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अखिलेश की परमिशन के बिना शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को सपा दफ्तर में नहीं मिलती एंट्री, राजभर का बड़ा हमला

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया कि शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को सपा कार्यालय में प्रवेश के लिए अनुमति की जरूरत है। राजभर ने शिवपाल के योगदान का भी जिक्र किया।

शिवपाल और धर्मेंद्र यादव की सपा दफ्तर में एंट्री पर राजभर का दावा, अखिलेश पर साधा निशाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी से जुड़े अंदरूनी समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर ने शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव के सपा कार्यालय में प्रवेश को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि दोनों नेताओं को कार्यालय में जाने के लिए अखिलेश यादव की अनुमति की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, यह बात राजभर के आरोप/दावे के रूप में सामने आई है और सपा की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इससे पहले राष्ट्रीय लोक दल के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल भी इसी तरह का दावा कर चुके हैं।

‘आप हरी झंडी देंगे, तभी एंट्री मिलेगी’

ओमप्रकाश राजभर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को लेकर सवाल उठाया। राजभर ने दावा किया कि सपा कार्यालय में दोनों नेताओं को प्रवेश के लिए अखिलेश यादव की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने इसी दावे के आधार पर अखिलेश यादव पर तंज कसा और सवाल उठाया कि क्या पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए भी उन्हें नेतृत्व की अनुमति की जरूरत है।

राजभर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज है। पिछले दिनों भी राजभर समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं को लेकर कई टिप्पणियां कर चुके हैं। 28 सितंबर को उन्होंने सपा-कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था।

शिवपाल के राजनीतिक योगदान का जिक्र कर अखिलेश पर सवाल

राजभर ने अपनी पोस्ट में शिवपाल यादव के समाजवादी पार्टी के गठन और संगठन के लिए किए गए कामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव के साथ गांव-गांव जाकर पार्टी के संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया और पार्टी खड़ी करने में उनका भी पसीना लगा है।

राजभर ने इसी संदर्भ में अखिलेश यादव पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन शिवपाल यादव का पार्टी के निर्माण में योगदान रहा है। उन्होंने शिवपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर ऐसी स्थिति देखनी पड़ रही है।

धर्मेंद्र यादव का भी किया जिक्र

ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में धर्मेंद्र यादव का नाम भी लिया। उन्होंने दावा किया कि सपा कार्यालय में प्रवेश को लेकर धर्मेंद्र यादव की स्थिति भी शिवपाल यादव जैसी है। इसके आधार पर राजभर ने समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़ा किया।

राजभर ने अपनी टिप्पणी में यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की कि यदि पार्टी के प्रमुख पारिवारिक सदस्यों को लेकर ऐसी स्थिति है तो संगठन के अन्य नेताओं के साथ पार्टी के भीतर संबंधों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। यह राजभर की राजनीतिक टिप्पणी है, जिसे उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर रखा है।

‘ऊपरवाला सब देख रहा है’

अपनी पोस्ट के अंत में ओमप्रकाश राजभर ने शिवपाल यादव के मान-सम्मान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद पार्टी के निर्माण में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिवपाल यादव की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें इस उम्र में ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजभर ने अंत में लिखा कि ‘ऊपरवाला सब देख रहा है’ और वही मान-सम्मान तथा स्वाभिमान का न्याय करेगा। राजभर की यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के भीतर पारिवारिक और संगठनात्मक रिश्तों को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच आई है।

सपा कार्यालय में प्रवेश को लेकर पहले भी सामने आया था दावा

शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव के सपा कार्यालय में प्रवेश को लेकर 28 सितंबर को RLD प्रवक्ता रोहित अग्रवाल की ओर से भी इसी तरह का दावा सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा था कि दोनों नेताओं को सपा कार्यालय आने के लिए अखिलेश यादव की मंजूरी लेनी होगी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस दावे की सपा की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं बताई गई है। इसलिए सपा कार्यालय में प्रवेश को लेकर अनुमति की बात को फिलहाल राजनीतिक नेताओं के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।

राजभर और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच पहले भी सार्वजनिक रूप से तीखी बयानबाजी होती रही है। सितंबर में शिवपाल यादव ने राजभर के कुछ बयानों पर पलटवार करते हुए उनकी आलोचना की थी।

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