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राज्यसभा चुनाव के बीच ओपी राजभर का अखिलेश पर हमला, बोले- ‘संविधान नहीं, खतरे में खुद सपा प्रमुख’

राज्यसभा चुनाव के बीच ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के विपक्षी एकता के आह्वान पर पलटवार किया। राजभर ने संविधान, PDA, परिवारवाद और राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा प्रमुख पर कई सवाल उठाए।

 

‘संविधान नहीं, अखिलेश खतरे में हैं’: विपक्षी एकता के आह्वान पर ओपी राजभर का सपा प्रमुख पर हमला

राज्यसभा चुनाव के बीच राजभर ने अखिलेश यादव के ‘मिलन’ और विपक्षी एकता वाले बयान पर साधा निशाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव को ‘मिलन का समय’ बताते हुए पुराने मतभेद भुलाकर सिद्धांत के मुद्दों पर साथ आने का संदेश दिया था। इसी के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख पर तीखा हमला बोला। अखिलेश यादव के बयान की रिपोर्टिंग में भी सामने आया कि उन्होंने पुराने साथियों के साथ मतभेद भुलाने और लोकतंत्र तथा संविधान के लिए एकजुट होने की बात कही।

‘संविधान नहीं, खुद अखिलेश यादव खतरे में हैं’

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के उस राजनीतिक रुख पर सवाल उठाया, जिसमें सपा प्रमुख लगातार संविधान और लोकतंत्र को लेकर विपक्षी दलों के साथ एकजुट होने की बात कर रहे हैं। राजभर ने कहा कि 2017 से अखिलेश यादव लगातार संविधान खतरे में होने की बात कहते रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक संविधान सुरक्षित है और खतरे में खुद अखिलेश यादव हैं।

राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है और विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक संपर्क और गठबंधन को लेकर गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। अखिलेश यादव ने भी राज्यसभा चुनाव को पुराने साथियों के साथ आने का अवसर बताया है।

‘चार बार यादव को मुख्यमंत्री बनाया, मुस्लिम चेहरे पर नहीं सोचा’

राजभर ने सपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया और यादव समाज से चार बार मुख्यमंत्री बनाए गए, लेकिन सपा नेतृत्व ने किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में नहीं सोचा।

यह टिप्पणी राजभर की ओर से सपा की राजनीतिक रणनीति पर की गई आलोचना है। इसे उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

‘राज्यसभा चुनाव भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’

अखिलेश यादव के राज्यसभा चुनाव को ‘भाईचारे’ और साथ आने के अवसर के रूप में देखने वाले बयान पर राजभर ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह भाईचारे का चुनाव नहीं बल्कि दौलत का चुनाव है।

राजभर ने सपा के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने ‘PDA’ की व्याख्या करते हुए परिवार, दौलतमंद और अपराधी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सपा नेतृत्व पर निशाना साधा। PDA को लेकर राजभर की यह टिप्पणी पहले भी सामने आ चुकी है, जब उन्होंने सपा के संभावित राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर अखिलेश यादव से सवाल किए थे।

राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर भी साधा निशाना

राजभर की यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के बीच आई है। 30 सितंबर की रिपोर्टों में सपा की ओर से राज्यसभा के लिए रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी के नामांकन दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी और तीसरे उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी थी।

राजभर ने इसी राजनीतिक संदर्भ में PDA की अपनी व्याख्या के जरिए सपा प्रमुख पर हमला बोला और सवाल किया कि राज्यसभा के लिए प्रस्तावित उम्मीदवारों में पिछड़े, दलित और मुस्लिम वर्गों का प्रतिनिधित्व किस तरह दिखाई देता है।

2017 और 2022 के चुनावों का भी किया जिक्र

ओम प्रकाश राजभर ने सपा और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक सहयोग पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों दल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी साथ चुनाव लड़ चुके हैं। उनके मुताबिक उस चुनाव में यादव और मुस्लिम मतदाताओं के साथ कांग्रेस का समर्थन भी गठबंधन को मिला था, लेकिन सपा 47 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी।

राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय वह समाजवादी पार्टी के साथ थे और सपा 125 सीटों तक पहुंची। राजभर ने दावा किया कि अंबेडकरनगर की पांच, आजमगढ़ की 10, गाजीपुर की सात सीटों तथा बलिया और मऊ समेत कुल 62 सीटों पर सपा को जीत सुभासपा के कारण मिली। यह आंकड़े और इसका कारण राजभर का राजनीतिक दावा है।

‘अखिलेश को पता है सरकार नहीं आने वाली’

राजभर ने अखिलेश यादव के राजनीतिक रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब सपा प्रमुख को पता चल चुका है कि उनकी सरकार नहीं आने वाली है और इसी वजह से वह अपने लिए राजनीतिक व्यवस्था करने में जुटे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस समय अखिलेश यादव को राजनीतिक समर्थन देने वाला कोई नहीं है।

यह बयान राजभर की राजनीतिक टिप्पणी और आकलन है। आगामी चुनाव के परिणाम को लेकर इस तरह के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती।

राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हुई है। अखिलेश यादव ने 2 अक्टूबर को पुराने मतभेद भुलाकर साथ आने का संदेश दिया, जबकि राजभर ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए सपा प्रमुख की राजनीतिक रणनीति और PDA को निशाना बनाया।

ऐसे में राज्यसभा चुनाव केवल उम्मीदवारों और संख्या के गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ विपक्षी दलों के बीच संभावित राजनीतिक सहयोग, पुराने गठबंधनों और नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।

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