यूपी राज्यसभा चुनाव में घमासान: सपा ने खरीदे 3 नामांकन पत्र, भाजपा के 8 उम्मीदवारों की चर्चा; 10वीं सीट का पूरा गणित
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। सपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जबकि भाजपा की 8 सीटों पर नजर है। जानिए पूरा वोट गणित।

यूपी राज्यसभा चुनाव में घमासान: सपा ने खरीदे 3 नामांकन पत्र, भाजपा के 8 उम्मीदवारों की चर्चा; 10वीं सीट पर वोटों का दिलचस्प गणित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और इसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए आठ सीटों और समाजवादी पार्टी के लिए दो सीटों का गणित मजबूत माना जा रहा है। लेकिन समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी और भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारने की चर्चा ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों का गणित, छोटे दलों और अन्य विधायकों का रुख तथा मतदान के दौरान प्रथम वरीयता वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि अभी उम्मीदवारों की अंतिम सूची और वास्तविक मतदान सामने नहीं आया है, इसलिए क्रॉस वोटिंग को लेकर चल रही चर्चाओं को संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
10 राज्यसभा सीटों पर होना है चुनाव, 8 भाजपा के पास थीं
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की जिन 10 सीटों के लिए चुनाव होना है, उनमें आठ सीटें वर्तमान में भाजपा के पास थीं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास थी। इन सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम में यूपी से सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, रामगोपाल यादव, नीरज शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ. दिनेश शर्मा के नाम शामिल हैं। डॉ. दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से ही रिक्त हो चुकी है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में यह सीट भी शामिल है।
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है। मौजूदा प्रभावी विधानसभा संख्या 397 बताई जा रही है। इस गणित में एक उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता होगी।
सपा ने क्यों खरीदे तीन नामांकन पत्र?
समाजवादी पार्टी के पास मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने के लिए पर्याप्त वोट हैं। इसके बावजूद पार्टी ने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। 29 सितंबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ सपा की ओर से तीन नामांकन पत्र खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से उम्मीदवारों के नामों को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट किए जाने की बात कही गई है।
संभावित उम्मीदवारों के तौर पर प्रो. रामगोपाल यादव, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी के नाम चर्चा में हैं। हालांकि नामांकन दाखिल होने और पार्टी की औपचारिक घोषणा तक इन्हें अंतिम उम्मीदवार मानना उचित नहीं होगा। रामगोपाल यादव को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा सबसे प्रमुख है। वहीं आलोक रंजन का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवार रहे थे। सलीम इकबाल शेरवानी भी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में हैं।
सपा के तीसरे उम्मीदवार को उतारने के पीछे सबसे बड़ा सवाल अतिरिक्त वोटों का है। उपलब्ध रिपोर्टेड संख्या के अनुसार सपा-कांग्रेस खेमे के पास दो सीटें जीतने के बाद भी अतिरिक्त विधायक बचते हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को निर्वाचित कराने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। इसी वजह से इस चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
37 वोट का क्या है पूरा गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 397 होने के कारण एक राज्यसभा सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट का कोटा बनता है। इस हिसाब से दो उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए 74 वोट चाहिए, जबकि तीन उम्मीदवारों के लिए 111 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होगी।
सपा और कांग्रेस के पास मिलाकर करीब 103 विधायक बताए जा रहे हैं। इसलिए दो सीटों के लिए आवश्यक 74 वोट देने के बाद लगभग 29 वोट बचने का गणित बनता है। तीसरे उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 वोट चाहिए होंगे। यानी मौजूदा संख्या बल के आधार पर सपा को तीसरे उम्मीदवार के लिए करीब आठ अतिरिक्त प्रथम वरीयता वोट जुटाने होंगे। यही अतिरिक्त आठ वोट इस चुनाव की राजनीतिक चर्चा का बड़ा केंद्र बन गए हैं।
हालांकि अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ विधायकों के समर्थन को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग दावे हैं। कुछ रिपोर्टों में सपा के साथ अतिरिक्त विधायकों के संभावित समर्थन की भी चर्चा है। इसलिए अंतिम गणित नामांकन वापसी और मतदान के समय वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा।
भाजपा के लिए 8वीं सीट का गणित क्यों महत्वपूर्ण?
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास उत्तर प्रदेश विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 256, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक बताए गए हैं। इनकी कुल संख्या 289 बैठती है। कुछ अन्य विधायकों के संभावित समर्थन को अलग से जोड़ा जाता है।
37 वोट प्रति सीट के हिसाब से सात सीटों के लिए 259 वोट चाहिए। इस गणित में एनडीए के पास सात सीटों के बाद भी अतिरिक्त वोट बचते हैं। आठवीं सीट के लिए 296 वोट की जरूरत होगी, इसलिए केवल घोषित एनडीए संख्या के आधार पर अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी वजह से भाजपा की आठवीं सीट के लिए भी राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण हो गया है।
कुछ रिपोर्टों में असंबद्ध विधायकों और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के विधायकों के संभावित समर्थन का भी उल्लेख किया गया है। लेकिन किसी भी विधायक के मतदान को लेकर अंतिम स्थिति मतदान से पहले निश्चित नहीं मानी जा सकती।
भाजपा में किन नामों पर चर्चा?
भाजपा ने अभी तक सभी उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। हालांकि पार्टी की आंतरिक बैठकों के बाद कई नामों पर चर्चा होने की रिपोर्ट सामने आई है। आजतक के अनुसार भाजपा में आठ सीटों के लिए 20 से अधिक नामों पर चर्चा हुई, जिनमें स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, रेखा वर्मा, गीता शाक्य, राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया, प्रियंका रावत, कौशल किशोर, हरदीप पुरी, बृजलाल, प्रकाश पाल और दुर्विजय शाक्य जैसे नाम शामिल हैं।
वहीं अन्य रिपोर्टों में भाजपा की संभावित सूची में कुमार विश्वास और कुछ अन्य नामों की भी चर्चा की गई है। उत्तर प्रदेश भाजपा की ओर से संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की रिपोर्ट है, जिसके बाद अंतिम फैसला होना है। इसलिए चर्चा में चल रहे नामों और आधिकारिक प्रत्याशियों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
2024 में क्या हुआ था, जिसकी वजह से इस बार क्रॉस वोटिंग पर नजर?
उत्तर प्रदेश में 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी अतिरिक्त सीट को लेकर भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। उस समय भाजपा ने संख्या बल के लिहाज से अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारा था और सपा के कुछ विधायकों के भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसी वजह से इस बार भी क्रॉस वोटिंग की संभावना राजनीतिक चर्चाओं में है।
हालांकि पिछली बार की घटना को इस चुनाव का निश्चित परिणाम मानना सही नहीं होगा। इस बार विधानसभा की मौजूदा संख्या, दलों के बीच हुए राजनीतिक बदलाव और सहयोगी दलों की स्थिति अलग है। मतदान के दौरान विधायकों की प्रथम वरीयता और जरूरत पड़ने पर आगे की वरीयताओं का महत्व भी रहेगा।
बसपा की सीट पर भी रहेगी नजर
इन 10 सीटों में एक सीट वर्तमान में बसपा के पास थी, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के पास फिलहाल कोई विधायक नहीं है। ऐसे में पार्टी के लिए इस सीट को दोबारा हासिल करना संख्या बल के लिहाज से संभव नहीं दिखता। 2020 में अलग परिस्थितियों में भाजपा ने 10 में से आठ उम्मीदवार उतारे थे, जिसके कारण बसपा के रामजी गौतम और सपा के एक उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिला था। इस बार परिस्थितियां अलग हैं और भाजपा तथा सपा दोनों की ओर से अतिरिक्त सीट के लिए उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है।
इस चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में बसपा के प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थिति बदल सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।
16 अक्टूबर को होगा फैसला
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो गई है। 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी की जानी है।
फिलहाल चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर यह है कि भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन आठ सीटों के लिए संख्या बल जुटाने की स्थिति में है, जबकि सपा-कांग्रेस खेमे के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है। सपा के तीसरे उम्मीदवार और भाजपा के आठवें उम्मीदवार के मैदान में आने की स्थिति में दोनों पक्षों को अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम, नामांकन और विधायकों के समर्थन को लेकर होने वाली राजनीतिक गतिविधियां इस चुनाव की दिशा तय करेंगी। अभी क्रॉस वोटिंग की चर्चा जरूर है, लेकिन इसे तय घटना के रूप में नहीं कहा जा सकता; वास्तविक तस्वीर 16 अक्टूबर के मतदान के बाद ही सामने आएगी।



