति दिखाई देने लगती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल और उसके राजनीतिक तौर-तरीकों को भूली नहीं है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं और अखिलेश यादव लगातार अलग-अलग मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। हाल में अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने समेत कई घोषणाएं की हैं।
पुरानी पेंशन पर अनिल राजभर ने 28 मार्च 2005 का किया जिक्र
पुरानी पेंशन के मुद्दे पर भी अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को हटाकर नई पेंशन व्यवस्था की शुरुआत किस सरकार के समय हुई थी। उन्होंने 28 मार्च 2005 की तारीख का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी और इसी दौरान नई पेंशन व्यवस्था से संबंधित अधिसूचना जारी हुई थी।
उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस 1 अप्रैल 2005 से लागू है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के रिकॉर्ड में 28 मार्च 2005 की राज्य सरकार की अधिसूचना को नई परिभाषित अंशदान पेंशन योजना लागू करने से संबंधित अधिसूचना के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं 2024 में सरकार ने उन कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का विकल्प देने की व्यवस्था की थी, जिनकी नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 या उसके बाद हुई, लेकिन संबंधित पद का विज्ञापन 28 मार्च 2005 से पहले प्रकाशित हो चुका था।
अनिल राजभर ने इसी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जनता समाजवादी पार्टी के पुराने फैसलों और उसकी ‘चाल और चलन’ को अच्छी तरह जानती है। दूसरी ओर, पुरानी पेंशन योजना की बहाली वर्तमान में भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है और अखिलेश यादव इसे लेकर अपनी सरकार बनने पर पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर चुके हैं।
जयंत चौधरी के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा
जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी अनिल राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर परेशान है और पार्टी के मुखिया को नींद नहीं आ रही है। अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर दूसरों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार के राजनीतिक सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की राजनीति में चौधरी साहब और उनके परिवार का सम्मान किसी से छिपा नहीं है। अनिल राजभर ने दावा किया कि चौधरी परिवार के अपमान का जवाब प्रदेश के किसान, गरीब, पिछड़े और दलित समाजवादी पार्टी को देंगे। यह अनिल राजभर की राजनीतिक टिप्पणी और उनका दावा है।
अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर हाल के बयानों के बीच उत्तर प्रदेश में विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक समीकरण और गठबंधन को लेकर भी चर्चा चल रही है। मौजूदा राजनीतिक बयानों को संबंधित नेताओं के दावों और प्रतिक्रियाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह पर भी पलटवार
अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह दिए जाने पर भी अनिल राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव कैमरों के सामने असहज हो जाते हैं और सवाल पूछे जाने पर पत्रकारों की जाति, चैनल या घर के बारे में पूछने लगते हैं। अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया को किसी पर भरोसा नहीं है और किसी का अपमान करने में उन्हें देर नहीं लगती।
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के हालिया बयानों से जुड़ी है, जिनमें उन्होंने रंगों और राजनीतिक पहचान को लेकर टिप्पणियां की थीं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक अखिलेश यादव ने पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीतिक विकल्पों के संदर्भ में ‘हरा गमछा’ और ‘लाल गमछा’ का उल्लेख किया था।
अनिल राजभर ने इन्हीं बयानों को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल, पुरानी पेंशन व्यवस्था और जयंत चौधरी के मुद्दे को एक साथ उठाते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। इस तरह दोनों पक्षों के बयानों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में रंग, पेंशन, सामाजिक समीकरण और पुराने शासन के रिकॉर्ड से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।



