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यूपी के 966 पीएम श्री विद्यालयों में बनेंगे लर्निंग कॉर्नर, ₹193 लाख मंजूर; खेल-खेल में सीखेंगे नौनिहाल

उत्तर प्रदेश के 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में चार लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ₹193 लाख मंजूर हुए हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को अधिक गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित बनाने के लिए पीएम श्री योजना के तहत नई व्यवस्था विकसित की जाएगी। वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए कुल ₹193 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹20,000 की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इन लर्निंग कॉर्नर में बच्चों की उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुरूप रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर बनाए जाएंगे, जहां किताबों, खिलौनों, कला सामग्री, पपेट और गतिविधि आधारित शिक्षण संसाधनों के जरिए बच्चों को सीखने का अवसर मिलेगा।

चार लर्निंग कॉर्नर में पढ़ाई के साथ खेल और गतिविधियों का मेल

इस पहल के तहत बालवाटिकाओं में रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इन चारों कॉर्नर को बच्चों के सामाजिक एवं संवेदनात्मक, संज्ञानात्मक, शारीरिक तथा सूक्ष्म मांसपेशियों के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा में गतिविधि आधारित और अनुभवपरक सीखने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में लर्निंग कॉर्नर बच्चों को पारंपरिक तरीके से केवल पढ़ाने के बजाय खेल, कहानी, कला, अभिनय और अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर देंगे।

रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की किताबें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट तथा लेखन और चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री उपलब्ध होगी। इसका उद्देश्य बच्चों में शब्दावली, सुनने की क्षमता और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करने में मदद करना है। वहीं ब्लॉक कॉर्नर में बड़े फोम ब्लॉक्स, लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट एवं नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज और लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को आकार पहचानने, समस्या समाधान, स्थानिक समझ, शुरुआती साक्षरता और संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं को विकसित करने के अवसर मिलेंगे।

परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को मिलेगा अवसर

परफॉर्मेंस कॉर्नर को बच्चों के लिए भूमिका-आधारित गतिविधियों और कल्पनाशील खेल का स्थान बनाया जाएगा। इसमें ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, स्मॉल ड्रम, हैट्स एवं स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री उपलब्ध होगी। इनके माध्यम से बच्चे भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद और सामाजिक सहभागिता जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे। इससे बच्चों को अपनी कल्पना और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा।

इसी तरह आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट और कलर पेपर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इन संसाधनों के जरिए बच्चे चित्रकारी और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। इससे रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ सूक्ष्म मोटर कौशल के विकास के लिए भी गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी।

3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग शिक्षण सामग्री

लर्निंग कॉर्नर में उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों के अनुसार निर्धारित की गई है। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि दोनों आयु वर्ग के बच्चों के लिए उनकी क्षमता के अनुरूप गतिविधियां संचालित की जा सकें। 5-6 वर्ष के बच्चों के रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स और द्विभाषी पुस्तकों जैसी सामग्री का प्रावधान किया गया है।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लर्निंग कॉर्नर बच्चों की जिज्ञासा को सीखने का नया मंच उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि बालवाटिका में सीखना जितना सहज और आनंददायक होगा, बच्चों की शुरुआती बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। उनके अनुसार 966 पीएम श्री विद्यालयों में विकसित होने वाले लर्निंग कॉर्नर के जरिए बच्चों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।

स्कूल स्तर पर खरीद, जिला और खंड स्तर से होगी निगरानी

लर्निंग कॉर्नर के लिए निर्धारित सामग्री की खरीद स्कूल स्तर पर की जाएगी। वहीं सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्धता और उसके प्रभावी उपयोग की निगरानी के लिए जिला और खंड स्तर पर अनुश्रवण की व्यवस्था की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हो और बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री का नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाए।

स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी के अनुसार लर्निंग कॉर्नर में बच्चों की आयु के अनुरूप निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनकी विकासात्मक जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर के प्रभावी उपयोग के साथ सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

इस पहल के तहत 966 पीएम श्री विद्यालयों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए ₹193 लाख की स्वीकृति के जरिए शुरुआती शिक्षा के वातावरण को अधिक गतिविधि-आधारित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लर्निंग कॉर्नर में किताबों, खेल सामग्री, कला संसाधनों और भूमिका-आधारित गतिविधियों का संयोजन बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप सीखने के अलग-अलग अवसर उपलब्ध कराएगा।

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