UP StartUP :सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर
लखनऊ का हिंदकेयर मेडटेक स्टार्टअप इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक के इस्तेमाल पर काम कर रहा है। लाइफडैश प्लेटफॉर्म से दुर्घटना की सूचना, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय की पहल।

सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर
लखनऊ के हिंदकेयर मेडटेक की पहल, दुर्घटना से अस्पताल तक सूचना और समन्वय बेहतर करने पर जोर
लखनऊ। गंभीर बीमारी, सड़क दुर्घटना या किसी अन्य मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में शुरुआती समय मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में केवल अस्पताल में इलाज शुरू होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि घटना की सूचना समय पर मिलना, इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का सक्रिय होना, एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पताल तक जरूरी जानकारी पहुंचना और मरीज के पहुंचने से पहले आवश्यक चिकित्सकीय तैयारी होना भी अहम भूमिका निभाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए लखनऊ का हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक इमरजेंसी हेल्थकेयर को तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। स्टार्टअप की कोशिश एक ऐसे तकनीकी तंत्र को विकसित करने की है, जिसके माध्यम से इमरजेंसी की स्थिति में मरीज, रिस्पॉन्स टीम, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच सूचना एवं समन्वय को बेहतर बनाया जा सके।
गोल्डन ऑवर में तेजी से मदद पहुंचाने पर फोकस
हिंदकेयर मेडटेक की पूरी पहल इमरजेंसी के उस ‘गोल्डन ऑवर’ पर केंद्रित है, जिसमें मरीज की स्थिति की पहचान से लेकर उसे उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में लगने वाला समय महत्वपूर्ण हो जाता है। स्टार्टअप का मूल विचार है कि सही मरीज को सही समय पर सही जानकारी के साथ सही अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तकनीक के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाया जाए। इसके लिए दुर्घटना या इमरजेंसी की जानकारी मिलने से लेकर रिस्पॉन्स टीम और एंबुलेंस की सक्रियता तथा अस्पताल तक जरूरी सूचना पहुंचाने के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन के अनुसार, प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के तहत स्टार्टअप इकोसिस्टम को विस्तार देने के लिए यू-हब जैसे डीप-टेक इनक्यूबेशन सेंटर, नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला स्तर पर इनक्यूबेशन सुविधाओं के विस्तार और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता जैसे प्रावधानों पर काम किया जा रहा है। इसी व्यवस्था के तहत मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहे हिंदकेयर मेडटेक को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इनक्यूबेट किया गया है।
दुर्घटना की सूचना से अस्पताल तक बनेगा तकनीकी कनेक्शन
हिंदकेयर मेडटेक की प्रमुख पहल लाइफडैश स्मार्ट क्रैश-डिटेक्शन और इमरजेंसी अलर्ट प्लेटफॉर्म है। स्टार्टअप के अनुसार, इस तकनीक को संभावित सड़क दुर्घटना की पहचान और रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ इमरजेंसी नोटिफिकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका फोकस दुर्घटना की सूचना को संबंधित इमरजेंसी रिस्पॉन्डर, एंबुलेंस सेवा और अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने पर है।
इस तकनीक की परिकल्पना केवल दुर्घटना की पहचान तक सीमित नहीं है। स्टार्टअप एक ऐसे कनेक्टेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक मरीज से जुड़ी आवश्यक जानकारी के प्रवाह को बेहतर बनाया जा सके। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि सूचना पहुंचने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय में होने वाली देरी को कम किया जा सके तथा गोल्डन ऑवर के दौरान मरीज तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी प्रस्तुत की तकनीक
हिंदकेयर मेडटेक की टीम ने हाल ही में गोरखपुर में आयोजित एक स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के दौरान अपनी तकनीक और विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी प्रस्तुत किया। इस दौरान स्टार्टअप की ओर से इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक के इस्तेमाल तथा मरीज, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करने की अपनी परिकल्पना साझा की गई।
स्टार्टअप की टीम में डॉ. आयुष सिंह फाउंडर एवं डायरेक्टर के रूप में क्लीनिकल विजन और हेल्थकेयर रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं। स्टार्टअप का फोकस हेल्थकेयर और तकनीक के बीच ऐसा कनेक्शन विकसित करने पर है, जो इमरजेंसी की स्थिति में सूचना और रिस्पॉन्स की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से जोड़ सके।
उत्तर प्रदेश में हेल्थटेक इनोवेशन को बढ़ाने की कोशिश
हिंदकेयर मेडटेक की पहल ऐसे समय में सामने आ रही है, जब उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। हेल्थकेयर जैसे क्षेत्र में तकनीक आधारित समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स के लिए संस्थागत सहयोग उन्हें अपने प्रोटोटाइप और तकनीकी समाधान को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकता है।
इमरजेंसी हेल्थकेयर में किसी दुर्घटना के बाद कुछ मिनटों की देरी भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में दुर्घटना की पहचान, सूचना का तत्काल प्रसार, एंबुलेंस की उपलब्धता और अस्पताल को समय पर जानकारी मिलने जैसी प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं के इमरजेंसी रिस्पॉन्स मॉडल में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।



