UP Police: यूपी पुलिस को मिले 87 नए इंटरसेप्टर वाहन, 700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 87 नए इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यूपी में अब 172 इंटरसेप्टर वाहन, 700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें निगरानी कर रही हैं।

तेज रफ्तार और नशे में ड्राइविंग पर होगी कार्रवाई
नए इंटरसेप्टर वाहनों को खास तौर पर यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान और मौके पर कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन वाहनों की मदद से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई को मजबूत किया जाएगा। वाहनों में स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण लगाए गए हैं, जिससे पुलिस को नियम उल्लंघन की मौके पर जांच करने में सुविधा मिलेगी।
इन इंटरसेप्टर वाहनों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा। इससे यातायात प्रबंधन के साथ-साथ सड़क पर उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना के तहत भी निगरानी बढ़ाई गई है। यह व्यवस्था अब प्रदेश के सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
इन क्षेत्रों में 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। विशेष टीमें दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग कर रही हैं। साथ ही यातायात नियमों के पालन की निगरानी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की सड़क सुरक्षा रणनीति में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां लक्षित पुलिस निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संवेदनशील मार्गों और स्थानों पर पहले से निगरानी बढ़ाकर हादसों की आशंका को कम करना है।
आठ महीने में सड़क हादसों में करीब सात प्रतिशत कमी
प्रेस नोट के अनुसार, पिछले आठ महीनों में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और सड़क हादसों में मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।
इन आंकड़ों के साथ पुलिस की इंटरसेप्टर व्यवस्था, दुर्घटना-बाहुल्य क्षेत्रों में विशेष टीमों की तैनाती और तकनीकी निगरानी को सड़क सुरक्षा के लिए अपनाई जा रही बहुस्तरीय व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।

109 प्रमुख मार्गों पर रियल टाइम निगरानी
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ शहरों में यातायात जाम की समस्या से निपटने के लिए भी तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म के माध्यम से रियल टाइम निगरानी की जा रही है।
रूट मार्शल और संबंधित विभाग इन मार्गों पर यातायात की स्थिति पर नजर रखते हैं और जाम की वजहों की पहचान कर मौके पर आवश्यक कार्रवाई करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में इन 109 मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे। अगस्त तक इनकी संख्या घटकर 8,569 रह गई। यानी इस अवधि में कंजेशन पॉइंट में करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
कैमरों से निगरानी और नियम तोड़ने वालों के ई-चालान
यातायात व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश में ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ANPR कैमरों के साथ रेड लाइट और निर्धारित गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड के जरिए यातायात गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।
जहां आवश्यकता होती है, वहां जाम और अधिक भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के ई-चालान किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा प्रत्यक्ष कार्रवाई भी की जाती है।
सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार का फोकस
87 नए इंटरसेप्टर वाहनों की शुरुआत, 700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में विशेष टीमों की तैनाती, ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल कॉरिडोर की निगरानी तथा कैमरा आधारित प्रवर्तन व्यवस्था को प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का फोकस दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान और त्वरित कार्रवाई पर है।
इंटरसेप्टर वाहनों में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों और ITMS, Safe City तथा UP GATI जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से यातायात प्रबंधन को अधिक निगरानी-आधारित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही दुर्घटना-बाहुल्य क्षेत्रों में विशेष टीमों की तैनाती का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर लगातार निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करना है।



