BRICS देशों में यूपी की धूम! ₹47,484 करोड़ का निर्यात, UAE से लेकर वियतनाम तक बढ़ी पकड़
ब्रिक्स और सहयोगी देशों को उत्तर प्रदेश से ₹47,484 करोड़ का निर्यात हुआ है। यूपी के कुल निर्यात में इन बाजारों की हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत है। UAE, सऊदी अरब, मिस्र, वियतनाम और मलेशिया प्रमुख बाजार बने हैं।

उत्तर प्रदेश अब केवल देश के बड़े औद्योगिक और उपभोक्ता बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा रहा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रदेश के उत्पादों की पहुंच लगातार बढ़ रही है। ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों को उत्तर प्रदेश से कुल ₹47,484 करोड़ का निर्यात किया गया है। उपलब्ध निर्यात प्रोफाइल के अनुसार यह प्रदेश के करीब ₹2 लाख करोड़ के कुल निर्यात का 23.7 प्रतिशत है। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों को ₹34,811 करोड़ और सहयोगी एवं पार्टनर देशों को ₹12,673 करोड़ का निर्यात शामिल है। ऐसे समय में जब भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है, उत्तर प्रदेश के लिए इन देशों के बाजारों में बढ़ती हिस्सेदारी राज्य की निर्यात क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता और 11 सदस्य देशों तथा 10 पार्टनर देशों वाली संरचना की पुष्टि विदेश मंत्रालय के दस्तावेजों में भी होती है।
ब्रिक्स बाजारों में यूपी के लिए बढ़े व्यापार के अवसर
ब्रिक्स और उससे जुड़े देशों में बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों की मांग उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। प्रदेश से पहले से ही खाद्य एवं कृषि आधारित उत्पादों, इलेक्ट्रिकल उपकरणों, मशीनरी, वस्त्र एवं परिधान, आभूषण, चमड़ा और कई अन्य औद्योगिक उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। ऐसे में ब्रिक्स के विस्तारित बाजारों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना उत्तर प्रदेश के छोटे, मध्यम और बड़े कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार का महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। BRICS के आधिकारिक दस्तावेज भी समूह के आर्थिक और वित्तीय सहयोग को प्रमुख क्षेत्रों में शामिल करते हैं।
ब्रिक्स में वर्तमान व्यवस्था के तहत 11 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पार्टनर देशों के रूप में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के BRICS संबंधी दस्तावेज के मुताबिक इंडोनेशिया जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य बना, जबकि नौ देशों को 2025 में पार्टनर का दर्जा दिया गया था; 2026 की भारतीय अध्यक्षता से जुड़े दस्तावेजों में 10 पार्टनर देशों की संरचना दर्ज है।
UAE बना यूपी का सबसे बड़ा BRICS निर्यात बाजार
ब्रिक्स सदस्य देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनकर सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश ने UAE को ₹15,133 करोड़ का निर्यात किया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों को होने वाले कुल निर्यात का करीब 43.5 प्रतिशत है। इसके बाद सऊदी अरब को ₹4,938 करोड़, मिस्र को ₹3,848 करोड़, इंडोनेशिया को ₹2,670 करोड़, चीन को ₹2,497 करोड़, ब्राजील को ₹2,209 करोड़, दक्षिण अफ्रीका को ₹1,690 करोड़, रूस को ₹1,584 करोड़, ईरान को ₹131 करोड़ और इथियोपिया को ₹110 करोड़ का निर्यात किया गया है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए पश्चिम एशिया से लेकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक अलग-अलग बाजार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। UAE और सऊदी अरब जैसे बाजार खाद्य, कृषि आधारित और औद्योगिक उत्पादों के लिए अहम हैं, जबकि चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े बाजारों में मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, वस्त्र और दूसरे विनिर्मित उत्पादों के लिए विस्तार की संभावनाएं बनी हुई हैं।
सहयोगी देशों में वियतनाम और मलेशिया की बड़ी हिस्सेदारी
ब्रिक्स के पार्टनर देशों में भी उत्तर प्रदेश के उत्पादों की पहुंच तेजी से दिखाई दे रही है। आंकड़ों के अनुसार वियतनाम को ₹5,949 करोड़ का निर्यात किया गया, जो सहयोगी देशों को होने वाले कुल निर्यात का 46.9 प्रतिशत है। इसके बाद मलेशिया को ₹3,740 करोड़ का निर्यात हुआ, जिसकी हिस्सेदारी 29.5 प्रतिशत बताई गई है। वहीं उज्बेकिस्तान को ₹1,339 करोड़, थाईलैंड को ₹733 करोड़, नाइजीरिया को ₹730 करोड़, युगांडा को ₹114 करोड़, कजाखस्तान को ₹49 करोड़, बोलीविया को ₹10 करोड़ और बेलारूस को ₹8 करोड़ का निर्यात किया गया।
वियतनाम, मलेशिया और उज्बेकिस्तान जैसे बाजारों में उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरणों, चमड़ा उत्पादों और अन्य औद्योगिक वस्तुओं के लिए संभावनाएं बताई जा रही हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रदेश के निर्यातक केवल पारंपरिक वैश्विक बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के उभरते बाजारों में भी अपनी जगह बना रहे हैं।
इलेक्ट्रिकल मशीनरी से आभूषण तक, कई उत्पादों की विदेशों में मांग
उत्तर प्रदेश के निर्यात की ताकत केवल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। ब्रिक्स सदस्य देशों को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं उपकरण का ₹3,894 करोड़, परिधान एवं वस्त्र सहायक सामग्री का ₹2,527 करोड़, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण का ₹2,494 करोड़ तथा कीमती एवं अर्द्धकीमती पत्थर, धातु एवं आभूषण का ₹2,378 करोड़ का निर्यात शामिल है।
वहीं ब्रिक्स के सहयोगी एवं पार्टनर देशों को भी प्रदेश से बड़ी मात्रा में औद्योगिक और विनिर्मित उत्पाद भेजे जा रहे हैं। इन देशों को इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं उपकरण का ₹928 करोड़, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण का ₹539 करोड़, एल्युमिनियम एवं उससे संबंधित उत्पादों का ₹302 करोड़ और चमड़ा एवं चमड़े से बने उत्पादों का ₹280 करोड़ का निर्यात हुआ है। इससे प्रदेश के औद्योगिक आधार और अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद निर्यात क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
योगी सरकार की औद्योगिक नीति को मिल रहा वैश्विक बाजार
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, कनेक्टिविटी, कारोबारी सुविधाओं, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मौजूद पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक औद्योगिक इकाइयों और वैश्विक बाजारों से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, चमड़ा, इलेक्ट्रिकल उपकरण, मशीनरी, आभूषण और दूसरे विनिर्माण क्षेत्र प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ब्रिक्स और सहयोगी देशों में ₹47,484 करोड़ के निर्यात का आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और संगठन के आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता का व्यापक उद्देश्य समूह के एजेंडे को आगे बढ़ाना और आर्थिक सहयोग समेत विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के लिए निर्यात को और बढ़ाने की चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन, बेहतर पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, टेस्टिंग सुविधाएं, ब्रांडिंग, डिजिटल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करना भी जरूरी होगा। इन क्षेत्रों में सुधार से प्रदेश के MSME, निर्यातक इकाइयों और स्थानीय उत्पादों को नए वैश्विक बाजारों में जगह बनाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में BRICS और पार्टनर देशों के बाजार उत्तर प्रदेश के निर्यात विस्तार के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहे हैं।



