अखिलेश यादव के बिजली वाले बयान पर एके शर्मा का पलटवार, बोले- सत्ता में थे तब किसानों को बिजली-पानी क्यों नहीं दिया?
अखिलेश यादव के किसानों को मुफ्त सिंचाई और बिजली संबंधी बयान पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने 2017 के बाद बिजली उपभोक्ताओं और विद्युतीकरण में वृद्धि का दावा किया।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के किसानों, सिंचाई और बिजली को लेकर दिए गए बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने 30 सितंबर को किसानों के लिए मुफ्त सिंचाई समेत कई घोषणाएं कीं और सरकार पर बिजली तथा किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। इसके जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार करते हुए सवाल किया कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब किसानों को पर्याप्त बिजली और पानी क्यों नहीं दिया गया।
एके शर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव आज बिजली के मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर भी जवाब देना चाहिए। शर्मा ने दावा किया कि 2017 तक उत्तर प्रदेश में बिजली की पहुंच सीमित थी, जबकि पिछले वर्षों में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। इससे पहले भी बिजली व्यवस्था पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने दावा किया था कि बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1.8 करोड़ से बढ़कर 3.72 करोड़ हुई है और विद्युतीकृत गांवों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
‘जब सत्ता में थे तब किसानों को बिजली-पानी क्यों नहीं दिया?’
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अखिलेश यादव के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार किसानों को बिजली और पानी उपलब्ध कराने को लेकर इतनी गंभीर थी, तो उसके कार्यकाल में सभी किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने कार्यकाल की बिजली व्यवस्था के रिकॉर्ड पर भी बात करनी चाहिए।
शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की बातों में पूरे उत्तर प्रदेश के बजाय सैफई और अपने क्षेत्र को प्राथमिकता देने की झलक दिखाई देती है। उन्होंने दावा किया कि सैफई में बिजली-पानी की बेहतर व्यवस्था थी, जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में लोगों को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ता था। ये आरोप ऊर्जा मंत्री के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
‘2017 तक दो-तिहाई आबादी ने बिजली का दर्शन नहीं किया’
एके शर्मा ने दावा किया कि वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश के करीब तीन लाख गांवों और मजरों में से सीमित संख्या में ही विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय करीब 60-70 हजार गांवों और 1,21,000 मजरों के विद्युतीकरण का आंकड़ा था और उनके अनुसार इसका अर्थ था कि प्रदेश की बड़ी आबादी तक बिजली की पहुंच नहीं थी।
शर्मा ने कहा कि उस समय कई इलाकों में बिजली के खंभे और तार तक नहीं पहुंचे थे। उन्होंने इसी आधार पर अखिलेश यादव के बिजली संबंधी बयान पर सवाल खड़ा किया। हालांकि, इन आंकड़ों को ऊर्जा मंत्री के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘2017 में 1.80 करोड़ थे बिजली उपभोक्ता, आज 3.70 करोड़’
ऊर्जा मंत्री ने बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि को भी अपने जवाब का प्रमुख आधार बनाया। उन्होंने कहा कि 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 1.80 करोड़ बिजली उपभोक्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 3.70 करोड़ हो गई है।
शर्मा के अनुसार राज्य की जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्र में इस अवधि में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ जिससे बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में इस स्तर की वृद्धि को नजरअंदाज किया जा सके। उन्होंने कहा कि करीब दो करोड़ अतिरिक्त उपभोक्ताओं का जुड़ना बिजली कनेक्शन के विस्तार की ओर संकेत करता है। मई 2026 में भी स्मार्ट मीटर विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने 1.8 करोड़ से बढ़कर 3.72 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं का आंकड़ा सार्वजनिक रूप से बताया था।
बिजली के मुद्दे पर अखिलेश यादव को एके शर्मा की दो टूक
एके शर्मा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि बिजली के मुद्दे पर बोलने से पहले उन्हें अपने कार्यकाल की बिजली व्यवस्था का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान बिजली तंत्र और प्रदेश की व्यवस्था में जो कमियां थीं, उन्हें मौजूदा सरकार दूर करने का प्रयास कर रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अखिलेश यादव ने किसानों को लेकर कई घोषणाएं की हैं। 30 सितंबर को उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो खेती की सिंचाई मुफ्त की जाएगी और गन्ना किसानों को 24 से 48 घंटे में भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
हरे-लाल रंग वाले बयान पर भी शर्मा का पलटवार
अखिलेश यादव की ओर से हरे और लाल रंग को लेकर दिए गए बयान पर भी एके शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। अखिलेश यादव ने हालिया राजनीतिक बयानबाजी में हरे और लाल रंग का उल्लेख किया है और 30 सितंबर की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी यह मुद्दा सामने आया।
शर्मा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपना राजनीतिक रंग बदलते हैं। उन्होंने लाल टोपी, हरे रंग और काली सदरी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे किसी एक राजनीतिक पहचान से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने अखिलेश यादव के पीडीए को लेकर भी टिप्पणी की और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच इसके अलग अर्थ बताए जाने का आरोप लगाया।
ये टिप्पणियां एके शर्मा की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और इन्हें उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
‘समाजवाद पढ़ने की जरूरत नहीं’ कहकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह दिए जाने के सवाल पर भी एके शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अखिलेश यादव के बताए समाजवाद को पढ़ने की जरूरत नहीं है।
इसके बाद शर्मा ने अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए और गरीबों तथा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यवस्था को अखिलेश यादव समाजवाद कहते हैं, उसमें गरीबों और महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। ये आरोप भी ऊर्जा मंत्री के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।
बिजली को लेकर यूपी की सियासत में बढ़ी बयानबाजी
अखिलेश यादव और एके शर्मा के बीच ताजा बयानबाजी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हैं। अखिलेश यादव ने किसानों, सिंचाई और बिजली जैसे मुद्दों को अपनी राजनीतिक बातों में प्रमुखता दी है, जबकि प्रदेश सरकार के मंत्री मौजूदा सरकार के कार्यकाल में बिजली कनेक्शन और व्यवस्था के विस्तार को अपने जवाब का आधार बना रहे हैं।
इस पूरे विवाद में एक तरफ अखिलेश यादव सरकार की नीतियों और किसानों की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं एके शर्मा उनके पिछले कार्यकाल और बिजली व्यवस्था के आंकड़ों का हवाला देते हुए जवाब दे रहे हैं। दोनों नेताओं के बयानों के बीच बिजली, सिंचाई और किसानों से जुड़े मुद्दे आगामी राजनीतिक बहस के महत्वपूर्ण विषयों में बने हुए हैं।



