यूपी की जेलों में सुरक्षा और सुधार व्यवस्था पर बड़ा फोकस, महानिदेशक ने दिए तकनीक और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश
उत्तर प्रदेश के कारागारों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा में सीसीटीवी, Jarvis कैमरा, ई-प्रिजन्स अर्ली रिलीज मॉड्यूल, दिव्यांग बंदियों और मुलाकात व्यवस्था पर अहम निर्देश दिए गए।

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की कारागार व्यवस्था में सुरक्षा, तकनीक, पारदर्शिता और सुधारात्मक गतिविधियों को और मजबूत करने के लिए कारागार मुख्यालय ने प्रदेश की जेलों की व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की। महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी परिक्षेत्रीय उप महानिरीक्षक कारागार तथा वरिष्ठ अधीक्षक, अधीक्षक और प्रभारी अधीक्षकों के साथ बैठक की। इस दौरान जेलों में सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, बंदियों के स्थानांतरण, मुलाकात और तलाशी व्यवस्था, बजट के उपयोग, ई-प्रिजन्स व्यवस्था तथा दिव्यांग बंदियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की गई। उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार जेल प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षा के साथ सुधार, पुनर्वास और पुनर्एकीकरण पर भी जोर देना है।
आदर्श कारागार में बंदियों के स्थानांतरण की समीक्षा, समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
बैठक में आदर्श कारागार में बंदियों के स्थानांतरण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों से इस प्रक्रिया की अद्यतन जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही प्रदेश की विभिन्न जेलों में सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। खासतौर पर जेल परिसरों में लगे सीसीटीवी कैमरों और Jarvis कैमरों की मुख्यालय स्थित वीडियो वॉल से कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। जिन कैमरों की कनेक्टिविटी अभी पूरी नहीं हुई है, उसे जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए ताकि मुख्यालय स्तर से तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके।
कारागारों में तकनीकी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर दिया गया यह जोर जेल सुरक्षा के साथ-साथ घटनाओं की निगरानी और समय पर कार्रवाई के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए और जहां कनेक्टिविटी या तकनीकी व्यवस्था में कमी है, वहां उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।
महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों की सुरक्षा और विकास पर विशेष जोर
बैठक में उन बच्चों से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई जो अपनी माताओं के साथ कारागारों में रह रहे हैं। इन बच्चों की देखभाल, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समुचित विकास के लिए जनपद स्तर पर आयोजित बैठकों की प्रगति की जानकारी ली गई। महानिदेशक ने निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की जरूरतों का आकलन संवेदनशीलता के साथ किया जाए और उनके हित में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि कारागार प्रशासन का दायित्व केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जेल परिसर में रहने वाले बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास से संबंधित मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया।
मुलाकात और तलाशी व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
महानिदेशक ने जेलों में बंदियों से मुलाकात और तलाशी की व्यवस्था की भी समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मुलाकात और तलाशी की मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत तथा प्रभावी बनाया जाए। जहां भी संभव हो, आधुनिक तकनीक और तकनीकी उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था से किसी भी स्तर पर समझौता किए बिना मुलाकात की प्रक्रिया को मानवीय, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
जेल प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल को लगातार बढ़ाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की आधिकारिक जानकारी में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-प्रिजन्स जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। ऐसे में नई समीक्षा में तकनीकी निगरानी और डिजिटल व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर दिया गया जोर जेल प्रशासन में डिजिटल मॉनिटरिंग की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बजट का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण इस्तेमाल करने के निर्देश
बैठक के दौरान कारागार विभाग के बजट उपभोग की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि उपलब्ध बजट का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अनुरक्षण मद के तहत उपलब्ध धनराशि के उपयोग की प्रगति पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से जेल लाइन में कर्मचारियों के आवास और उनसे संबंधित आवश्यकताओं के लिए इस मद की धनराशि के इस्तेमाल की स्थिति की समीक्षा की गई।
महानिदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बजट से जुड़े कार्यों में समयबद्धता के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए। कारागारों की आधारभूत और कर्मचारियों से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वीकृत धनराशि का निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
सभी जेलों में ई-प्रिजन्स अर्ली रिलीज मॉड्यूल की समीक्षा
बैठक में ई-प्रिजन्स अर्ली रिलीज प्रोसेसिंग मॉड्यूल को प्रदेश की सभी जेलों में शुरू किए जाने की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से इस डिजिटल मॉड्यूल की प्रगति की जानकारी लेते हुए इसे निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू करने पर जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ई-प्रिजन्स को विभाग की महत्वपूर्ण डिजिटल व्यवस्थाओं में शामिल किया गया है।
इस तरह जेल प्रशासन में बंदियों से संबंधित प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अर्ली रिलीज प्रोसेसिंग मॉड्यूल की समीक्षा भी इसी डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के उद्देश्य से की गई।
दिव्यांग बंदियों के प्रमाण-पत्र और सुविधाओं पर विशेष ध्यान
बैठक में कारागारों में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों से संबंधित व्यवस्थाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। महानिदेशक ने पात्र दिव्यांग बंदियों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किए जाने की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिया कि पात्र बंदियों के प्रमाण-पत्र समयबद्ध तरीके से जारी कराए जाएं। इसके साथ ही दिव्यांग बंदियों की जरूरतों के अनुसार जेल परिसर में सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।
दिव्यांग बंदियों के लिए अलग और सुगम मुलाकात व्यवस्था, रैम्प, आवश्यक जाली एवं सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं तथा जेल परिसर में अन्य जरूरी सुविधाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि दिव्यांग बंदियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनके सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं। इससे जेल प्रशासन में सुरक्षा के साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता देने की दिशा स्पष्ट होती है।
सुरक्षा, तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
महानिदेशक ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि कारागार प्रशासन में सुरक्षा, तकनीक, पारदर्शिता, मानवीय दृष्टिकोण और सुधारात्मक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। शासन और मुख्यालय की ओर से निर्धारित प्राथमिकताओं का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ जेलों में उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी व्यवस्थाओं का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया गया।
बैठक में अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक कारागार प्रदीप गुप्ता, सुभाष चंद्र शाक्य, उपमहानिरीक्षक कारागार शैलेन्द्र मैत्रेय, डॉ. रामधनी और पी.एन. पांडेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में हुई समीक्षा से स्पष्ट है कि प्रदेश की जेल व्यवस्था में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, डिजिटल प्रक्रियाओं, बंदियों की सुविधाओं और सुधारात्मक व्यवस्थाओं को भी समान महत्व दिया जा रहा है।



