उत्तर प्रदेश

पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, काकोरी क्रांतिकारियों की पैरवी को किया याद

पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, काकोरी क्रांतिकारियों की पैरवी, सुशासन और हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में पंत के योगदान को याद किया।

 

लखनऊ।  भारत रत्न, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया और स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण तथा उत्तर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका को याद किया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती 10 सितंबर को मनाई जा रही है और देश के विभिन्न हिस्सों में उनके योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की थी पैरवी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती के साथ पैरवी करने वाले प्रमुख नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत भी शामिल थे। उन्होंने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और स्वतंत्रता संघर्ष के विभिन्न चरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1937 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत को संयुक्त प्रांत के प्रीमियर के रूप में चुना गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन सहित स्वतंत्रता संग्राम के कई महत्वपूर्ण आंदोलनों में उनकी भूमिका रही। इस तरह उनका सार्वजनिक जीवन केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश की आजादी के लिए चल रहे संघर्ष में भी सक्रिय योगदान दिया।

उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में रखी सुशासन की नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय वर्तमान उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और प्रदेश का क्षेत्रफल तथा प्रशासनिक दायरा काफी बड़ा था। ऐसे समय में पंत जी ने उत्तर प्रदेश में सुशासन की मजबूत नींव रखने के साथ आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए काम किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण सुधार किए और उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी उल्लेखनीय रहा।

योगी आदित्यनाथ ने पंत जी के प्रशासनिक दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में स्थापित करना उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक विकास और समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण से जुड़े विषयों पर काम हुआ। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रदेश के प्रशासनिक और विकासात्मक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यूपी सरकार की ओर से मार्च 2026 में भी पंत की पुण्यतिथि पर उनके विकास संबंधी दृष्टिकोण और राजभाषा हिंदी के प्रोत्साहन में भूमिका को याद किया गया था।

देश के गृह मंत्री के रूप में हिंदी को दिलाया सम्मान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योगी ने कहा कि हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी पंडित गोविंद बल्लभ पंत का अहम योगदान रहा।

पंडित गोविंद बल्लभ पंत का सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रशासन और राष्ट्र निर्माण तक फैला रहा। अधिवक्ता के रूप में काकोरी के क्रांतिकारियों की पैरवी से लेकर उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने तक उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में योगदान दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी 139वीं जयंती पर उनके इसी बहुआयामी योगदान को याद करते हुए प्रदेश सरकार और जनता की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

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